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यूपी बोर्ड के स्कूलों में फीस का घपला
Updated Fri, 18 Aug 2017 03:18 PM IST
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आगरा। यूपी बोर्ड के बड़ी संख्या में विद्यालयाें में खेल फीस के नाम घपला किया जा रहा है। छात्र-छात्राओं से फीस वसूली जा रही है। लेकिन बदले में उन्हें खेल संसाधन और मंच उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग भी इस ओर से उदासीन है।
जिले में यूपी बोर्ड के विद्यालय 790 हैं। गत दो वर्षों से अधिकतर वित्तविहीन विद्यालय शासनादेश के आधार पर विभाग को खेल फीस नहीं दे रहे हैं। हालांकि स्कूलों में विद्यार्थियाें से फीस ली जा रही है। शासनादेश के मुताबिक प्रति विद्यार्थी से प्रति माह पांच रुपये खेल फीस ली जानी चाहिए।
दो माह की फीस विभाग को दिए जाने की व्यवस्था है। वित्तविहीन विद्यालय विभाग को फीस नहीं दे रहे हैं। वह स्कूल में कितनी फीस ले रहे हैं, विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में खेल सुविधाएं हैं या नहीं, माध्यमिक शिक्षा विभाग इसका सत्यापन नहीं करा रहा है। फीस न लिए जाने के नाम पर विभाग इन स्कूलाें के विद्यार्थियाें को विभागीय खेलकूद प्रतियोगिताआें में प्रतिभाग नहीं करा रहा है।
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राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों से फीस ली जाती है। बड़ी संख्या में विद्यालयों में मैदान नहीं हैं। इससे खेलकूद नहीं हो पाते। एक चौथाई से भी कम विद्यालय विभागीय खेलकूद में टीमों का प्रतिभाग करा रहे हैं। इन स्कूलों में खेल फीस के एवज में विद्यार्थी को सुविधा नहीं दी जा रही है। विभाग की ओर से प्रति वर्ष निर्देश जारी किया जाता है कि प्रत्येक विद्यालय का पांच खेलाें में प्रतिभाग जरूरी है। प्रतिभाग न करने वाले विद्यालयाें से कारण तक नहीं पूछा जाता।
प्रत्येक स्कूल से मांगा जाएगा कि खेल फीस वह कितनी ले रहे हैं और उसके बदले विद्यार्थी को क्या सुविधा प्रदान की जा रही है। औचक निरीक्षण करके भी इसकी पड़ताल की जाएगी। खेल फीस को खेल के मद में ही खर्च किया जा सकता है।
- डा. विनोद कुमार राय, जिला विद्यालय निरीक्षक
आंकड़े एक नजर में
790 यूपी बोर्ड के विद्यालय हैं जिले में
109 सहायता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं
33 राजकीय विद्यालय हैं
2.75 लाख से अधिक विद्यार्थी कक्षा नौ से 12 तक में पंजीकृत होते हैं
60 रुपये प्रत्येक वर्ष एक विद्यार्थी से खेल फीस के रूप में लिए जाते हैं
10 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से फीस विभाग को दी जाती है
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जिले में यूपी बोर्ड के विद्यालय 790 हैं। गत दो वर्षों से अधिकतर वित्तविहीन विद्यालय शासनादेश के आधार पर विभाग को खेल फीस नहीं दे रहे हैं। हालांकि स्कूलों में विद्यार्थियाें से फीस ली जा रही है। शासनादेश के मुताबिक प्रति विद्यार्थी से प्रति माह पांच रुपये खेल फीस ली जानी चाहिए।
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दो माह की फीस विभाग को दिए जाने की व्यवस्था है। वित्तविहीन विद्यालय विभाग को फीस नहीं दे रहे हैं। वह स्कूल में कितनी फीस ले रहे हैं, विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में खेल सुविधाएं हैं या नहीं, माध्यमिक शिक्षा विभाग इसका सत्यापन नहीं करा रहा है। फीस न लिए जाने के नाम पर विभाग इन स्कूलाें के विद्यार्थियाें को विभागीय खेलकूद प्रतियोगिताआें में प्रतिभाग नहीं करा रहा है।
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राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों से फीस ली जाती है। बड़ी संख्या में विद्यालयों में मैदान नहीं हैं। इससे खेलकूद नहीं हो पाते। एक चौथाई से भी कम विद्यालय विभागीय खेलकूद में टीमों का प्रतिभाग करा रहे हैं। इन स्कूलों में खेल फीस के एवज में विद्यार्थी को सुविधा नहीं दी जा रही है। विभाग की ओर से प्रति वर्ष निर्देश जारी किया जाता है कि प्रत्येक विद्यालय का पांच खेलाें में प्रतिभाग जरूरी है। प्रतिभाग न करने वाले विद्यालयाें से कारण तक नहीं पूछा जाता।
प्रत्येक स्कूल से मांगा जाएगा कि खेल फीस वह कितनी ले रहे हैं और उसके बदले विद्यार्थी को क्या सुविधा प्रदान की जा रही है। औचक निरीक्षण करके भी इसकी पड़ताल की जाएगी। खेल फीस को खेल के मद में ही खर्च किया जा सकता है।
- डा. विनोद कुमार राय, जिला विद्यालय निरीक्षक
आंकड़े एक नजर में
790 यूपी बोर्ड के विद्यालय हैं जिले में
109 सहायता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं
33 राजकीय विद्यालय हैं
2.75 लाख से अधिक विद्यार्थी कक्षा नौ से 12 तक में पंजीकृत होते हैं
60 रुपये प्रत्येक वर्ष एक विद्यार्थी से खेल फीस के रूप में लिए जाते हैं
10 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से फीस विभाग को दी जाती है