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Agra News: अवैध कॉलोनियों में फंस गए 500 खरीदार, जमीन एडीए के नाम
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अवैध कॉलोनियों में 500 प्लॉट खरीदार फंस गए
आगरा। रोहता, जखौदा, पट्टी पचगई, देवरी से लेकर इटौरा तक जिस भूमि का अधिग्रहण आगरा विकास प्राधिकरण ने 100 मीटर चौड़ी इनर रिंग रोड व लैंड पार्सल के लिए किया था, वहां अवैध कॉलोनियों में 500 प्लॉट खरीदार फंस गए। एडीए से अनुबंध कर बिल्डर डकार गए, जबकि प्लॉट खरीदार 16 साल बाद भी खाली हाथ हैं।
ऐसे में एक तरफ बिल्डर ने जालसाजी की, दूसरी तरफ एडीए अधिकारियों से लेकर लेखपाल तक लापरवाह बने रहे। 2009-10 में भूमि अधिग्रहण के समय मौके पर सत्यापन नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि उक्त भूमि कागजों में एडीए के नाम दर्ज हो गई, लेकिन 16 साल बाद भी भूमि पर प्लॉट खरीदार काबिज हैं। यहां प्लॉट खरीदने वाले नगेंद्र फौजी ने बताया कि एडीए ने बिल्डरों को किसानों की तरह मुआवजा बांटा। 100 से अधिक खसरे ऐसे हैं, जिनमें एडीए व बिल्डर दोनों का नाम दर्ज है। इसका फायदा उठाकर अभी भी अवैध रूप से प्लॉट की खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है। वहीं, इस संबंध में एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली का कहना है कि जांच के लिए टीम बनाई है। मौका-मुआयना कराया जाएगा। भूमि पर कब्जे संबंधी बोर्ड लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अवैध कॉलोनियों में प्लॉट नहीं खरीदने चाहिए। नुकसान होने पर खरीदार स्वयं जिम्मेदार होता है।
क्या बोले पीड़ित...
- मैंने 333 वर्ग गज का प्लॉट खरीदा था। एडीए भूमि पर अपना कब्जा बताता है। मेरे पास रजिस्ट्री है, जबकि खतौनी में एडीए का नाम दर्ज है। जमीन भी गई, पैसा भी डूब गया।- धर्मेंद्र अग्रवाल, मुबारकपुर
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- पिंक सिटी में 200 वर्ग गज का प्लॉट खरीदा था। राजस्व विभाग से 143 यानी कि आबादी घोषित कराने के बाद कॉलोनी बनाई गई थी। बिल्डर और एडीए की साठगांठ ने हमे फंसाया है।- जगदीश सिंह, कागारौल
- मेरी 3800 वर्ग गज भूमि एडीए ने अधिग्रहित की। खतौनी से मेरा नाम काट कर एडीए ने अपना नाम दर्ज कर लिया। जमीन पर हमारा कब्जा है। भूमि के बदले चार गुना मुआवजा दिया जाए। - धर्म सिंह, पट्टी पचगई
- 10 विस्वा भूमि एडीए ने सड़क बनाने के लिए ली थी। सड़क दूसरी जगह बन गई। अब हमारी जमीन वापस कर दी जाए। या हमें सर्किल रेट से मुआवजा दिया जाए। - नरोत्तम सिंह, पचगई
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ऐसे में एक तरफ बिल्डर ने जालसाजी की, दूसरी तरफ एडीए अधिकारियों से लेकर लेखपाल तक लापरवाह बने रहे। 2009-10 में भूमि अधिग्रहण के समय मौके पर सत्यापन नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि उक्त भूमि कागजों में एडीए के नाम दर्ज हो गई, लेकिन 16 साल बाद भी भूमि पर प्लॉट खरीदार काबिज हैं। यहां प्लॉट खरीदने वाले नगेंद्र फौजी ने बताया कि एडीए ने बिल्डरों को किसानों की तरह मुआवजा बांटा। 100 से अधिक खसरे ऐसे हैं, जिनमें एडीए व बिल्डर दोनों का नाम दर्ज है। इसका फायदा उठाकर अभी भी अवैध रूप से प्लॉट की खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है। वहीं, इस संबंध में एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली का कहना है कि जांच के लिए टीम बनाई है। मौका-मुआयना कराया जाएगा। भूमि पर कब्जे संबंधी बोर्ड लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अवैध कॉलोनियों में प्लॉट नहीं खरीदने चाहिए। नुकसान होने पर खरीदार स्वयं जिम्मेदार होता है।
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क्या बोले पीड़ित...
- मैंने 333 वर्ग गज का प्लॉट खरीदा था। एडीए भूमि पर अपना कब्जा बताता है। मेरे पास रजिस्ट्री है, जबकि खतौनी में एडीए का नाम दर्ज है। जमीन भी गई, पैसा भी डूब गया।- धर्मेंद्र अग्रवाल, मुबारकपुर
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- पिंक सिटी में 200 वर्ग गज का प्लॉट खरीदा था। राजस्व विभाग से 143 यानी कि आबादी घोषित कराने के बाद कॉलोनी बनाई गई थी। बिल्डर और एडीए की साठगांठ ने हमे फंसाया है।- जगदीश सिंह, कागारौल
- मेरी 3800 वर्ग गज भूमि एडीए ने अधिग्रहित की। खतौनी से मेरा नाम काट कर एडीए ने अपना नाम दर्ज कर लिया। जमीन पर हमारा कब्जा है। भूमि के बदले चार गुना मुआवजा दिया जाए। - धर्म सिंह, पट्टी पचगई
- 10 विस्वा भूमि एडीए ने सड़क बनाने के लिए ली थी। सड़क दूसरी जगह बन गई। अब हमारी जमीन वापस कर दी जाए। या हमें सर्किल रेट से मुआवजा दिया जाए। - नरोत्तम सिंह, पचगई

अवैध कॉलोनियों में 500 प्लॉट खरीदार फंस गए

अवैध कॉलोनियों में 500 प्लॉट खरीदार फंस गए

अवैध कॉलोनियों में 500 प्लॉट खरीदार फंस गए

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