{"_id":"5c742bbdbdec22691d36dc5e","slug":"41551117245-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीएम साहब! सोरों को भी घोषित करें तीर्थ नगरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीएम साहब! सोरों को भी घोषित करें तीर्थ नगरी
विज्ञापन
सोरों को तीर्थ स्थल घोषित करने की मांग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोरों(कासगंज)। प्रदेश के मुखिया मंगलवार को पड़ोसी जनपद एटा आ रहे है। उनके आगमन पर बाशिंदों की भी निगाहें लगी हैं कि हुई हैं। सोरोंवासी चाहते हैं कि मुख्यमंत्री उनकी पुकार को सुन लें और तीर्थनगरी के लिए जो डीपीआर तैयार की गई है उसे हरी झंडी दें।
भगवान श्रीहरि विष्णु की मोक्ष स्थली सोरों उत्तर भारत की प्रमुख तीर्थ स्थली है। पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री एटा में आए थे तो उन्होंने सोरों को तीर्थस्थल घोषित करते हुए डीपीआर तैयार कराने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने 86 करोड़ रुपये से सोरों के सुंदरीकरण की डीपीआर तैयार की जो शासन को भेज दी लेकिन शासन स्तर से डीपीआर को हरी झंडी नहीं मिली। इस बीच प्रदेश सरकार ने बजट में राजापुर को तुलसी पीठ देने की घोषणा कर दी जिससे सोरों के बाशिंदे मायूस हो गए और उनमें सरकार के प्रति गुस्सा है। मुख्यमंत्री के इस निर्णय के बाद उन्होंने आंदोलन का रास्ता भी अपनाया। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एटा में दौरे पर आ रहे हैं। ऐसे में तीर्थनगरी के बाशिंदों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। वे आस लगाए बैठे हैं कि शायद सीएम तीर्थनगरी के डीपीआर को हरी झंडी देते हुए बजट की घोषणा कर देंगे।
सोरों का महत्व
कासगंज। तीर्थनगरी सोरों का विशेष महत्व है। यहां के हरिपदी कुंड में विसर्जित की जाने वाली अस्थियां 72 घंटे में विलीन हो जाती हैं। वैज्ञानिक भी आज तक यह रहस्य नहीं जान सके। इसके अलावा महाकवि गोस्वामी तुलसी दास ने यहां जन्म लिया और रामचरित मानस की रचना की। यह तीर्थनगरी महापुरुषों, मुनियों की तपोस्थली भी रही है।
विज्ञापन
इच्छा मृत्यु दे दो सीएम साहब
सोरों। तीर्थनगरी के विकास की मांग को लेकर आंदोलन की राह पर चल रहे आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इच्छा मृत्यु मांगी है। आंदोलनकारी भूपेश शर्मा का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री सोरों को तुलसीदास की जन्मस्थली से को तीर्थ स्थल से जोड़ने और विकास को बजट नहीं दे सकते तो आंदोलनकारियों को इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दें।
विज्ञापन
भगवान श्रीहरि विष्णु की मोक्ष स्थली सोरों उत्तर भारत की प्रमुख तीर्थ स्थली है। पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री एटा में आए थे तो उन्होंने सोरों को तीर्थस्थल घोषित करते हुए डीपीआर तैयार कराने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने 86 करोड़ रुपये से सोरों के सुंदरीकरण की डीपीआर तैयार की जो शासन को भेज दी लेकिन शासन स्तर से डीपीआर को हरी झंडी नहीं मिली। इस बीच प्रदेश सरकार ने बजट में राजापुर को तुलसी पीठ देने की घोषणा कर दी जिससे सोरों के बाशिंदे मायूस हो गए और उनमें सरकार के प्रति गुस्सा है। मुख्यमंत्री के इस निर्णय के बाद उन्होंने आंदोलन का रास्ता भी अपनाया। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एटा में दौरे पर आ रहे हैं। ऐसे में तीर्थनगरी के बाशिंदों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। वे आस लगाए बैठे हैं कि शायद सीएम तीर्थनगरी के डीपीआर को हरी झंडी देते हुए बजट की घोषणा कर देंगे।
विज्ञापन
सोरों का महत्व
कासगंज। तीर्थनगरी सोरों का विशेष महत्व है। यहां के हरिपदी कुंड में विसर्जित की जाने वाली अस्थियां 72 घंटे में विलीन हो जाती हैं। वैज्ञानिक भी आज तक यह रहस्य नहीं जान सके। इसके अलावा महाकवि गोस्वामी तुलसी दास ने यहां जन्म लिया और रामचरित मानस की रचना की। यह तीर्थनगरी महापुरुषों, मुनियों की तपोस्थली भी रही है।
विज्ञापन
इच्छा मृत्यु दे दो सीएम साहब
सोरों। तीर्थनगरी के विकास की मांग को लेकर आंदोलन की राह पर चल रहे आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इच्छा मृत्यु मांगी है। आंदोलनकारी भूपेश शर्मा का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री सोरों को तुलसीदास की जन्मस्थली से को तीर्थ स्थल से जोड़ने और विकास को बजट नहीं दे सकते तो आंदोलनकारियों को इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दें।