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सरपट दौड़ेंगी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें
Updated Wed, 05 Dec 2018 12:16 AM IST
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टूंडला (फिरोजाबाद)। डेडीकेटेड फ्रेट कारिडोर के बन जाने से दल्लिी-कानपुर रेलखंड पर रेल संचालन का दबाव काफी कम होने की संभावना है। इस ट्रैक पर हर रोज करीब 250 ट्रेनों का आवागमन रहता है। इसमें आधी मालगाड़ियां भी शामिल हैं। इस कारीडोर के शुरू होने से ट्रेनों का संचालन समय से हो सकेगा।
दिल्ली-कोलकाता रेलखंड पर सर्वाधिक ट्रेनों का दबाव रहता है। इस कारण राजधानी, शताब्दी एक्सप्रेस जैसी वीआईपी ट्रेनें भी अपने निर्धारित समय से लेट हो जाती हैं। रेलवे ने न्यू भदान से न्यू खुर्जा रेलवे स्टेशन तक डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर को चालू किया है।
इसके चालू होने से दिल्ली-कानपुर रेलखंड पर अभी कुछ ट्रेनों का दबाव कम हुआ है। वहीं माल कॉरिडोर के आगे तक बन जाने के बाद यह दबाव समाप्त हो जाएगा और इस ट्रैक पर मालगाड़ियां सरपट दौड़ने लगेंगी। ऐसे में यात्री ट्रेनों के लेट होने की संभावना काफी कम हो जाएगी। वहीं मालगाड़ियां भी समय से निर्धारित स्थान पर व्यापारियों के माल को पहुंचाया करेंगी। जिससे रेलवे को अधिक कमाई होगी।
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यात्री ट्रेनों के लेट होने से रेलवे अनजान नहीं था। इसलिए रेलवे ने मालगाड़ियों के लिए अलग से ट्रैक की व्यवस्था करने की प्लानिंग की और इसको धरातल पर उतारा। दिल्ली-कानपुर रेलखंड पर क्षमता से डेढ़ गुना अधिक गाड़ियां चल रही थीं।
उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद के पीआरओ सुनील कुमार ने बताया कि इस रूट पर अभी मालगाड़ियों का एवरेज 25 किमी/प्रतिघंटा था। डेडीकेटेड पर एवरेज 75 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी। वहीं यात्री ट्रेनें का संचालन समय से होने लगेगा। बंगाल पर माल कॉरिडोर 2020 तक तैयार हो जाएगा।
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दिल्ली-कोलकाता रेलखंड पर सर्वाधिक ट्रेनों का दबाव रहता है। इस कारण राजधानी, शताब्दी एक्सप्रेस जैसी वीआईपी ट्रेनें भी अपने निर्धारित समय से लेट हो जाती हैं। रेलवे ने न्यू भदान से न्यू खुर्जा रेलवे स्टेशन तक डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर को चालू किया है।
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इसके चालू होने से दिल्ली-कानपुर रेलखंड पर अभी कुछ ट्रेनों का दबाव कम हुआ है। वहीं माल कॉरिडोर के आगे तक बन जाने के बाद यह दबाव समाप्त हो जाएगा और इस ट्रैक पर मालगाड़ियां सरपट दौड़ने लगेंगी। ऐसे में यात्री ट्रेनों के लेट होने की संभावना काफी कम हो जाएगी। वहीं मालगाड़ियां भी समय से निर्धारित स्थान पर व्यापारियों के माल को पहुंचाया करेंगी। जिससे रेलवे को अधिक कमाई होगी।
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यात्री ट्रेनों के लेट होने से रेलवे अनजान नहीं था। इसलिए रेलवे ने मालगाड़ियों के लिए अलग से ट्रैक की व्यवस्था करने की प्लानिंग की और इसको धरातल पर उतारा। दिल्ली-कानपुर रेलखंड पर क्षमता से डेढ़ गुना अधिक गाड़ियां चल रही थीं।
उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद के पीआरओ सुनील कुमार ने बताया कि इस रूट पर अभी मालगाड़ियों का एवरेज 25 किमी/प्रतिघंटा था। डेडीकेटेड पर एवरेज 75 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी। वहीं यात्री ट्रेनें का संचालन समय से होने लगेगा। बंगाल पर माल कॉरिडोर 2020 तक तैयार हो जाएगा।