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अधिकारियों की शह पर चल रहा था वसूली का खेल
Updated Tue, 14 Aug 2018 11:16 PM IST
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एटा। एआरटीओ कार्यालय में सोमवार शाम को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और एसडीएम महेंद्र सिंह तंवर के नेतृत्व में की गई कार्रवाई के बाद हड़कंप मचा हुआ है। पूछताछ में सामने आया है कि कार्यालय में वसूली और दलाली का पूरा खेल अधिकारियों की शह पर चल रहा था। एक महीने पहले आने की बात करने वाले जिम्मेदार अधिकारी को बड़े पैमाने पर हो रही वसूली की जानकारी नहीं होने की बात कुछ गले नहीं उतर रही है। ऐसे में मामले में जांच को लेकर तैयारी चल रही है। वहीं मंगलवार को कोतवाली देहात में कार्यालय से पकड़े गए सात दलालों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
मंगलवार को कोतवाली देहात में एआरटीओ कार्यालय में दलाली करने के आरोप में बिजेंद्र सिंह पुत्र नेत्रपाल निवासी कुनावली, भानु उर्फ धीरज बघेल पुत्र वासुदेव बघेल निवासी चिलासनी, मोहम्मद आरिफ पुत्र अलाउद्दीन निवासी मानपुर, समीर पुत्र रामनाथ मिश्रा निवासी अरुणा नगर, राजीव जैन पुत्र अजीत जैन निवासी महाराणा प्रताप नगर, गोविंद सक्सेना पुत्र योगेश सक्सेना निवासी होली गेट, हसीन मियां पुत्र शब्बीर खान निवासी धरौली के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस सातों दलालों को जेल भेजने की तैयारी कर रही है। उधर, कार्यालय में मंगलवार को आवेदक परेशान नजर आए। कुछ आवेदक ऐसे थे, जिन्होंने काम कराने के लिए दलालों को रकम अदा कर दी थी। वहीं कार्यालय में आने वाले हर आवेदक से मंगलवार को पूछताछ की गई। इस दौरान प्रशिक्षु लाइसेंस कक्ष में ताला पड़ा रहा।
नेताओं की पैरवी शुरू
एआरटीओ कार्यालय से पकड़े गए दलालों को बचाने के लिए राजनीति शुरू हो गई है। दलालों की पैरवी करने के लिए अधिकारियों के पास सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के फोन पहुंचने लगे हैं।
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मंगलवार को कोतवाली देहात में एआरटीओ कार्यालय में दलाली करने के आरोप में बिजेंद्र सिंह पुत्र नेत्रपाल निवासी कुनावली, भानु उर्फ धीरज बघेल पुत्र वासुदेव बघेल निवासी चिलासनी, मोहम्मद आरिफ पुत्र अलाउद्दीन निवासी मानपुर, समीर पुत्र रामनाथ मिश्रा निवासी अरुणा नगर, राजीव जैन पुत्र अजीत जैन निवासी महाराणा प्रताप नगर, गोविंद सक्सेना पुत्र योगेश सक्सेना निवासी होली गेट, हसीन मियां पुत्र शब्बीर खान निवासी धरौली के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस सातों दलालों को जेल भेजने की तैयारी कर रही है। उधर, कार्यालय में मंगलवार को आवेदक परेशान नजर आए। कुछ आवेदक ऐसे थे, जिन्होंने काम कराने के लिए दलालों को रकम अदा कर दी थी। वहीं कार्यालय में आने वाले हर आवेदक से मंगलवार को पूछताछ की गई। इस दौरान प्रशिक्षु लाइसेंस कक्ष में ताला पड़ा रहा।
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नेताओं की पैरवी शुरू
एआरटीओ कार्यालय से पकड़े गए दलालों को बचाने के लिए राजनीति शुरू हो गई है। दलालों की पैरवी करने के लिए अधिकारियों के पास सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के फोन पहुंचने लगे हैं।
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