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भारत छोड़ो आंदोलन ने भर दिया था युवाओं में जोश
Updated Tue, 14 Aug 2018 06:44 PM IST
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मैनपुरी। आजादी आंदोलन में जिले का योगदान कम नहीं है। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश की आजादी तक क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों से लोहा लिया। बुजुर्गों को आज भी याद है कि भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान हर किसी में अलग ही जज्बा पैदा हुआ था। महात्मा गांधी द्वारा नौ अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा का असर यहां भी हुआ। आंदोलन से जुड़कर युवाओं और किसानों ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया। खासतौर पर बेवर क्षेत्र की जनता आजादी की लड़ाई में दीवानी होकर उमड़ी। बेवर क्रांति के तहत 14 अगस्त को क्रांतिकारियों ने थाने पर तिरंगा फहरा दिया था। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी लोग अंग्रेजों के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे।
दया नारायण गुप्ता दयालू बताते हैं कि नौ अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा पर हर किसी में देश की खातिर मर मिटने का जज्बा पैदा हो गया था। नगर में खासकर युवा सड़कों पर आ गए और अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारे लगाए थे। विदेश वस्त्रों की होली जगह-जगह जलाई गई थी। प्रकाशचंद्र जैन दादा को आज भी नौ अगस्त का दिन याद है। जब शहर ही नहीं गांव-गांव अंग्रेजों के खिलाफ जंग के लिए लोग तैयार हो गए थे। अंग्रेजी अदालतों का बहिष्कार किया गया। विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई। हर एक में देश को आजादी दिलाने का जज्बा नजर आता था।
श्रीकृष्ण मिश्रा ने बताया कि महात्मा गांधी की घोषणा का असर यह हुआ कि छात्र एकजुट होकर अंग्रेजों के विरोध में सड़कों पर आ गए। खूब नारेबाजी की गई। कई क्रांतिकारियों ने बेवर क्रांति में भाग लेने के लिए बेवर की ओर रुख कर लिया। आंदोलन से किशोर और युवा भी जुड़कर अंग्रेजों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे। लाखन सिंह भदौरिया ने बताया कि भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा ने लोगों में अंग्रेजों के खिलाफ एक अजीब से ताकत भर दी थी। उस दौरान बेवर क्रांतिकारियों का अड्डा बना हुआ था। 14 अगस्त को जब पता चला कि बेवर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह हो गया है तो भोगांव से भी कई छात्र बेवर के लिए रवाना हो लिए।
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दया नारायण गुप्ता दयालू बताते हैं कि नौ अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा पर हर किसी में देश की खातिर मर मिटने का जज्बा पैदा हो गया था। नगर में खासकर युवा सड़कों पर आ गए और अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारे लगाए थे। विदेश वस्त्रों की होली जगह-जगह जलाई गई थी। प्रकाशचंद्र जैन दादा को आज भी नौ अगस्त का दिन याद है। जब शहर ही नहीं गांव-गांव अंग्रेजों के खिलाफ जंग के लिए लोग तैयार हो गए थे। अंग्रेजी अदालतों का बहिष्कार किया गया। विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई। हर एक में देश को आजादी दिलाने का जज्बा नजर आता था।
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श्रीकृष्ण मिश्रा ने बताया कि महात्मा गांधी की घोषणा का असर यह हुआ कि छात्र एकजुट होकर अंग्रेजों के विरोध में सड़कों पर आ गए। खूब नारेबाजी की गई। कई क्रांतिकारियों ने बेवर क्रांति में भाग लेने के लिए बेवर की ओर रुख कर लिया। आंदोलन से किशोर और युवा भी जुड़कर अंग्रेजों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे। लाखन सिंह भदौरिया ने बताया कि भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा ने लोगों में अंग्रेजों के खिलाफ एक अजीब से ताकत भर दी थी। उस दौरान बेवर क्रांतिकारियों का अड्डा बना हुआ था। 14 अगस्त को जब पता चला कि बेवर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह हो गया है तो भोगांव से भी कई छात्र बेवर के लिए रवाना हो लिए।
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