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आगरा: 405 विचाराधीन और 106 सजायाफ्ता बंदियों को मिल सकती है रिहाई
Wed, 05 May 2021 12:18 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 05 May 2021 12:18 AM IST
सार
हाईकोर्ट की हाई पावर कमेटी के निर्देश के बाद आगरा जिला कारागार के 405 विचाराधीन और 106 सजायाफ्ता बंदियों को रिहाई मिल सकती है। जेल प्रशासन ने बंदियों की सूची तैयार कर ली है।
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जिला कारागार आगरा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की हाई पावर कमेटी ने जेलों में सात साल तक की सजा वाले अपराध में बंद विचाराधीन और सजायाफ्ता बंदियों को अंतरिम जमानत और पैरोल पर रिहा करने के निर्देश दिए हैं। इससे जिला कारागार के 405 विचाराधीन और 106 सजायाफ्ता बंदियों को रिहाई मिल सकती है। जेल प्रशासन ने बंदियों की सूची तैयार कर ली है। इसे शासन के पास भेजा जा रहा है। शासन के निर्देश के बाद ही बंदियों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।
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प्रदेश की जेलों में बंदियों के साथ कर्मचारी और अधिकारियों में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसको देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव की अध्यक्षता में गठित हाई पावर कमेटी ने सजायाफ्ता और विचाराधीन बंदियों की रिहाई की योजना घोषित की है। न्यायिक अधिकारियों को जेलों में जाकर योजना के तहत बंदियों को 60 दिन की पैरोल या अंतरिम जमानत पर रिहा करने की कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। इसका लाभ सात साल तक की सजा वाले अपराध में बंद बंदियों को मिलेगा।
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सजायाफ्ता बंदियों को पैरोल दी जाएगी, जबकि विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा जाएगा। जिला जेल के अधीक्षक शशिकांत मिश्र ने बताया कि जेल में 106 सजायाफ्ता और 405 विचाराधीन बंदी हैं। इनकी सूची तैयार कर ली गई है। इसे शासन को भेजा जा रहा है। शासन से रिहाई का निर्देश मिलने के बाद ही रिहाई की जाएगी।
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एक साल बाद भी नहीं लौटे 21 बंदी
मार्च 2020 में भी कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए थे। जेलों में बंदियों से लेकर कर्मचारी और अधिकारी संक्रमित हो गए थे। इसको देखते हुए सौ से अधिक बंदियों को पैरोल और अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। इनमें से 21 बंदी अब तक जेलों में वापस नहीं आए हैं। इनकी सूचना जेल प्रशासन ने पुलिस अधिकारियों को दी थी। इसके बाद टीम का गठन किया गया, लेकिन बंदी नहीं मिल सके हैं। वो अपने परिवारीजनों के संपर्क में भी नहीं हैं।
बंदियों की मिलाई बंद होने से समस्या
कोरोना संक्रमण के मामले सामने आने के बाद जिला और केंद्रीय जेल में बंदियों की परिजनों से मुलाकात बंद हैं। पिछले एक साल से बंदी परिजनों से मुलाकात नहीं कर सके हैं। हालांकि जेल में पीसीओ से बंदियों की परिजनों से बात कराई जा रही है, लेकिन बड़ी संख्या में बंदी और उनके परिजन मिलाई शुरू कराने की मांग कर चुके हैं।
अधिवक्ता भी कमेटी के समक्ष रखेंगे अपना पक्ष
पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जनमंच के अधिवक्ताओं की बैठक सोमवार को केंद्रीय कार्यालय पर हुई, जिसमें बंदियों की रिहाई पर चर्चा की गई। कहा गया कि बंदी रिहाई का जो तरीका बनाया गया है, उससे अधिवक्ताओं का अहित होगा। न्यायालय खुले हैं, जरूरी कार्य हो रहा है। बंदियों की रिहाई में अधिवक्ताओं की कोई भूमिका नहीं है।
तय किया कि मंगलवार को भी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें हाईपावर कमेटी के समक्ष अधिवक्ताओं की समस्या को उठाया जाएगा। अध्यक्षता चौधरी अजय सिंह, संचालन वीरेंद्र फौजदार ने किया। राकेश भटनागर, सुरेंद्र लखन, सत्येंद्र यादव, जितेंद्र चौहान, गिर्राज रावत, भारत सिंह, विजय वर्मा, अमर सिंह कमल आदि मौजूद रहे।
मार्च 2020 में भी कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए थे। जेलों में बंदियों से लेकर कर्मचारी और अधिकारी संक्रमित हो गए थे। इसको देखते हुए सौ से अधिक बंदियों को पैरोल और अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। इनमें से 21 बंदी अब तक जेलों में वापस नहीं आए हैं। इनकी सूचना जेल प्रशासन ने पुलिस अधिकारियों को दी थी। इसके बाद टीम का गठन किया गया, लेकिन बंदी नहीं मिल सके हैं। वो अपने परिवारीजनों के संपर्क में भी नहीं हैं।
बंदियों की मिलाई बंद होने से समस्या
कोरोना संक्रमण के मामले सामने आने के बाद जिला और केंद्रीय जेल में बंदियों की परिजनों से मुलाकात बंद हैं। पिछले एक साल से बंदी परिजनों से मुलाकात नहीं कर सके हैं। हालांकि जेल में पीसीओ से बंदियों की परिजनों से बात कराई जा रही है, लेकिन बड़ी संख्या में बंदी और उनके परिजन मिलाई शुरू कराने की मांग कर चुके हैं।
अधिवक्ता भी कमेटी के समक्ष रखेंगे अपना पक्ष
पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जनमंच के अधिवक्ताओं की बैठक सोमवार को केंद्रीय कार्यालय पर हुई, जिसमें बंदियों की रिहाई पर चर्चा की गई। कहा गया कि बंदी रिहाई का जो तरीका बनाया गया है, उससे अधिवक्ताओं का अहित होगा। न्यायालय खुले हैं, जरूरी कार्य हो रहा है। बंदियों की रिहाई में अधिवक्ताओं की कोई भूमिका नहीं है।
तय किया कि मंगलवार को भी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें हाईपावर कमेटी के समक्ष अधिवक्ताओं की समस्या को उठाया जाएगा। अध्यक्षता चौधरी अजय सिंह, संचालन वीरेंद्र फौजदार ने किया। राकेश भटनागर, सुरेंद्र लखन, सत्येंद्र यादव, जितेंद्र चौहान, गिर्राज रावत, भारत सिंह, विजय वर्मा, अमर सिंह कमल आदि मौजूद रहे।