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34 साल पहले आगरा किला में मारा था तेंदुआ
अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 27 Apr 2016 01:31 AM IST
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आगरा किला
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
34 साल पहले 1982 में भी तेंदुए की दहशत आगरा में रही थी। तब आगरा किले की खाई और अकबरी महल के नीचे बावड़ी में तेंदुआ एक-दो दिन नहीं, बल्कि पूरे एक महीने तक रहा था। विजिट के दौरान जब वीवीआईपी ने इसे देखा तो समझा कि सिकंदरा के हिरनों की तरह ही यहां पर इसे पाला गया हो। साथ ही मुगलिया दौर की तरह किले का जलवा समझा, लेकिन जब तत्कालीन डीएम पर तेंदुए ने हमला किया तो वन विभाग के कर्मचारी इसकी निगरानी के लिए लगाए गए। बाद में वन विभाग कर्मियों की गोली से ही तेंदुए मारा गया।
1982 में आगरा सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् जेपी श्रीवास्तव थे। उनके कार्यकाल में आगरा किले के संरक्षण सहायक रहे एसके शर्मा के मुताबिक, बाढ़ में बहकर आया तेंदुआ किले की खाई और जंगल में मौजूद जानवरों को खाता रहा। तेंदुए की दहशत से कर्मचारियों ने ड्यूटी पर आना छोड़ दिया था। एक महीने तक रात में यह अकबरी महल के नीचे बहुमंजिला बावड़ी और मुसम्मन बुर्ज के नीचे घूमता रहा। वन्यजीव कर्मियों ने ही एक रात तेंदुए के हमले पर गोली मार दी। घायल तेंदुए को पकड़ लिया गया, लेकिन कु छ समय बाद वह मर गया। मामले में एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद् और संरक्षण सहायक के खिलाफ एफआईआर भी हुई, लेकिन बाद में उन्हें निर्दोष करार दिया गया।
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1982 में आगरा सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् जेपी श्रीवास्तव थे। उनके कार्यकाल में आगरा किले के संरक्षण सहायक रहे एसके शर्मा के मुताबिक, बाढ़ में बहकर आया तेंदुआ किले की खाई और जंगल में मौजूद जानवरों को खाता रहा। तेंदुए की दहशत से कर्मचारियों ने ड्यूटी पर आना छोड़ दिया था। एक महीने तक रात में यह अकबरी महल के नीचे बहुमंजिला बावड़ी और मुसम्मन बुर्ज के नीचे घूमता रहा। वन्यजीव कर्मियों ने ही एक रात तेंदुए के हमले पर गोली मार दी। घायल तेंदुए को पकड़ लिया गया, लेकिन कु छ समय बाद वह मर गया। मामले में एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद् और संरक्षण सहायक के खिलाफ एफआईआर भी हुई, लेकिन बाद में उन्हें निर्दोष करार दिया गया।
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