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दिनभर समर्थकों संग चर्चा, वोटरों को बूथ पर लाने की बनाई रणनीति
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सपा प्रत्याशी देवेंद्र यादव ने किया नामांकन
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। रविवार शाम को चुनाव प्रचार बंद होने के बाद नेताजी की रात करवट बदलते हुए बीती। दिन निकलते ही कार्यालय पर समर्थक पहुंच गए, प्रत्याशी उनके बीच मंत्रणा करते रहे। प्रत्याशियों का सबसे अधिक जोर मतदान प्रतिशत बढ़ाने पर रहा। समर्थकों को दिनभर जिम्मेदारियां सौंपी गई।
एटा संसदीय क्षेत्र के चुनाव में विजय हासिल करने के लिए प्रत्याशियों ने पूरी ताकत लगा दी है। चुनाव प्रचार थमने के बाद नेताजी तो क्षेत्र में नहीं जा सके, लेकिन समर्थक कार्यालय जरूर पहुंच गए। सोमवार को दिनभर समर्थकों ने वोटरों के समीकरण से नेताजी को चुनावी गणित समझाया। इससे प्रत्याशी भी उत्साहित थे। वे समथकों को जिम्मेदारी सौंप रहे थे कि सबसे अधिक बल मतदान कराने पर रहना चाहिए। नजर रखें कि कोई अपना वोटर वोट डालने से वंचित न रह जाए। प्रत्याशियों ने रात तक अपने कार्यालय पर अपने समर्थकों के साथ चर्चा की। देखा कि कहीं कोई बूथ बस्ते से वंचित तो नहीं रह गया है। प्रत्याशियेां ने जागते हुए रात काटी।
फोन से दूर तक नजर
प्रचार थमने के बाद प्रत्याशियों की बेचैनी इस कदर बढ़ गई है कि वह किसी भी तरह मतदाता तक पहुंचना चाहते हैं। सुबह से रात तक प्रत्याशी और उनके समर्थक फोन घुमाते रहे। कोशिश कर रहे थे कि कोई गांव ऐसा न रह जाए, जहां वोटों के मुखिया से ठोस बातचीत न हो पाए।
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एटा संसदीय क्षेत्र के चुनाव में विजय हासिल करने के लिए प्रत्याशियों ने पूरी ताकत लगा दी है। चुनाव प्रचार थमने के बाद नेताजी तो क्षेत्र में नहीं जा सके, लेकिन समर्थक कार्यालय जरूर पहुंच गए। सोमवार को दिनभर समर्थकों ने वोटरों के समीकरण से नेताजी को चुनावी गणित समझाया। इससे प्रत्याशी भी उत्साहित थे। वे समथकों को जिम्मेदारी सौंप रहे थे कि सबसे अधिक बल मतदान कराने पर रहना चाहिए। नजर रखें कि कोई अपना वोटर वोट डालने से वंचित न रह जाए। प्रत्याशियों ने रात तक अपने कार्यालय पर अपने समर्थकों के साथ चर्चा की। देखा कि कहीं कोई बूथ बस्ते से वंचित तो नहीं रह गया है। प्रत्याशियेां ने जागते हुए रात काटी।
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फोन से दूर तक नजर
प्रचार थमने के बाद प्रत्याशियों की बेचैनी इस कदर बढ़ गई है कि वह किसी भी तरह मतदाता तक पहुंचना चाहते हैं। सुबह से रात तक प्रत्याशी और उनके समर्थक फोन घुमाते रहे। कोशिश कर रहे थे कि कोई गांव ऐसा न रह जाए, जहां वोटों के मुखिया से ठोस बातचीत न हो पाए।
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