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मंत्री विधायक और नेता मिलकर भी भीड़ नहीं जुटा सके
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मथुरा। दो मंत्री, दो विधायक और दो ही निगमों के चेयरमैन। जिला और महानगर इकाई के नेताओं की लंबी चौड़ी फौज। लेकिन इन सबके बावजूद भी जनसभा स्थल का मैदान नहीं भर सका। भीड़ कम होने के कारण मुख्यमंत्री भी सभास्थल पर देरी से पहुंचे। भाजपा की पहली चुनावी जनसभा में भीड़ कम होने से साफ दिख रहा था कि पार्टी में गुटबाजी है। शहर के लोग तो दिखे ही नहीं।
मुख्यमंत्री की जनसभा की तैयारियां पिछले कई दिनों से चल रही थीं। क्योंकि मथुरा में भाजपा के दो मंत्री हैं और दो विधायक हैं। दो निगम के चेयरमैन भी हैं। उम्मीद लगाई जा रही थी कि बीएन पोद्दार इंटर कालेज का मैदान भर जाएगा। लेकिन भीड़ कम रह गई। ग्रामीण क्षेत्रों से तो बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सभी में बड़ा उत्साह और जोश दिख रहा था। लेकिन शहरी पब्लिक कम थी।
मथुरा के ही लोग नजर कम आए। जो पहुंचे भी वह कड़ी धूप होने के कारण वापस लौट आए थे। खास बात यह है कि पब्लिक को बैठाने और रोकने के लिए कोई नेता था ही नहीं। सभी आगे जाकर बैठ गए थे। लिहाजा पब्लिक और कार्यकर्ता भी धीरे धीरे आते जाते रहे। कुछ नेताओं ने कहा भी कि पद तो सबको चाहिए लेकिन काम कोई नहीं करना चाहता। पार्टी की गुटबाजी भी सभास्थल पर साफ दिखी।
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मथुरा की गोपी हैं हेमा: योगी
मथुरा। मुख्यमंत्री तक भी संगठन में खींचतान की शिकायत पहुंच गई। माना जा रहा है कि हेमामालिनी के नामांकन में योगी के आने का मकसद भी यही था। उन्हें लग रहा था कि कहीं संगठन की कलह के चलते नामांकन में भी भीड़ न जुट पाए। लिहाजा मुख्यमंत्री ने यहां मौजूद रहने का फैसला किया था। वह पूरी जानकारी भी लेते रहे। मुख्यमंत्री ने मंच से नेताओं की तारीफ भी की। हालांकि मुख्यमंत्री ने हेमामालिनी की खूब तारीफ की। यहां तक कहा कि वह मथुरा की गोपी हैं। ब्रज के विकास के लिए जितना काम कर रही हैं वह कोई नहीं कर सकता।
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मुख्यमंत्री की जनसभा की तैयारियां पिछले कई दिनों से चल रही थीं। क्योंकि मथुरा में भाजपा के दो मंत्री हैं और दो विधायक हैं। दो निगम के चेयरमैन भी हैं। उम्मीद लगाई जा रही थी कि बीएन पोद्दार इंटर कालेज का मैदान भर जाएगा। लेकिन भीड़ कम रह गई। ग्रामीण क्षेत्रों से तो बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सभी में बड़ा उत्साह और जोश दिख रहा था। लेकिन शहरी पब्लिक कम थी।
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मथुरा के ही लोग नजर कम आए। जो पहुंचे भी वह कड़ी धूप होने के कारण वापस लौट आए थे। खास बात यह है कि पब्लिक को बैठाने और रोकने के लिए कोई नेता था ही नहीं। सभी आगे जाकर बैठ गए थे। लिहाजा पब्लिक और कार्यकर्ता भी धीरे धीरे आते जाते रहे। कुछ नेताओं ने कहा भी कि पद तो सबको चाहिए लेकिन काम कोई नहीं करना चाहता। पार्टी की गुटबाजी भी सभास्थल पर साफ दिखी।
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मथुरा की गोपी हैं हेमा: योगी
मथुरा। मुख्यमंत्री तक भी संगठन में खींचतान की शिकायत पहुंच गई। माना जा रहा है कि हेमामालिनी के नामांकन में योगी के आने का मकसद भी यही था। उन्हें लग रहा था कि कहीं संगठन की कलह के चलते नामांकन में भी भीड़ न जुट पाए। लिहाजा मुख्यमंत्री ने यहां मौजूद रहने का फैसला किया था। वह पूरी जानकारी भी लेते रहे। मुख्यमंत्री ने मंच से नेताओं की तारीफ भी की। हालांकि मुख्यमंत्री ने हेमामालिनी की खूब तारीफ की। यहां तक कहा कि वह मथुरा की गोपी हैं। ब्रज के विकास के लिए जितना काम कर रही हैं वह कोई नहीं कर सकता।