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गिरिराज प्रभु को सर्दी से बचाव को रखी अंगीठी
Updated Thu, 13 Dec 2018 08:15 PM IST
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गोवर्धन (मथुरा)। शाम ढलते ही गिरिराज जी के प्रमुख मंदिरों में प्रभु को सर्दी से बचाने के इंतजाम शुरू हो गए हैं। गिरिराज जी को सर्दी से बचाने के लिए अंगीठी और रजाई ओढ़ाई जा रही है। प्रसाद भी गर्म तासीर का बनाया जा रहा है।
तलहटी में गिरिराज जी की पूजा बाल कृष्ण के रूप में होती है। प्रमुख मंदिरों में शाम को गिरिराज जी के शृंगार दर्शन होते हैं। पोशाक के शृंगार के बाद गिरिराज जी स्वयं कृष्ण बनकर वंशी बजाते हैं और छप्पन भोग, फूलबंगला मनोरथ होता है। दानघाटी मंदिर के सेवायत रामेश्वर पुरोहित ने बताया कि ब्रज में बालक के भाव में ब्रजवासी गिरिराज जी को पूजते हैं। गिरिराज जी को अंगीठी के साथ तिल के लड्डू, सोंठ की मठरी आदि का भोग लगाया जा रहा है।
दूसरी ओर, जतीपुरा मुखारबिंद मंदिर में गिरिराज जी का सायं होते ही रेशमी रजाई ओढ़ाई जा रही है। सेवायत गोकुलेश अधिकारी ने बताया कि मंदिरों में विराजमान गिरिराज जी के दो भाव से पूजा होती हैं।
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एक भाव में दुग्धाभिषेक होता है तो दूसरे भाव में कृष्ण के दर्शन होते हैं। घर-घर में लड्डू गोपाल को गर्म पोशाक पहनाई जा रही है। सर्दी के चलते मंदिरों के दर्शन का समय कम कर दिया गया है। भक्त गर्म कपड़े और मोजा पहन कर गिरिराज जी की परिक्रमा लगा रहे हैं।
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तलहटी में गिरिराज जी की पूजा बाल कृष्ण के रूप में होती है। प्रमुख मंदिरों में शाम को गिरिराज जी के शृंगार दर्शन होते हैं। पोशाक के शृंगार के बाद गिरिराज जी स्वयं कृष्ण बनकर वंशी बजाते हैं और छप्पन भोग, फूलबंगला मनोरथ होता है। दानघाटी मंदिर के सेवायत रामेश्वर पुरोहित ने बताया कि ब्रज में बालक के भाव में ब्रजवासी गिरिराज जी को पूजते हैं। गिरिराज जी को अंगीठी के साथ तिल के लड्डू, सोंठ की मठरी आदि का भोग लगाया जा रहा है।
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दूसरी ओर, जतीपुरा मुखारबिंद मंदिर में गिरिराज जी का सायं होते ही रेशमी रजाई ओढ़ाई जा रही है। सेवायत गोकुलेश अधिकारी ने बताया कि मंदिरों में विराजमान गिरिराज जी के दो भाव से पूजा होती हैं।
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एक भाव में दुग्धाभिषेक होता है तो दूसरे भाव में कृष्ण के दर्शन होते हैं। घर-घर में लड्डू गोपाल को गर्म पोशाक पहनाई जा रही है। सर्दी के चलते मंदिरों के दर्शन का समय कम कर दिया गया है। भक्त गर्म कपड़े और मोजा पहन कर गिरिराज जी की परिक्रमा लगा रहे हैं।