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हंसते-हंसते जीवन जीने की कला सिखा गए तरुण सागर
Updated Sat, 01 Sep 2018 10:54 PM IST
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Tarun Sagar
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एटा। कड़वे प्रवचनों से जिंदगी को जीना सिखाया, तो आनंद यात्रा में ठहाकों के बीच हंसाना। अपने त्याग और साधना के साथ जगत के कल्याण को उन्होंने हर संभव प्रयास किए। विधानसभाओं से लेकर लाल किला और मंदिरों से लेकर हर धर्मस्थल पर उनके कड़वे प्रवचनों ने मीठी दवा का काम किया। तेज बोलने वाले संत के नाम से विख्यात जैन मुनि तरुण सागर महाराज का शनिवार को देवलोक गमन हो गया। जैन मुनि के देवलोक गमन की खबर पाकर जिले की जैन समाज में शोक की लहर दौड़ गई। जैन संत मुनि तरुण सागर महाराज ने जिले में भी 13 दिन प्रवास पर धर्म और अध्यात्म की गंगा बहाई थी।
जैन महिला संगठन की अध्यक्षा बबिता जैन ने बताया कि मुनि तरुण सागर महाराज का देवलोक गमन जैन समाज की अपूर्णनीय क्षति है। वर्ष 2014 में मुनिश्री ने एटा में 15 मई से 28 मई तक प्रवास किया था। इस दौरान उन्होंने 22 से 25 मई तक मेहता पार्क में कड़वे प्रवचन दिए थे। उन्होंने बताया कि मुनि तरुण सागर जैन संत नहीं बल्कि जन संत थे। उन्होंने हर प्राणी मात्र को हंसते हुए जीने की कला सिखाई।
गुरु परिवार के संजीव जैन संजू ने बताया कि मुनिश्री तरुण सागर महाराज के एटा प्रवास के दौरान प्रवचन को सुनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटते थे। उन्होंने कहा कि जैन संत का देवलोक गमन समाज के लिए बड़ी क्षति है। अनंत वर्षों बाद ऐसे संत जन्म लेते हैं।
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कई दिनों से खराब था स्वास्थ्य
जैन युवा परिषद के संरक्षक सुनील बांदा ने बताया मुनिश्री का स्वास्थ्य बीते कई दिनों से खराब था। अंत समय देख उन्होंने आहार और परिग्रह का पूर्ण त्यागकर समाधि ले ली। स्वास्थ्य खराब होने के बाद वे कई दिन अस्पताल में रहे, लेकिन मृत्यु को करीब जानकर उन्होंने अस्पताल से छुट्टी लेकर साधना शुरू कर दी और साधना में लीन हो गए।
जैन समाज ने दी श्रद्धांजलि
जैन मुनि तरुण सागर के देवलोक गमन पर शनिवार को जैन समाज ने श्रद्धांजलि दी। इस दौरान जानकीदास चैत्यालय में वीर मंडल द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें तमाम वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही बड़ा जैन मंदिर में भी श्रद्धांजलि सभा हुई। इस मौके पर सुभाष जैन, संजय जैन, अनिल जैन, शैलेंद्र जैन, सतेंद्र जैन, दिनेश चुक्खा, विक्रांत जैन, रिषभ जैन, प्रदीप जैन मौजूद रहे।
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जैन महिला संगठन की अध्यक्षा बबिता जैन ने बताया कि मुनि तरुण सागर महाराज का देवलोक गमन जैन समाज की अपूर्णनीय क्षति है। वर्ष 2014 में मुनिश्री ने एटा में 15 मई से 28 मई तक प्रवास किया था। इस दौरान उन्होंने 22 से 25 मई तक मेहता पार्क में कड़वे प्रवचन दिए थे। उन्होंने बताया कि मुनि तरुण सागर जैन संत नहीं बल्कि जन संत थे। उन्होंने हर प्राणी मात्र को हंसते हुए जीने की कला सिखाई।
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गुरु परिवार के संजीव जैन संजू ने बताया कि मुनिश्री तरुण सागर महाराज के एटा प्रवास के दौरान प्रवचन को सुनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटते थे। उन्होंने कहा कि जैन संत का देवलोक गमन समाज के लिए बड़ी क्षति है। अनंत वर्षों बाद ऐसे संत जन्म लेते हैं।
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कई दिनों से खराब था स्वास्थ्य
जैन युवा परिषद के संरक्षक सुनील बांदा ने बताया मुनिश्री का स्वास्थ्य बीते कई दिनों से खराब था। अंत समय देख उन्होंने आहार और परिग्रह का पूर्ण त्यागकर समाधि ले ली। स्वास्थ्य खराब होने के बाद वे कई दिन अस्पताल में रहे, लेकिन मृत्यु को करीब जानकर उन्होंने अस्पताल से छुट्टी लेकर साधना शुरू कर दी और साधना में लीन हो गए।
जैन समाज ने दी श्रद्धांजलि
जैन मुनि तरुण सागर के देवलोक गमन पर शनिवार को जैन समाज ने श्रद्धांजलि दी। इस दौरान जानकीदास चैत्यालय में वीर मंडल द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें तमाम वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही बड़ा जैन मंदिर में भी श्रद्धांजलि सभा हुई। इस मौके पर सुभाष जैन, संजय जैन, अनिल जैन, शैलेंद्र जैन, सतेंद्र जैन, दिनेश चुक्खा, विक्रांत जैन, रिषभ जैन, प्रदीप जैन मौजूद रहे।