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महिला चिकित्सक के सहारे बेवर सीएचसी
Updated Tue, 26 Dec 2017 11:19 PM IST
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घायल बीएसएनएल महिला कर्मी का सरकारी अस्पताल में उपचार करते स्वास्थ्यकर्मी।
- फोटो : amar ujala.
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बेवर (मैनपुरी)। विकास खंड बेवर में बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की तैनाती न होने से बदहाल बना हुआ है। करोड़ों की लागत से बने अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती न होने से लोग मजबूरन निजी चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं। कई बार स्थानीय लोगों ने चिकित्सकों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों से वार्ता की, लेकिन नतीजा ढांक के तीन पात ही रहा।
बेवर में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सात पद सृजित हैं। सर्जन, फिजीशियन, आर्थोपेडिक, ईएनटी, बाल रोग, गायनोलॉजिस्ट तथा चिकित्साधीक्षक शामिल हैं। इनके सापेक्ष मात्र एक महिला चिकित्सक की तैनाती है।
इनकी गैर मौजूदगी में संविदा पर तैनात एक दंत चिकित्सक तथा प्रभारी चिकित्साधिकारी लोगों को इलाज दे रहे हैं। ओटी का उपयोग मात्र नसबंदी शिविर में ही किया जाता है।
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एक्सरे आदि के लिए जिला अस्पताल से जांच की जाती है। विशाल इमारत के अस्पताल में केवल एक महिला चिकित्सक डॉ. पवित्रा सिंह की तैनाती के अलावा कोई भी चिकित्सक न होने से लोग इलाज के लिए भटक रहे हैं।
सीएचसी बेवर पर प्रतिदिन 150 से 200 मरीज इलाज को आते हैं। इलाज के नाम पर प्राथमिक उपचार देकर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। गंभीर रोगियों को किसी प्रकार की सहूलियत अस्पताल से नहीं मिल पाती, जिससे कई मरीज इलाज के अभाव में अपनी जान भी गवां बैठते हैं।
बेवर क्षेत्र में कुल छह पीएचसी खुलीं हैं, जिनमें प्रमुख रूप से मानपुर हरी है। इसके साथ ही पांच न्यू पीएचसी भेंसरोली, नवीगंज, चिरावर, चिलोंसा व गढ़िया हैं। चिलोंसा पीएचसी पर किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं है।
अस्पताल में एक माह से एआरवी वैक्सीन के साथ-साथ दर्द निवारक दवा की कमी है, जिसके चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ऊपरी मंजिल तथा पिछले हिस्से में एक वर्ष पूर्व बनाई गई 30 शैया की महिला विंग किसी स्टाफ की तैनाती न होने से धूल फांक रही है। नवनिर्मित भवन में चारों तरफ धूल ही धूल नजर आती है। लोगों का कहना है कि जब चिकित्सक नहीं थे तो करोड़ोेें की लागत से ये विंग क्यों बनाई गई।
बेवर में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सात पद सृजित हैं। सर्जन, फिजीशियन, आर्थोपेडिक, ईएनटी, बाल रोग, गायनोलॉजिस्ट तथा चिकित्साधीक्षक शामिल हैं। इनके सापेक्ष मात्र एक महिला चिकित्सक की तैनाती है।
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इनकी गैर मौजूदगी में संविदा पर तैनात एक दंत चिकित्सक तथा प्रभारी चिकित्साधिकारी लोगों को इलाज दे रहे हैं। ओटी का उपयोग मात्र नसबंदी शिविर में ही किया जाता है।
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एक्सरे आदि के लिए जिला अस्पताल से जांच की जाती है। विशाल इमारत के अस्पताल में केवल एक महिला चिकित्सक डॉ. पवित्रा सिंह की तैनाती के अलावा कोई भी चिकित्सक न होने से लोग इलाज के लिए भटक रहे हैं।
सीएचसी बेवर पर प्रतिदिन 150 से 200 मरीज इलाज को आते हैं। इलाज के नाम पर प्राथमिक उपचार देकर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। गंभीर रोगियों को किसी प्रकार की सहूलियत अस्पताल से नहीं मिल पाती, जिससे कई मरीज इलाज के अभाव में अपनी जान भी गवां बैठते हैं।
बेवर क्षेत्र में कुल छह पीएचसी खुलीं हैं, जिनमें प्रमुख रूप से मानपुर हरी है। इसके साथ ही पांच न्यू पीएचसी भेंसरोली, नवीगंज, चिरावर, चिलोंसा व गढ़िया हैं। चिलोंसा पीएचसी पर किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं है।
अस्पताल में एक माह से एआरवी वैक्सीन के साथ-साथ दर्द निवारक दवा की कमी है, जिसके चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ऊपरी मंजिल तथा पिछले हिस्से में एक वर्ष पूर्व बनाई गई 30 शैया की महिला विंग किसी स्टाफ की तैनाती न होने से धूल फांक रही है। नवनिर्मित भवन में चारों तरफ धूल ही धूल नजर आती है। लोगों का कहना है कि जब चिकित्सक नहीं थे तो करोड़ोेें की लागत से ये विंग क्यों बनाई गई।