{"_id":"596a5c584f1c1b44458b4758","slug":"31500142680-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फूल देंगे कालिंदी को ‘गंदगी’ से राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फूल देंगे कालिंदी को ‘गंदगी’ से राहत
Updated Sat, 15 Jul 2017 11:58 PM IST
विज्ञापन
एसटीपी के बगल में लगी फुलवारी।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। यमुना में शहर की गंदगी गिरने की बड़ी समस्या का एक सरल समाधान लागू किया जा रहा है। एसटीपी में पीली कनेर और लाल कनेर के फूलों की क्यारी से गंदे पानी को साफ किया जाएगा। इस पानी को आगे एसटीपी से और साफ कर यमुना में छोड़ा जाएगा। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों की ओर से ईजाद की गई इस देसी तकनीक का वृंदावन में प्रयोग होने जा रहा है।
वृंदावन में पागलबाबा, मंदिर के निकट गंदे पानी को साफ करने के लिए एसटीपी लगा हुआ है। ये एसटीपी गंदे पानी को साफ नहीं कर पा रहा है। जिससे यमुुना में गंदगी पहुंच रही है। दरअसल एसटीपी पानी के साथ आने वाली सिल्ट को रोक नहीं पाता है। अब एएमयू के प्रोफेसरों ने देसी तकनीक ‘वेटलैंड’ खोजी से जो इस समस्या का समाधान नजर आ रही है।
इसमें एसटीपी के पास उन फूलों की खेती की जाएगी जो बहुत घने जमते हैं और जड़ मजबूत होती है। इन खेतों से होकर गंदे पानी को गुजारा जाएगा। इससे सिल्ट तो खेत में ही रह जाएगी जबकि पानी आगे चला जाएगा। इस पानी को आसानी के साथ एसटीपी से साफ किया जाएगा।
विज्ञापन
जल निगम के एक्सईएन निजामुद्दीन ने बताया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने इस फार्मूले पर काम करके विश्वविद्यालय में वैटलेंड तकनीक का एसटीपी संचालित किया है। इसमें पहले से बने एसटीपी के आधे हिस्से में मिट्टी को गीली कर उस पर पीली, लाल कनेर के फूलों की खेती की जाएगी।
घनी जड़ों से मिलेगी मदद
पीली, लाल कनेर के फूलों के पौधों की जड़ें बहुत घनी होती हैं जो पानी के साथ आने वाली गंदगी को अपने में समेट लेती हैं। सिल्ट खेत में रह जाएगा जबकि पानी आगे चला जाएगा।
छत पर होगी फूलों की खेती
पागलबाबा मंदिर के निकट बनने वाले एसटीपी की क्षमता पांच एमएलडी होगी। इसमें एसटीपी की छत पर गीली मिट्टी कर फूलों की खेती की जाएगी और नीचे पानी साफ होता रहेगा। साफ पानी को यमुना में छोड़ा जाएगा।
बदली जाएगी लाइन
पागलबाबा एसटीपी को प्रोन्नत तरीके से संचालन को वृंदावन के किशोरपुरा, ज्ञानगुदड़ी, शहीद लक्ष्मण पार्क और मुखर्जी पार्क से पागलबाबा एसटीपी तक राइजिंग लाइन को बदला जाएगा। पंपिंग स्टेशनों की मरम्मत होगी, उनको प्रोन्नत किया जाएगा।
विज्ञापन
वृंदावन में पागलबाबा, मंदिर के निकट गंदे पानी को साफ करने के लिए एसटीपी लगा हुआ है। ये एसटीपी गंदे पानी को साफ नहीं कर पा रहा है। जिससे यमुुना में गंदगी पहुंच रही है। दरअसल एसटीपी पानी के साथ आने वाली सिल्ट को रोक नहीं पाता है। अब एएमयू के प्रोफेसरों ने देसी तकनीक ‘वेटलैंड’ खोजी से जो इस समस्या का समाधान नजर आ रही है।
विज्ञापन
इसमें एसटीपी के पास उन फूलों की खेती की जाएगी जो बहुत घने जमते हैं और जड़ मजबूत होती है। इन खेतों से होकर गंदे पानी को गुजारा जाएगा। इससे सिल्ट तो खेत में ही रह जाएगी जबकि पानी आगे चला जाएगा। इस पानी को आसानी के साथ एसटीपी से साफ किया जाएगा।
विज्ञापन
जल निगम के एक्सईएन निजामुद्दीन ने बताया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने इस फार्मूले पर काम करके विश्वविद्यालय में वैटलेंड तकनीक का एसटीपी संचालित किया है। इसमें पहले से बने एसटीपी के आधे हिस्से में मिट्टी को गीली कर उस पर पीली, लाल कनेर के फूलों की खेती की जाएगी।
घनी जड़ों से मिलेगी मदद
पीली, लाल कनेर के फूलों के पौधों की जड़ें बहुत घनी होती हैं जो पानी के साथ आने वाली गंदगी को अपने में समेट लेती हैं। सिल्ट खेत में रह जाएगा जबकि पानी आगे चला जाएगा।
छत पर होगी फूलों की खेती
पागलबाबा मंदिर के निकट बनने वाले एसटीपी की क्षमता पांच एमएलडी होगी। इसमें एसटीपी की छत पर गीली मिट्टी कर फूलों की खेती की जाएगी और नीचे पानी साफ होता रहेगा। साफ पानी को यमुना में छोड़ा जाएगा।
बदली जाएगी लाइन
पागलबाबा एसटीपी को प्रोन्नत तरीके से संचालन को वृंदावन के किशोरपुरा, ज्ञानगुदड़ी, शहीद लक्ष्मण पार्क और मुखर्जी पार्क से पागलबाबा एसटीपी तक राइजिंग लाइन को बदला जाएगा। पंपिंग स्टेशनों की मरम्मत होगी, उनको प्रोन्नत किया जाएगा।