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जिले में सूखे पड़े हैं 300 तालाब, पशु, पक्षी पानी को परेशान

Sun, 24 Apr 2022 11:27 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 24 Apr 2022 11:27 PM IST
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300 ponds drought in kasganj
कासगंज। तालाब की खबर से संबंधित फोटो- ग्राम पंचायत तरसीपड़ेरा का तालाब - फोटो : KASGANJ
कासगंज। जिले के ग्रामीण इलाकों में तालाबों को जीवंत रखने के लिए ग्राम पंचायतें गंभीर नहीं हैं। जिले की करीब 300 ग्राम पंचायतों के तालाब सूखे हुए हैं। इससे पशु-पक्षी पानी के लिए परेशान हैं। तमाम तालाबों पर अतिक्रमणकारियों के कब्जे हैं। वहीं गांव का ड्रेनेज तालाब की ओर नहीं जाता। कहीं तालाबों पर बने तटबंधों की वजह से खेतों से वर्षा का जल भी नहीं पहुंच पाता। तालाबों के सूखने के अलग अलग कारण हैं, लेकिन उनपर किसी का ध्यान नहीं है। जबकि 75 नए तालाब अमृत सरोवर योजना में बनाए जाने हैं। इस योजना पर आज से काम शुरू होगा।
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जिले की 423 ग्राम पंचायतों में 460 तालाब हैं। जिनमें से 300 तालाब पूरी तरह से सूखे हुए हैं। शासन ने पिछले वर्षों में तालाबों का सौंदर्यीकरण तो कराया, लेकिन पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ठोस कार्य नहीं हुआ। जिससे तालाब सूखे पड़े हैं। गंजडुंडवारा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सुजावलपुर का तालाब सूखा हुआ है। ग्राम प्रधान समसुल अंसारी बताते हैं कि तालाब का तल ऊंचा है जिसके कारण गांव की नालियों का पानी तालाब में नहीं आ पाता। इसी ब्लॉक की ग्राम पंचायत तरसीपड़ेरा का तालाब भी सूखा है। आधे तालाब की भूमि पर लोग फसल उगा रहे हैं, जबकि तालाब का शेष हिस्सा सूखा है। अमांपुर ब्लॉक के गांव खेरिया का छोटा एवं बड़ा तालाब भी सूखा पड़ा है, लेकिन तालाबों में पानी नहीं है। भीषण गर्मी के इस मौसम में पशु, पक्षी पानी के लिए परेशान हैं।
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तालाबों के आंकड़े पर एक नजर
- 460 तालाब हैं जिले की ग्राम पंचायत में।
- 423 ग्राम पंचायतें हैं जिले में।
- 300 से अधिक तालाब जिले में सूखे पड़े।
- 75 नए तालाब बनाने का शासन से मिला है लक्ष्य।
जल शक्ति मंत्रालय ने किया ट्वीट
जलशक्ति मंत्रालय ने रविवार को किए ट्वीट में कहा कि हर जिले में 75 अमृत सरोवर बनाए जाएंगे। जलशक्ति मंत्रालय ने युवाओं से अपील की है कि वह अमृत सरोवर बनाने के अभियान से जुड़ें और इसकी जिम्मेदारी उठाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में यह आह्वान किया है।
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ग्रामीण बोले, होती है परेशानी
- तालाब में पानी न होने के कारण पशु पक्षियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। तालाब में पानी होता था तो लोग अपने पशुओं को पानी पिलाने व नहलाने के लिए तालाब पर लाते थे, लेकिन अब सब बदल गया है। - देवेंद्र उपाध्याय
- तालाबों को जीवंत बनाना जरूरी है। तालाब का जीर्णोद्धार हो जाए तो वर्षा के जल का संचयन हो सकता है। जिससे जमीन के जलस्तर में सुधार होगा। खेरिया गांव का छोटा और बड़ा तालाब दोनों ही सूखे पड़े हैं। इससे दिक्कत है। - रामनरेश।
विशेषज्ञ बोले, कराया जाए पुलियों का निर्माण
- पर्यावरण विशेषज्ञ अमित तिवारी का मानना है कि गांव में पुराने समय के सभी तालाब सूखने के कारणों पर ध्यान देना जरूरी है। तमाम तालाबों को तटबंध बनाकर ऊंचा कर दिया गया है। जिससे न ड्रेनेज का पानी पहुंचता है और न ही बारिश का। गांव में जो चकरोड बनाए गए हैं उसमें वर्षा के पानी की निकासी के लिए पुलिया आदि के निर्माण नहीं किए गए हैं। जिससे पानी जहां के तहां रुक जाता है वह तालाबों में नहीं पहुंच पाता। ग्रामीण तालाबों का जीर्णोद्धार जरूरी है। इसके लिए हर तालाब की विशेष अध्ययन रिपोर्ट बनानी होगी। जिसके मुताबिक काम करने पर तालाब जीवंत हो सकेंगे।

- विकास विभाग तालाबों को अस्तित्व में लाने के लिए लगातार पहल कर रहा है। जल संचय के सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं। जिले में 75 नए तालाब भी बनाए जाएंगे। जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो तालाब सूखे हुए हैं उन्हें जीवंत करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। - तेज प्रताप मिश्र, सीडीओ
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