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गजब का दुस्साहस: कलेक्ट्रेट की 10 हजार वर्गमीटर जमीन पर कब्जा, अब दिया गया नोटिस; 14 सितंबर तक मांगा जवाब
Thu, 10 Sep 2026 10:10 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 10 Sep 2026 10:10 AM IST
सार
आगरा कलेक्ट्रेट की करीब 10 हजार वर्गमीटर सरकारी जमीन पर एक ट्रस्ट समेत कई लोगों के करीब 25 साल से कब्जे का खुलासा हुआ है। डीएम के निर्देश पर कब्जाधारकों को नोटिस जारी कर 14 सितंबर तक जवाब मांगा गया है; कब्जा न हटाने पर ₹30 करोड़ क्षतिपूर्ति वसूली की चेतावनी दी गई है।
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आगरा कलेक्ट्रेट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
आगरा कलेक्ट्रेट की करीब 10,000 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा हो गया है। डीएम मनीष बंसल के परिसर के निरीक्षण के बाद यह बात सामने आई है। जानकारी के बाद प्रशासनिक अमले ने कब्जाधारकों को नोटिस जारी कर 14 सितंबर तक जवाब तलब किया है। इसके बाद कब्जा खाली नहीं करने पर 30 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति और करीब सवा करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की दर से तक जुर्माना वसूली के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की शुरुआत तब हुई जब नवागत जिलाधिकारी मनीष बंसल ने पदभार संभालने के बाद एडीएम प्रोटोकॉल, एडीएम प्रशासन और अन्य आला अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया था। भ्रमण के दौरान ही डीएम की नजर परिसर में बने कई अवैध निर्माणों पर पड़ी। पूछताछ में संतोषजनक जवाब न मिलने पर जब उन्होंने सरकारी दस्तावेजों की जांच कराई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। कागजों में कलेक्ट्रेट की जमीन कुल 30,000 वर्ग मीटर दर्ज थी लेकिन मौके पर प्रशासनिक अमला केवल 20,000 वर्ग मीटर जमीन पर ही काबिज मिला। बाकी बची 10,000 वर्ग मीटर जमीन पर एक ट्रस्ट समेत कई लोगों ने करीब 25 साल से कब्जा जमा रखा था। इसके बाद डीएम ने इस जमीन को कब्जामुक्त कराने के आदेश जारी कर दिए।
डीएम के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया। कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए एसीएम तृतीय नितिन तेवतिया ने एक ट्रस्ट समेत सभी कब्जाधारकों को नोटिस थमा दिए हैं। नोटिस में साफ तौर पर चेताया गया है कि कब्जाधारी 4 दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण और जवाब दाखिल करें। जमीन खाली नहीं की गई या संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो प्रशासन बिना किसी रियायत के बेदखली और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर देगा। साथ ही सरकारी संपत्ति के अवैध इस्तेमाल के एवज में 30 करोड़ रुपये की राशि वसूल की जाएगी।
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जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण या कब्जा बर्दाश्त नहीं होगा और ऐसे सभी लोगों को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बेदखल किया जाएगा।
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मामले की शुरुआत तब हुई जब नवागत जिलाधिकारी मनीष बंसल ने पदभार संभालने के बाद एडीएम प्रोटोकॉल, एडीएम प्रशासन और अन्य आला अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया था। भ्रमण के दौरान ही डीएम की नजर परिसर में बने कई अवैध निर्माणों पर पड़ी। पूछताछ में संतोषजनक जवाब न मिलने पर जब उन्होंने सरकारी दस्तावेजों की जांच कराई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। कागजों में कलेक्ट्रेट की जमीन कुल 30,000 वर्ग मीटर दर्ज थी लेकिन मौके पर प्रशासनिक अमला केवल 20,000 वर्ग मीटर जमीन पर ही काबिज मिला। बाकी बची 10,000 वर्ग मीटर जमीन पर एक ट्रस्ट समेत कई लोगों ने करीब 25 साल से कब्जा जमा रखा था। इसके बाद डीएम ने इस जमीन को कब्जामुक्त कराने के आदेश जारी कर दिए।
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डीएम के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया। कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए एसीएम तृतीय नितिन तेवतिया ने एक ट्रस्ट समेत सभी कब्जाधारकों को नोटिस थमा दिए हैं। नोटिस में साफ तौर पर चेताया गया है कि कब्जाधारी 4 दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण और जवाब दाखिल करें। जमीन खाली नहीं की गई या संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो प्रशासन बिना किसी रियायत के बेदखली और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर देगा। साथ ही सरकारी संपत्ति के अवैध इस्तेमाल के एवज में 30 करोड़ रुपये की राशि वसूल की जाएगी।
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जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण या कब्जा बर्दाश्त नहीं होगा और ऐसे सभी लोगों को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बेदखल किया जाएगा।