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22 पूर्व प्रधानों ने की 14 करोड़ की वित्तीय अनियमितता, नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
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मैनपुरी। पंचायत चुनाव में 22 पूर्व प्रधान प्रतिभाग नहीं कर सकेंगे। 14 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता किए जाने के चलते ये रोक लगाई गई है। इसके लिए लेखा परीक्षा विभाग की ओर से खंड विकास अधिकारी घिरोर को पत्र भेजकर संबंधित पूर्व प्रधान को अदेय प्रमाण पत्र देने पर रोक लगा दी है। इससे प्रत्याशियों में खलबली मच गई है।
घिरोर विकास खंड की 21 ग्राम पंचायतों के 22 पूर्व प्रधानों ने सरकारी धनराशि के खर्च में वित्तीय अनियमितता की। इसमें वर्ष 2011-12 से 2019-20 तक के मामले शामिल हैं। इसके बाद से लगातार लेखा परीक्षा विभाग की ओर से ऑडिट के दौरान इनसे अभिलेख मांगे जाते रहे। लेकिन आज तक पूर्व प्रधान अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सके। कुल 22 पूर्व प्रधान 14.08 करोड़ की वित्तीय अनियमितता करने के दोषी हैं।
ऐसे में अब जब पंचायत चुनाव सिर पर है तो इन पूर्व प्रधानों को अदेय प्रमाण पत्र जारी करने पर लेखा परीक्षा विभाग ने रोक लगा दी है। इसके लिए खंड विकास अधिकारी घिरोर को पत्र लिखकर स्पष्ट रूप से इन पूर्व प्रधान को अदेयता प्रमाण पत्र जारी न करने के लिए पत्र भेजा गया है। बिना अदेयता प्रमाण पत्र के संबंधित पूर्व प्रधान चुनाव में नामांकन नहीं कर सकेंगे। इसकी जानकारी होते ही पूर्व प्रधानों में खलबली मच गई है। अब नामांकन में केवल दो दिन ही शेष हैं, ऐसे में पूर्व प्रधान अदेय प्रमाण पत्र के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
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पूर्व में कई बार भेजे जा चुके हैं नोटिस
जिन ग्राम पंचायतों में ऑडिट के दौरान वित्तीय अनियमितता को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी, उन्हें पूर्व में कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है। इसके बाद भी पूर्व प्रधान और पंचायत सचिव न तो ऑडिट के लिए उपस्थित हुए और न ही साक्ष्य उपलब्ध कराए। इस कारण ही लेखा परीक्षा विभाग ने ये निर्णय लिया है।
वित्तीय वर्षवार ग्राम पंचायतों में की गई अनियमितता
- नगला सलेही, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 15-16 तक, 14.61 लाख रुपये
-अंबरपुर, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 15-16 तक, 19.30 लाख रुपये
-तिसाह, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 62.23 लाख रुपये
-महटौली, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 53.35 लाख रुपय
-कल्होर पुवां, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 102.03 लाख रुपये
-फाजिलपुर, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 46.62 लाख रुपये
-कोठिया, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 133.16 लाख रुपये
-उसनीधा, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 17-18 तक, 51.76 लाख रुपये
-नगला सावज, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 46.19 लाख रुपये
-चीतई, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 55.34 लाख रुपये
-भटानी, वित्तीय वर्ष 2014-15 से 17-18 तक, 34.27 लाख रुपये
-तालिबपुर, वित्तीय वर्ष 2014-15 से 19-20 तक, 73.79 लाख रुपये
-नाहिली, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 60.38 लाख रुपये
-बिधूना, वित्तीय वर्ष 2014-15 से 19-20 तक, 43.85 लाख रुपये
-बम्हौरी आवाहार, वित्तीय वर्ष 2014-15 से 19-20 तक, 98.16 लाख रुपये
-कोसमा हिनूद, वित्तीय वर्ष 2015-16 से 17-18 तक, 135.87 लाख रुपये
-ईसई मधुपुरी, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 19-20 तक, 48.33 लाख रुपये
-ओय, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 13-14 तक, 12.84 लाख रुपये
-ओय, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 18-19 तक, 34.09 लाख रुपये
-पचावर, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 16-17 तक, 55.26 लाख रुपये
-कनेगी, वित्तीय वर्ष 2014-15 से 17-18 तक, 85.34 लाख रुपये
-कल्होर पछ़ां, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 17-18 तक, 140.63 लाख रुपये
लेखा परीक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त पत्र में 22 पूर्व प्रधानों को वित्तीय अनियमितता का दोषी बताया गया है। इन्हें अदेय प्रमाण पत्र जारी न किए जाने के लिए लिखा गया है। उच्चाधिकारियों को इससे अवगत करा दिया गया है। बिना अदेय प्रमाण पत्र के पूर्व प्रधान चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
धीरेंद्र कुमार, खंड विकास अधिकारी घिरोर।
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घिरोर विकास खंड की 21 ग्राम पंचायतों के 22 पूर्व प्रधानों ने सरकारी धनराशि के खर्च में वित्तीय अनियमितता की। इसमें वर्ष 2011-12 से 2019-20 तक के मामले शामिल हैं। इसके बाद से लगातार लेखा परीक्षा विभाग की ओर से ऑडिट के दौरान इनसे अभिलेख मांगे जाते रहे। लेकिन आज तक पूर्व प्रधान अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सके। कुल 22 पूर्व प्रधान 14.08 करोड़ की वित्तीय अनियमितता करने के दोषी हैं।
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ऐसे में अब जब पंचायत चुनाव सिर पर है तो इन पूर्व प्रधानों को अदेय प्रमाण पत्र जारी करने पर लेखा परीक्षा विभाग ने रोक लगा दी है। इसके लिए खंड विकास अधिकारी घिरोर को पत्र लिखकर स्पष्ट रूप से इन पूर्व प्रधान को अदेयता प्रमाण पत्र जारी न करने के लिए पत्र भेजा गया है। बिना अदेयता प्रमाण पत्र के संबंधित पूर्व प्रधान चुनाव में नामांकन नहीं कर सकेंगे। इसकी जानकारी होते ही पूर्व प्रधानों में खलबली मच गई है। अब नामांकन में केवल दो दिन ही शेष हैं, ऐसे में पूर्व प्रधान अदेय प्रमाण पत्र के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
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पूर्व में कई बार भेजे जा चुके हैं नोटिस
जिन ग्राम पंचायतों में ऑडिट के दौरान वित्तीय अनियमितता को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी, उन्हें पूर्व में कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है। इसके बाद भी पूर्व प्रधान और पंचायत सचिव न तो ऑडिट के लिए उपस्थित हुए और न ही साक्ष्य उपलब्ध कराए। इस कारण ही लेखा परीक्षा विभाग ने ये निर्णय लिया है।
वित्तीय वर्षवार ग्राम पंचायतों में की गई अनियमितता
- नगला सलेही, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 15-16 तक, 14.61 लाख रुपये
-अंबरपुर, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 15-16 तक, 19.30 लाख रुपये
-तिसाह, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 62.23 लाख रुपये
-महटौली, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 53.35 लाख रुपय
-कल्होर पुवां, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 102.03 लाख रुपये
-फाजिलपुर, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 46.62 लाख रुपये
-कोठिया, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 133.16 लाख रुपये
-उसनीधा, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 17-18 तक, 51.76 लाख रुपये
-नगला सावज, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 46.19 लाख रुपये
-चीतई, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 55.34 लाख रुपये
-भटानी, वित्तीय वर्ष 2014-15 से 17-18 तक, 34.27 लाख रुपये
-तालिबपुर, वित्तीय वर्ष 2014-15 से 19-20 तक, 73.79 लाख रुपये
-नाहिली, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 19-20 तक, 60.38 लाख रुपये
-बिधूना, वित्तीय वर्ष 2014-15 से 19-20 तक, 43.85 लाख रुपये
-बम्हौरी आवाहार, वित्तीय वर्ष 2014-15 से 19-20 तक, 98.16 लाख रुपये
-कोसमा हिनूद, वित्तीय वर्ष 2015-16 से 17-18 तक, 135.87 लाख रुपये
-ईसई मधुपुरी, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 19-20 तक, 48.33 लाख रुपये
-ओय, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 13-14 तक, 12.84 लाख रुपये
-ओय, वित्तीय वर्ष 2016-17 से 18-19 तक, 34.09 लाख रुपये
-पचावर, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 16-17 तक, 55.26 लाख रुपये
-कनेगी, वित्तीय वर्ष 2014-15 से 17-18 तक, 85.34 लाख रुपये
-कल्होर पछ़ां, वित्तीय वर्ष 2011-12 से 17-18 तक, 140.63 लाख रुपये
लेखा परीक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त पत्र में 22 पूर्व प्रधानों को वित्तीय अनियमितता का दोषी बताया गया है। इन्हें अदेय प्रमाण पत्र जारी न किए जाने के लिए लिखा गया है। उच्चाधिकारियों को इससे अवगत करा दिया गया है। बिना अदेय प्रमाण पत्र के पूर्व प्रधान चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
धीरेंद्र कुमार, खंड विकास अधिकारी घिरोर।