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बिना स्टाफ कैसे हो कुपोषण से जंग
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कुपोषण (प्रतीकात्मक चित्र)
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एटा। बाल विकास विभाग के अधिकारियों के सामने यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि कुपोषण को जड़ से मिटाने के लिए चल रही जंग, बिना स्टाफ कैसे जीती जाए। शबरी संकल्प, पुष्टाहार और कुपोषण मुक्ति जैसी योजनाएं चला रहा बाल विकास विभाग स्टाफ के अभाव से जूझ रहा है। आलम यह है कि जिले में चल रही नौ परियोजनाओं के संचालन का जिम्मा मात्र तीन सीडीपीओ संभाल रही हैं। वहीं विभाग में 72 पदों के सापेक्ष महज 15 सुपरवाइजरों की तैनाती है। विभाग ने पदों को पूर्ण करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।
प्रदेश सरकार के बाल विकास विभाग की हालत जिले में बेहद खराब है। कर्मचारियों के अभाव में योजनाओं का संचालन विभाग के लिए टेड़ी खीर बना हुआ है। ब्लॉक स्तर पर परियोजनाओं को संचालित करने के लिए नौ बाल विकास अधिकारियों के पद हैं, लेकिन जिले में केवल तीन अधिकारी ही तैनात हैं। किसी महिला अधिकारी को तैनाती दी भी जाती है, तो वे भी अपने गृह क्षेत्र में स्थानांतरण करा ले जाती हैं। इसके साथ ही जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की मानीटरिंग करने के लिए 72 सुपरवाइजरों की आवश्यकता है। जिसके सापेक्ष महज 15 सुपरवाइजर ही कार्य कर रही हैं। वर्ष 2004 से सुपरवाइजरों की भर्ती न होने से विभाग को सीमित संख्या में ही काम चलाना पड़ रहा है। ऐसे में योजनाओं को पलीता लगता नजर आ रहा है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो कार्यरत सीडीपीओ मेें एक-एक अधिकारी को तीन-तीन ब्लॉक का काम संभालना पड़ रहा है। वहीं एक सुपरवाइजर पर 120-120 आंगनबाड़ी केंद्रों का काम संभालना पड़ रहा है। विभाग ने अब शासन को कर्मचारियों की भर्ती और स्टाफ को पूर्ण करने के लिए प्रस्ताव भेजा है।
परियोजनाओं में भी खाली पड़े पद
जिले की परियोजनाओं में भी कार्यालय लिपिक के पद खाली पड़े हैं। जिला मुख्यालय पर पांच लिपिक तैनात हैं। जबकि यहां सात पद सृजित हैं। इसके अलावा नौ परियोजनाओं में वरिष्ठ सहायक और कनिष्ठ सहायक के 18 पद रिक्त हैं।
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129 आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री और 249 सहायिकाओं की कमी
विभाग के 1864 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का अभाव है। 1864 में से 1735 आंगनबाड़ी की तैनाती है। वहीं 1594 में करीब 1300 सहायिकाएं तैनात हैं।
पोषण पुनर्वास केंद्र का हाल खराब
स्टाफ के अभाव में जिले में कुपोषित बच्चों के लिए चल रहा पोषण पुनर्वास केंद्र भी बदहाल है। केंद्र में बेड खाली पड़े रहते हैं और जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। आंगनबाड़ी केंद्र पर लेकर बच्चों को पहुंच नहीं पाती हैं।
कहते हैं आंकड़े
17 हजार बच्चे हैं कुपोषित
03 सीडीपीओ की तैनाती नौ परियोजनाओं में से
129 पद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के खाली
15 सुपरवाइजर तैनात हैं 72 पदों में
स्टाफ का अभाव है, लेकिन योजना का क्रियान्वयन सुचारु रूप से चल रहा है। शासन को भर्ती कराने के लिए प्रस्ताव भेजा है। निर्देश मिलने के बाद भर्ती की जाएगी।
सत्यप्रकाश पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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प्रदेश सरकार के बाल विकास विभाग की हालत जिले में बेहद खराब है। कर्मचारियों के अभाव में योजनाओं का संचालन विभाग के लिए टेड़ी खीर बना हुआ है। ब्लॉक स्तर पर परियोजनाओं को संचालित करने के लिए नौ बाल विकास अधिकारियों के पद हैं, लेकिन जिले में केवल तीन अधिकारी ही तैनात हैं। किसी महिला अधिकारी को तैनाती दी भी जाती है, तो वे भी अपने गृह क्षेत्र में स्थानांतरण करा ले जाती हैं। इसके साथ ही जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की मानीटरिंग करने के लिए 72 सुपरवाइजरों की आवश्यकता है। जिसके सापेक्ष महज 15 सुपरवाइजर ही कार्य कर रही हैं। वर्ष 2004 से सुपरवाइजरों की भर्ती न होने से विभाग को सीमित संख्या में ही काम चलाना पड़ रहा है। ऐसे में योजनाओं को पलीता लगता नजर आ रहा है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो कार्यरत सीडीपीओ मेें एक-एक अधिकारी को तीन-तीन ब्लॉक का काम संभालना पड़ रहा है। वहीं एक सुपरवाइजर पर 120-120 आंगनबाड़ी केंद्रों का काम संभालना पड़ रहा है। विभाग ने अब शासन को कर्मचारियों की भर्ती और स्टाफ को पूर्ण करने के लिए प्रस्ताव भेजा है।
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परियोजनाओं में भी खाली पड़े पद
जिले की परियोजनाओं में भी कार्यालय लिपिक के पद खाली पड़े हैं। जिला मुख्यालय पर पांच लिपिक तैनात हैं। जबकि यहां सात पद सृजित हैं। इसके अलावा नौ परियोजनाओं में वरिष्ठ सहायक और कनिष्ठ सहायक के 18 पद रिक्त हैं।
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129 आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री और 249 सहायिकाओं की कमी
विभाग के 1864 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का अभाव है। 1864 में से 1735 आंगनबाड़ी की तैनाती है। वहीं 1594 में करीब 1300 सहायिकाएं तैनात हैं।
पोषण पुनर्वास केंद्र का हाल खराब
स्टाफ के अभाव में जिले में कुपोषित बच्चों के लिए चल रहा पोषण पुनर्वास केंद्र भी बदहाल है। केंद्र में बेड खाली पड़े रहते हैं और जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। आंगनबाड़ी केंद्र पर लेकर बच्चों को पहुंच नहीं पाती हैं।
कहते हैं आंकड़े
17 हजार बच्चे हैं कुपोषित
03 सीडीपीओ की तैनाती नौ परियोजनाओं में से
129 पद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के खाली
15 सुपरवाइजर तैनात हैं 72 पदों में
स्टाफ का अभाव है, लेकिन योजना का क्रियान्वयन सुचारु रूप से चल रहा है। शासन को भर्ती कराने के लिए प्रस्ताव भेजा है। निर्देश मिलने के बाद भर्ती की जाएगी।
सत्यप्रकाश पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी