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बैंकों की हड़ताल से 50 करोड़ का लेनदेन प्रभावित
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मथुरा। शुक्रवार को बैंकों में हड़ताल के चलते करीब 50 करोड़ का कामकाज प्रभावित रहा। इसके चलते न केवल एटीएम पर नकदी निकालने वालों की कतार लगी रही बल्कि हड़ताल की जानकारी न होने पर कुछ लोग बैंकों में भी नकदी निकालने के लिए परेशान हुए ।
सरकार की नीतियों से खफा बैंक अधिकारियों ने शुक्रवार को हड़ताल का ऐलान किया था। हड़ताल के चलते सभी सरकारी बैंक बंद रही। जनपद में करीब 280 बैंक बंद रहीं। इनमें प्रतिदिन के औसत के हिसाब से शुक्रवार को करीब 50 करोड़ से एक अरब तक का काम काज प्रभावित रहा। हड़ताल का ऐलान करने के बाद सभी बैंकों के अधिकारी शुक्रवार सुबह करीब दस बजे स्टेट बैंक के गेट पर जम गए ।
बैंक अधिकारियों ने कहा कि विजया बैंक और देना बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में मर्ज करने की कार्रवाई का बैंक अधिकारी विरोध करते हैं। उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि बकायेदारों को सरकार बचाने मेें लगी है। यदि बड़े बकायेदारों के खिलाफ सरकार कार्रवाई करेगी तो उनसे बैंक का पैसा भी वसूली होगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस दफा वेतन समझौता मात्र दो प्रतिशत पर करने का निर्णय लिया है जो कि गलत है।
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प्रदर्शन में शामिल सिंडीकेट बैंक प्रबंधक डीके अग्रवाल ने कहा कि हर पांच साल बाद सरकार के साथ वेतन समझौता होता है जो कि 20 से 25 प्रतिशत पर होता था। अबकी दफा सरकार ने मात्र दो प्रतिशत पर वेतन समझौता किया है। प्रदर्शन के दौरान स्टेट बैंक के अधिकरी विश्वनाथ गुप्ता ने भी सरकार से जल्द ही बकायेदारों के नामों का खुलासा करने की मांग की। इस दौरान स्टेट बैंक, सिंडीकेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक, देना बैंक, ओरियंटल बैंक के अधिकारीगण मौजूद थे ।
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सरकार की नीतियों से खफा बैंक अधिकारियों ने शुक्रवार को हड़ताल का ऐलान किया था। हड़ताल के चलते सभी सरकारी बैंक बंद रही। जनपद में करीब 280 बैंक बंद रहीं। इनमें प्रतिदिन के औसत के हिसाब से शुक्रवार को करीब 50 करोड़ से एक अरब तक का काम काज प्रभावित रहा। हड़ताल का ऐलान करने के बाद सभी बैंकों के अधिकारी शुक्रवार सुबह करीब दस बजे स्टेट बैंक के गेट पर जम गए ।
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बैंक अधिकारियों ने कहा कि विजया बैंक और देना बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में मर्ज करने की कार्रवाई का बैंक अधिकारी विरोध करते हैं। उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि बकायेदारों को सरकार बचाने मेें लगी है। यदि बड़े बकायेदारों के खिलाफ सरकार कार्रवाई करेगी तो उनसे बैंक का पैसा भी वसूली होगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस दफा वेतन समझौता मात्र दो प्रतिशत पर करने का निर्णय लिया है जो कि गलत है।
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प्रदर्शन में शामिल सिंडीकेट बैंक प्रबंधक डीके अग्रवाल ने कहा कि हर पांच साल बाद सरकार के साथ वेतन समझौता होता है जो कि 20 से 25 प्रतिशत पर होता था। अबकी दफा सरकार ने मात्र दो प्रतिशत पर वेतन समझौता किया है। प्रदर्शन के दौरान स्टेट बैंक के अधिकरी विश्वनाथ गुप्ता ने भी सरकार से जल्द ही बकायेदारों के नामों का खुलासा करने की मांग की। इस दौरान स्टेट बैंक, सिंडीकेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक, देना बैंक, ओरियंटल बैंक के अधिकारीगण मौजूद थे ।