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सीता चरण भरत सिर नावा, अनुज समेत परम सुख पावा
Updated Sun, 21 Oct 2018 12:32 AM IST
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कोसीकलां में मानव कंधों से गुजरते भरत व शत्रुघ्न
- फोटो : अमर उजाला बयूराो
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कोसीकलां (मथुरा)। श्रीराम और लक्ष्मण के अयोध्या आगमन की खबर मिलते ही भाई भरत और शत्रुघ्न व्याकुल हो उठे। बगैर समय गंवाए दोनों भाई श्रीराम के दर्शन को दौड़ लिए। चारों भाई के एक-दूसरे के गले मिलते ही आंखों से आंसू बरसने लगे। भरत मां जानकी जी के चरणों में बैठ गए। यह सब देख जनता भावविभोर हो गई। राजा रामचंद्र की जयजयकार होने लगी। पुष्प बरसने लगे।
शनिवार को कोसीकलां में प्रख्यात भरत मिलाप लीला का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत 14 साल के वनवास से लौट रहे राजा रामचंद्र के स्वागत के लिए शहर को भव्यता के साथ सजाया गया। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए। श्रीराम के आगमन की सूचना पर लोग दर्शन को दौड़ लिए। स्थानीय महिलाएं फूलमालाएं लेकर छतों पर विराजमान हो गईं। हर तरफ राजा रामचंद्र की जयजयकार गुंजायमान होने लगी।
चित्रकूट के प्रतीक ग्यालाल स्मृति भवन से पुष्पक विमान के प्रतीक रथ पर श्रीराम, जानकी, लक्ष्मण और हनुमान की सवारी निकाली गई। इसे भरतमिलाप चौक पहुंचने में लगभग 2 घंटे से अधिक का समय लगा। रास्ते में स्थान-स्थान पर पुष्पवर्षा कर आरती की गई। भरतमिलाप चौक में श्रीराम की सवारी के पहुंचने पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ से वातावरण राममय हो चुका था।
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यहां श्रीराम के पास भरत-शत्रुघ्न के जाने के लिए श्रद्धालुओं ने अपने कंधों से मानव सड़क का निर्माण कर दिया। श्रद्धालुओं की इच्छा किसी तरह भरत जी रामचंद्र से मिलने के लिए उनके कंधों से होकर गुजरें। उनके शरीर से छू भर जाए। इस मानवी सड़क से भरत एवं शत्रुघ्न अयोध्या के द्वार तक पहुंचे और फिर चारों भाइयों ने एक दूसरे को गले से लगा लिया। चारों भाईयों के गले मिलते ही संपूर्ण वातावरण श्रीराममय हो गया।
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शनिवार को कोसीकलां में प्रख्यात भरत मिलाप लीला का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत 14 साल के वनवास से लौट रहे राजा रामचंद्र के स्वागत के लिए शहर को भव्यता के साथ सजाया गया। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए। श्रीराम के आगमन की सूचना पर लोग दर्शन को दौड़ लिए। स्थानीय महिलाएं फूलमालाएं लेकर छतों पर विराजमान हो गईं। हर तरफ राजा रामचंद्र की जयजयकार गुंजायमान होने लगी।
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चित्रकूट के प्रतीक ग्यालाल स्मृति भवन से पुष्पक विमान के प्रतीक रथ पर श्रीराम, जानकी, लक्ष्मण और हनुमान की सवारी निकाली गई। इसे भरतमिलाप चौक पहुंचने में लगभग 2 घंटे से अधिक का समय लगा। रास्ते में स्थान-स्थान पर पुष्पवर्षा कर आरती की गई। भरतमिलाप चौक में श्रीराम की सवारी के पहुंचने पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ से वातावरण राममय हो चुका था।
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यहां श्रीराम के पास भरत-शत्रुघ्न के जाने के लिए श्रद्धालुओं ने अपने कंधों से मानव सड़क का निर्माण कर दिया। श्रद्धालुओं की इच्छा किसी तरह भरत जी रामचंद्र से मिलने के लिए उनके कंधों से होकर गुजरें। उनके शरीर से छू भर जाए। इस मानवी सड़क से भरत एवं शत्रुघ्न अयोध्या के द्वार तक पहुंचे और फिर चारों भाइयों ने एक दूसरे को गले से लगा लिया। चारों भाईयों के गले मिलते ही संपूर्ण वातावरण श्रीराममय हो गया।