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आसमान में बादलों के चलते नही देख सके चंद्र ग्रहण का नजारा
Updated Sat, 28 Jul 2018 11:55 PM IST
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blood moon
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कासगंज/ सोरों। रात में आसमान में बादल घिरे रहने से लोग सदी के सबसे बड़े चंद्र ग्रहण का नजारा देखने से वंचित रह गए। लोगों ने ग्रहण के चलते दोष शांत करने के लिए रात में ही अपने उपाय किए। लोगों ने हरिपदी गंगा में स्नान करने के उपरांत मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना की
जनपद में बुधवार की शाम से शुरू हुआ बारिश का दौर शनिवार को भी बना रहा, जिससे आसमान में बादल घिरे रहे। बादलों के चलते सबसे अधिक दिक्कत उन लोगों को हुई जिन की राशियों पर ग्रहण अशुभ बताया गया। ऐसे लोगों को पंडितों, पुजारियों आदि ने ग्रहण के मध्य समय के बाद चंद्र की छाया को देखकर अपना दोष उपाय करना था। ऐसे लोगों को बिना छाया देखे ही अपने उपाय किए। इसके साथ ही काफी लोगों में चंद्र ग्रहण को देखने की भी उत्सुकता थी। इन लोगों ने अपनी तैयारी भी कर रखी थी, लेकिन रात में बादल और बारिश के चलते वे चंद्र ग्रहण न देख पाने से मायूस हो गए। लोगों ने सुबह के समय स्नान आदि के उपरांत दान आदि किया। चंद्रग्रहण के सूतक लग जाने से बाद दोपहर में मंदिरों के पट बंद हो जाने से पूजा पाठ नहीं कर सके थे। तीर्थ नगरी में लोगों ने हरिपदी गंगा में स्नान कर मंदिरों में दर्शन किए। ग्रहण हो जाने के बाद सुबह से ही लोग हरिपदी गंगा में स्नान के लिए पहुंच गए और स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया व देवों की आरती उतारी। उधर मंदिरों में भी पुजारियों ने विशेष सफाई धुलाई की। देवी देवताओं को गंगा जल से स्नान कराकर पोषक बदली। ग्रहण के उपरांत धर्मप्रेमियों ने गरीब व पात्रों को अन्न वस्त्र दान किए। ग्रहणकाल में घरों में लोग भजन कीर्तन करते रहे।
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जनपद में बुधवार की शाम से शुरू हुआ बारिश का दौर शनिवार को भी बना रहा, जिससे आसमान में बादल घिरे रहे। बादलों के चलते सबसे अधिक दिक्कत उन लोगों को हुई जिन की राशियों पर ग्रहण अशुभ बताया गया। ऐसे लोगों को पंडितों, पुजारियों आदि ने ग्रहण के मध्य समय के बाद चंद्र की छाया को देखकर अपना दोष उपाय करना था। ऐसे लोगों को बिना छाया देखे ही अपने उपाय किए। इसके साथ ही काफी लोगों में चंद्र ग्रहण को देखने की भी उत्सुकता थी। इन लोगों ने अपनी तैयारी भी कर रखी थी, लेकिन रात में बादल और बारिश के चलते वे चंद्र ग्रहण न देख पाने से मायूस हो गए। लोगों ने सुबह के समय स्नान आदि के उपरांत दान आदि किया। चंद्रग्रहण के सूतक लग जाने से बाद दोपहर में मंदिरों के पट बंद हो जाने से पूजा पाठ नहीं कर सके थे। तीर्थ नगरी में लोगों ने हरिपदी गंगा में स्नान कर मंदिरों में दर्शन किए। ग्रहण हो जाने के बाद सुबह से ही लोग हरिपदी गंगा में स्नान के लिए पहुंच गए और स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया व देवों की आरती उतारी। उधर मंदिरों में भी पुजारियों ने विशेष सफाई धुलाई की। देवी देवताओं को गंगा जल से स्नान कराकर पोषक बदली। ग्रहण के उपरांत धर्मप्रेमियों ने गरीब व पात्रों को अन्न वस्त्र दान किए। ग्रहणकाल में घरों में लोग भजन कीर्तन करते रहे।
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