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मानसून का इंतजार, नालों की सफाई नहीं
Updated Sun, 24 Jun 2018 11:10 PM IST
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बूढ़ी माई चौक पर लगा गंदगी का ढेर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एटा। मानसून का इंतजार है। माह के अंतिम दिनों में शायद झमाझम बरसात भी हो जाए लेकिन बरसात के पानी की निकासी को लेकर नगर पालिका की ओर से कोई व्यवस्था अभी तक नहीं की गई है। नगर के नाले पूरी तरह से चौक पड़े है। आलम यह है कि बरसात में पानी सड़कों पर ही बहता नजर आएगा। रविवार को ‘अमर उजाला’ की टीम ने नगर के नालों की पड़ताल की तो नालों की सफाई की हकीकत सामने आ गई।
वह 15 साल से दुकान कर रहे हैं लेकिन नालों की सफाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जाती है। पिछले छह माह में तो नालों की सफाई तो दूर कूड़ा निकालने तक कोई नहीं आया।
प्रतीक मिश्रा, दुकानदार
नालों की सफाई न होने की वजह से रिमझिम बरसात में भी उनके घर के सामने पानी भर जाता है। कई बार पालिका से सफाई के लिए अपील कर चुके हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
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रमेश चंद्र
जूस की दुकान है। नाले की सफाई के लिए सफाईकर्मियों को बुलाने पर एक से डेढ़ हजार रुपये देने पड़ते हैं। नालों की सफाई कभी होते नहीं देखी।
अकरम, दुकानदार
नालों की सफाई तो बहुत दूर की बात है। प्रतिदिन कूड़ा तक नहीं उठता है। साफ सफाई को लेकर शहर का खस्ता हाल है।
प्रतीक सैनी
100 नियमित सफाई कर्मचारी है पालिका में
75 सफाई कर्मचारी संविदा पर तैनात
100 सफाई कर्मचारी सेवा प्रदाता के तौर पर लगे
पॉश कॉलोनियों में भरता है पानी
नालों की सफाई न होने के कारण शहर की अरुणा नगर, इंद्रपुरी, रेलवे रोड, विजय नगर, घंटाघर, कैलाश गंज, मेहता पार्क आदि जगह पानी भर जाता है।
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सरकारी अस्पताल में अभी तक भरा गंदा पानी
नाला चौक होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। सरकारी अस्पताल में भी गंदा पानी भरा है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग दवा लेने आते हैं और उन्हें भी गंदे पानी में होकर निकलने को मजबूर होना पड़ता है।
100 सफाई कर्मचारियों की चार टीम बनाकर नालों की सफाई का कार्य शुरू करा दिया गया है। करीब दस दिन में नाला सफाई होने में लगेंगे। बरसात से पहले सभी नालों की सफाई करा दी जाएगी।
मीरा गांधी, पालिकाध्यक्ष
20 से 25 लाख रुपये होते हैं नाला सफाई पर खर्च
एटा। नगर पालिका की ओर से नालों की सफाई हर वर्ष कराई जाती है। जिसमें नगर पालिका की ओर से 20 से 25 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इस वर्ष भी इतना ही बजट खर्च होने की संभावना जताई जा रही है।
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वह 15 साल से दुकान कर रहे हैं लेकिन नालों की सफाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जाती है। पिछले छह माह में तो नालों की सफाई तो दूर कूड़ा निकालने तक कोई नहीं आया।
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प्रतीक मिश्रा, दुकानदार
नालों की सफाई न होने की वजह से रिमझिम बरसात में भी उनके घर के सामने पानी भर जाता है। कई बार पालिका से सफाई के लिए अपील कर चुके हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
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रमेश चंद्र
जूस की दुकान है। नाले की सफाई के लिए सफाईकर्मियों को बुलाने पर एक से डेढ़ हजार रुपये देने पड़ते हैं। नालों की सफाई कभी होते नहीं देखी।
अकरम, दुकानदार
नालों की सफाई तो बहुत दूर की बात है। प्रतिदिन कूड़ा तक नहीं उठता है। साफ सफाई को लेकर शहर का खस्ता हाल है।
प्रतीक सैनी
100 नियमित सफाई कर्मचारी है पालिका में
75 सफाई कर्मचारी संविदा पर तैनात
100 सफाई कर्मचारी सेवा प्रदाता के तौर पर लगे
पॉश कॉलोनियों में भरता है पानी
नालों की सफाई न होने के कारण शहर की अरुणा नगर, इंद्रपुरी, रेलवे रोड, विजय नगर, घंटाघर, कैलाश गंज, मेहता पार्क आदि जगह पानी भर जाता है।
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सरकारी अस्पताल में अभी तक भरा गंदा पानी
नाला चौक होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। सरकारी अस्पताल में भी गंदा पानी भरा है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग दवा लेने आते हैं और उन्हें भी गंदे पानी में होकर निकलने को मजबूर होना पड़ता है।
100 सफाई कर्मचारियों की चार टीम बनाकर नालों की सफाई का कार्य शुरू करा दिया गया है। करीब दस दिन में नाला सफाई होने में लगेंगे। बरसात से पहले सभी नालों की सफाई करा दी जाएगी।
मीरा गांधी, पालिकाध्यक्ष
20 से 25 लाख रुपये होते हैं नाला सफाई पर खर्च
एटा। नगर पालिका की ओर से नालों की सफाई हर वर्ष कराई जाती है। जिसमें नगर पालिका की ओर से 20 से 25 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इस वर्ष भी इतना ही बजट खर्च होने की संभावना जताई जा रही है।