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फसल में कम गल्ला निकलता देख किसान को पड़ा अटैक
Updated Mon, 23 Apr 2018 11:51 PM IST
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किसान
फिरोजाबाद/टूंडला। आंधी और बारिश से गेहूं की फसल बर्बाद होने से परेशान किसान को हार्ट अटैक आने से मौत हो गई। मृतक पर बैंक का ऋण बकाया था, जिससे किसान काफी परेशान था। मृत किसान की आठ संतान हैं।
थाना नारखी के गांव रतौली निवासी 58 वर्षीय मुन्नालाल पुत्र साहब सिंह के पास करीब चार बीघा गेहूं की फसल बोई थी। आंधी और बारिश से गेहूं की फसल बर्बाद हो गई और कुछ बच गई थी। रविवार देर शाम करीब साढ़े आठ बजे किसान ट्रैक्टर से फसल को निकलवा रहा था। फसल से गल्ला अच्छा नहीं देख उसकी खेत पर ही तबियत बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक पड़ गया। परिजनों ने उन्हें आननफानन में गांव में ही एक चिकित्सक के पास से ले गए, जहां से उन्हें आगरा रेफर कर दिया गया। आगरा में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। देर रात परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया।
परिजनों ने बताया कि पूरे परिवार का खर्चा फसल से ही चलता था। मृतक पर एक पुत्र व सात पुत्रियां हैं। इनमें रजनी, निर्मला, रेखा व रामवती की शादी हो गई है। पुत्र जयकुमार, कमलेश, विशना व प्रीति अविवाहित हैं। मृतक ने फसल के लिए ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त ओखरा से 70 हजार रुपये का फसल ऋण भी ले रखा था। किसान की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। किसान अपने परिवार का अकेला पालन हार था।
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थाना नारखी के गांव रतौली निवासी 58 वर्षीय मुन्नालाल पुत्र साहब सिंह के पास करीब चार बीघा गेहूं की फसल बोई थी। आंधी और बारिश से गेहूं की फसल बर्बाद हो गई और कुछ बच गई थी। रविवार देर शाम करीब साढ़े आठ बजे किसान ट्रैक्टर से फसल को निकलवा रहा था। फसल से गल्ला अच्छा नहीं देख उसकी खेत पर ही तबियत बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक पड़ गया। परिजनों ने उन्हें आननफानन में गांव में ही एक चिकित्सक के पास से ले गए, जहां से उन्हें आगरा रेफर कर दिया गया। आगरा में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। देर रात परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया।
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परिजनों ने बताया कि पूरे परिवार का खर्चा फसल से ही चलता था। मृतक पर एक पुत्र व सात पुत्रियां हैं। इनमें रजनी, निर्मला, रेखा व रामवती की शादी हो गई है। पुत्र जयकुमार, कमलेश, विशना व प्रीति अविवाहित हैं। मृतक ने फसल के लिए ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त ओखरा से 70 हजार रुपये का फसल ऋण भी ले रखा था। किसान की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। किसान अपने परिवार का अकेला पालन हार था।
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