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बारिश में मकान की छत जमींदोज, 12 लोग मलबे में दबे
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:59 PM IST
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बारिश में मकान की छत जमींदोज, 12 लोग मलबे में दबे
- फोटो : अमर उजाला
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अवागढ़/एटा।
ब्लॉक क्षेत्र के सहनौआ गांव में सोमवार शाम एक मकान की छत अचानक जमींदोज हो गई और मलबे में एक परिवार के आठ सदस्याें समेत 12 लोग दब कर घायल हो गए। ग्रामीणों ने पुलिस की मदद से मलबे से लोगों को बाहर निकाल कर पीएचसी पहुंचाया।
मलबे में दबने वालों में महिलाएं, बच्चे और पुरुष शामिल हैं।
सहनौआ गांव में चरण सिंह दिवाकर अपने पचास साल पुराने पुस्तैनी मकान में रहते हैं। सोमवार को रक्षाबंधन होने के कारण उनकी बेटियां और बहने राखी बांधने आई थीं। इसके चलते आसपास के लोग और बच्चे भी मिलने आए थे। शाम चार बजे अचानक मकान की छत भरभरा कर गिर गई और मलबेे में एक ही परिवार के आठ सदस्य और 4 पड़ोसी समेत 12 लोग दब गए। छत गिरने की आवाज सुनकर दौड़ ग्रामीण पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से मलबे में से सभी 12 लोगों को निकाल कर पीएचसी अवागढ़ में भर्ती कराया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रुप से घायल सात लोगों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। घायलों में चरण सिंह दिवाकर की बेटी रचना 15 और संगीता 22, बेटा छोटू 08 और अनुज 12, चचेरा भाई श्यामपाल 18 और बृजेश 10, चचेरी बहन मीरा 18, मां रेशमा 60 के अलावा पड़ोसी शैतान 26, राकेश 35, अशोक 30 शामिल हैं। उपरोक्त में सात गंभीर घायलों को पीएचसी अवागडढ़ से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
परिवार से छूकर निकल गई मौत
रक्षाबंधन के दिन चरन सिंह दिवाकर के परिवार से मौत छू कर निकल गई। यदि वक्त रहते ग्रामीण और पुलिस मलबे में दबे सभी लोगों को मलबा हटा कर नहीं निकालती तो पूरा कुनबा और ग्रामीण नहीं बचते। ग्रामीण और चरन सिंह दिवाकर का परिवार सदमे में है।
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ग्रामीणों की तत्परता से बची 12 जाने
मकान की छत जमींदोज होने की आवाज सुनते ही ग्रामीण मलवा हटाने में जुट गए। इसी के चलते मलबे में दबे परिवार के आठ सदस्यों और चार ग्रामीणों की जान वक्त रहते बचाई जा सकी। जिस वक्त छत गिरी उस वक्त बारिश हो रही थी, लेकिन ग्रामीणों ने बारिश की परवाह किए बिना मलबे में दबे लोगों को एक-एक कर बाहर निकाला और पुलिस की मदद से अस्पताल पहुंचाने का सिलसिला जारी रखा।
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ब्लॉक क्षेत्र के सहनौआ गांव में सोमवार शाम एक मकान की छत अचानक जमींदोज हो गई और मलबे में एक परिवार के आठ सदस्याें समेत 12 लोग दब कर घायल हो गए। ग्रामीणों ने पुलिस की मदद से मलबे से लोगों को बाहर निकाल कर पीएचसी पहुंचाया।
मलबे में दबने वालों में महिलाएं, बच्चे और पुरुष शामिल हैं।
सहनौआ गांव में चरण सिंह दिवाकर अपने पचास साल पुराने पुस्तैनी मकान में रहते हैं। सोमवार को रक्षाबंधन होने के कारण उनकी बेटियां और बहने राखी बांधने आई थीं। इसके चलते आसपास के लोग और बच्चे भी मिलने आए थे। शाम चार बजे अचानक मकान की छत भरभरा कर गिर गई और मलबेे में एक ही परिवार के आठ सदस्य और 4 पड़ोसी समेत 12 लोग दब गए। छत गिरने की आवाज सुनकर दौड़ ग्रामीण पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से मलबे में से सभी 12 लोगों को निकाल कर पीएचसी अवागढ़ में भर्ती कराया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रुप से घायल सात लोगों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। घायलों में चरण सिंह दिवाकर की बेटी रचना 15 और संगीता 22, बेटा छोटू 08 और अनुज 12, चचेरा भाई श्यामपाल 18 और बृजेश 10, चचेरी बहन मीरा 18, मां रेशमा 60 के अलावा पड़ोसी शैतान 26, राकेश 35, अशोक 30 शामिल हैं। उपरोक्त में सात गंभीर घायलों को पीएचसी अवागडढ़ से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
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परिवार से छूकर निकल गई मौत
रक्षाबंधन के दिन चरन सिंह दिवाकर के परिवार से मौत छू कर निकल गई। यदि वक्त रहते ग्रामीण और पुलिस मलबे में दबे सभी लोगों को मलबा हटा कर नहीं निकालती तो पूरा कुनबा और ग्रामीण नहीं बचते। ग्रामीण और चरन सिंह दिवाकर का परिवार सदमे में है।
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ग्रामीणों की तत्परता से बची 12 जाने
मकान की छत जमींदोज होने की आवाज सुनते ही ग्रामीण मलवा हटाने में जुट गए। इसी के चलते मलबे में दबे परिवार के आठ सदस्यों और चार ग्रामीणों की जान वक्त रहते बचाई जा सकी। जिस वक्त छत गिरी उस वक्त बारिश हो रही थी, लेकिन ग्रामीणों ने बारिश की परवाह किए बिना मलबे में दबे लोगों को एक-एक कर बाहर निकाला और पुलिस की मदद से अस्पताल पहुंचाने का सिलसिला जारी रखा।