{"_id":"596a5c494f1c1bf32f8b4750","slug":"21500142665-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दम तोड़ गईं 35 करोड़ की लागत से बनी टंकियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दम तोड़ गईं 35 करोड़ की लागत से बनी टंकियां
Updated Sun, 16 Jul 2017 12:07 AM IST
विज्ञापन
money
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। जल निगम द्वारा 12 गांवों में करीब 35 करोड़ की लागत से बनी पानी की टंकियां 10 साल में ही दम तोड़ने लगीं हैं। रखरखाव व मरम्मत के अभाव में ग्रामीणों को पीने का पानी नहीं मिल रहा।
जल निगम ने ग्रामीणों को घर पर पीने योग्य पानी पिलाने के लिए नंदगांव ब्लाक के गांव हुलवाना व ढ़भाला में 2007 व 2008 में, राया के रायपुर मई में 2002 में, गोवर्धन के गांव बछगांव में 2012 में, मथुरा के गांव राल में 2013 में, महावन बांगर में 2007 में, चौमुहां के गांव अहूरी में 2007 में, और छाता के गांव बिसंभरा, गोवर्धन के कोंथरा, मथुरा के जैंत में पानी की टंकियां बनवाईं थीं।
एक टंकी के निर्माण पर जल निगम ने तीन करोड़ से अधिक की राशि खर्च हुई, लेकिन थोड़े ही समय में यह टंकियां दम तोड़ने लगीं हैं। इन टंकियाें को ठीक नहीं कराया जा रहा। पानी के लिए ग्रामीण सीडीओ व डीडीओ आफिस के चक्कर लगाते रहे।
विज्ञापन
‘जिन गांवों में पानी की टंकियों में आंशिक खराबी है, उनकी मरम्मत के लिए पैसा मार्च में मांगा गया था, पैसा न मिलने के अभाव में काम नहीं होे सका। अब उनको चालू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं’
नसीमुद्दीन, एक्सईएन जल निगम
विज्ञापन
जल निगम ने ग्रामीणों को घर पर पीने योग्य पानी पिलाने के लिए नंदगांव ब्लाक के गांव हुलवाना व ढ़भाला में 2007 व 2008 में, राया के रायपुर मई में 2002 में, गोवर्धन के गांव बछगांव में 2012 में, मथुरा के गांव राल में 2013 में, महावन बांगर में 2007 में, चौमुहां के गांव अहूरी में 2007 में, और छाता के गांव बिसंभरा, गोवर्धन के कोंथरा, मथुरा के जैंत में पानी की टंकियां बनवाईं थीं।
विज्ञापन
एक टंकी के निर्माण पर जल निगम ने तीन करोड़ से अधिक की राशि खर्च हुई, लेकिन थोड़े ही समय में यह टंकियां दम तोड़ने लगीं हैं। इन टंकियाें को ठीक नहीं कराया जा रहा। पानी के लिए ग्रामीण सीडीओ व डीडीओ आफिस के चक्कर लगाते रहे।
विज्ञापन
‘जिन गांवों में पानी की टंकियों में आंशिक खराबी है, उनकी मरम्मत के लिए पैसा मार्च में मांगा गया था, पैसा न मिलने के अभाव में काम नहीं होे सका। अब उनको चालू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं’
नसीमुद्दीन, एक्सईएन जल निगम