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आपसी संवाद में फिर सुनी जाएगी पाली भाषा
Updated Fri, 14 Jul 2017 12:28 AM IST
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आगरा। केवल साहित्य और भदंत, भिक्षुओं तक सीमित रह गई पाली भाषा को अब आपसी संवाद का जरिया बनाने का प्रयास हो रहा है। प्राचीन पाली भाषा को न सिर्फ समझ सकें, बल्कि इसमें संवाद भी किए जा सकें, इसलिए लिए राष्ट्रीय बौद्ध महासभा 15 से 16 जुलाई तक प्रशिक्षण शिविर लगा रही है।
महासभा के संस्थापक धर्म प्रकाश भारतीय ने बताया कि संस्कृत की तरह ही पाली भाषा प्रचलन में नहीं है। केवल धार्मिक आयोजनों और खास लोग ही पाली में संवाद करते हैं। भगवान बुद्ध के संदेशों, पंचशील, अष्टांग मार्ग और त्रिशरण आदि को समझने के लिए पाली जरूरी है। दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में लोगों और उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को सिखाया जाएगा। ग्वालियर रोड स्थित नगला माकरौल के गौतम बुद्ध इंटर कालेज में सुबह 10 से शाम 5 बजे तक कई बैच बनाकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। लखनऊ आकाशवाणी के निदेशक दयासागर बौद्ध प्रशिक्षण देंगे।
पाली भाषा में है बौद्ध साहित्य
महासभा युवाओं को पाली से जोड़ना चाहती है। पाली में लिखे गए अभिलेख भी समाज के युवा समझ नहीं पाते। गिरनार में अशोक के अभिलेख ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में उकेरे गए हैं। पाली साहित्य तीन भागों में है, जिन्हें पिटक कहा गया है। विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक। भगवान बुद्ध के विचारों और उपदेशों को विशेष शैली में संकलित किया गया है। 12 वीं से 16 वीं शताब्दी तक पाली भाषा में कई काव्य ग्रंथ और रचनाएं रहीं।
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महासभा के संस्थापक धर्म प्रकाश भारतीय ने बताया कि संस्कृत की तरह ही पाली भाषा प्रचलन में नहीं है। केवल धार्मिक आयोजनों और खास लोग ही पाली में संवाद करते हैं। भगवान बुद्ध के संदेशों, पंचशील, अष्टांग मार्ग और त्रिशरण आदि को समझने के लिए पाली जरूरी है। दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में लोगों और उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को सिखाया जाएगा। ग्वालियर रोड स्थित नगला माकरौल के गौतम बुद्ध इंटर कालेज में सुबह 10 से शाम 5 बजे तक कई बैच बनाकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। लखनऊ आकाशवाणी के निदेशक दयासागर बौद्ध प्रशिक्षण देंगे।
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पाली भाषा में है बौद्ध साहित्य
महासभा युवाओं को पाली से जोड़ना चाहती है। पाली में लिखे गए अभिलेख भी समाज के युवा समझ नहीं पाते। गिरनार में अशोक के अभिलेख ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में उकेरे गए हैं। पाली साहित्य तीन भागों में है, जिन्हें पिटक कहा गया है। विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक। भगवान बुद्ध के विचारों और उपदेशों को विशेष शैली में संकलित किया गया है। 12 वीं से 16 वीं शताब्दी तक पाली भाषा में कई काव्य ग्रंथ और रचनाएं रहीं।
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