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दवा कंपनी दे रहीं छूट, खरीदारी हुई कम
Updated Mon, 19 Jun 2017 01:59 AM IST
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3500: मेडिकल स्टोर जनपद में
800: दुकानें मेडिकल की थोक की
80: करोड़ रुपये का रोजाना कारोबार
दवा कंपनी दे रहीं छूट, खरीदारी हुई कम
जीएसटी पर स्थिति स्पष्ट न होने पर स्टाक से बच रहे फुटकर दवा विक्रेता, दवा कंपनी दे रही 7-12 फीसदी की छूट, फुटकर में दवाओं की शुरू हुई किल्लत
अमर उजाला ब्यूरो
आगरा।
दवाओं पर जीएसटी की स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं है, ऐसे में बाजार में दवाओं की किल्लत शुरू हो गई है। हालत यह है कि निर्माता कंपनी दवाओं की कीमत पर 7-12 फीसदी तक छूट दे रही है, बावजूद थोक-फुटकर दवा विक्रेता स्टाक करने से हिचक रहे हैं।
कर निर्धारण में भ्रम की स्थिति होने पर दुकानदारों ने 70-80 फीसदी स्टाक कम कर दिया है। थोक व्यवसायियों ने 25 जून के बाद माल वापसी की मनाही कर दी है। इससे फुटकर दवा विक्रता रोजाना की जरूरत के आधार पर ही दवा खरीद कर ले जा रहे हैं। मेडिकल ट्रैडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव पुनीत कालरा ने बताया कि कंपनी अपना माल खपाने के लिए दवाओं की कीमत में भारी छूट दे रही है, लेकिन वापसी नहीं लेगी। ऐसे में थोक व्यवसायी स्टाक नहीं कर रहे। यही स्थिति फुटकर दुकानदारों की है। दवाओं की किल्लत शुरू हो गई है। 25 जून के बाद स्थिति और बिगड़ सकती है।
इन दवाओं की आ रही है किल्लत :
ओमिनी जैल (चोट दर्द), रैबीपुर इंजेक्शन (कुत्ता काटने), फैंसीड्रिल (खांसी), पायरियामोन ड्राप (नेत्र), कॉरेक्स सीरप (खांसी), डुफाटन (कमजोर बच्चेदानी), वैक्सीरेक्स (चिकनपॉक्स का टीका), एविनसिफ-200(एंटीबायोटिक), एल्युमिन इंजेक्शन (डायलिसिस के मरीज)।
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जीएसटी के चलते स्टाक नहीं कर रहे। अब रोजाना की बिक्री के आधार पर ही दवाएं ला रहे हैं। दवाएं बिक जाती हैं, तो बाद में आने वाले मरीजों को दवाओं की किल्लत झेलनी पड़ रही है।
अफजल खान, फुटकर दवा विक्रेता
जीएसटी के तहत कितना कर लगेगा, इस पर असमंजस बना हुआ है। कहीं स्टाक करने पर घाटा न हो जाए, यही सोचकर स्टाक नहीं किया जा रहा। बिक्री भी कम हो गई है। दवाओं की किल्लत होने लगी है।
आशू शर्मा, अध्यक्ष आगरा जिला केमिस्ट एसोसिएशन
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800: दुकानें मेडिकल की थोक की
80: करोड़ रुपये का रोजाना कारोबार
दवा कंपनी दे रहीं छूट, खरीदारी हुई कम
जीएसटी पर स्थिति स्पष्ट न होने पर स्टाक से बच रहे फुटकर दवा विक्रेता, दवा कंपनी दे रही 7-12 फीसदी की छूट, फुटकर में दवाओं की शुरू हुई किल्लत
अमर उजाला ब्यूरो
आगरा।
दवाओं पर जीएसटी की स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं है, ऐसे में बाजार में दवाओं की किल्लत शुरू हो गई है। हालत यह है कि निर्माता कंपनी दवाओं की कीमत पर 7-12 फीसदी तक छूट दे रही है, बावजूद थोक-फुटकर दवा विक्रेता स्टाक करने से हिचक रहे हैं।
कर निर्धारण में भ्रम की स्थिति होने पर दुकानदारों ने 70-80 फीसदी स्टाक कम कर दिया है। थोक व्यवसायियों ने 25 जून के बाद माल वापसी की मनाही कर दी है। इससे फुटकर दवा विक्रता रोजाना की जरूरत के आधार पर ही दवा खरीद कर ले जा रहे हैं। मेडिकल ट्रैडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव पुनीत कालरा ने बताया कि कंपनी अपना माल खपाने के लिए दवाओं की कीमत में भारी छूट दे रही है, लेकिन वापसी नहीं लेगी। ऐसे में थोक व्यवसायी स्टाक नहीं कर रहे। यही स्थिति फुटकर दुकानदारों की है। दवाओं की किल्लत शुरू हो गई है। 25 जून के बाद स्थिति और बिगड़ सकती है।
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इन दवाओं की आ रही है किल्लत :
ओमिनी जैल (चोट दर्द), रैबीपुर इंजेक्शन (कुत्ता काटने), फैंसीड्रिल (खांसी), पायरियामोन ड्राप (नेत्र), कॉरेक्स सीरप (खांसी), डुफाटन (कमजोर बच्चेदानी), वैक्सीरेक्स (चिकनपॉक्स का टीका), एविनसिफ-200(एंटीबायोटिक), एल्युमिन इंजेक्शन (डायलिसिस के मरीज)।
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जीएसटी के चलते स्टाक नहीं कर रहे। अब रोजाना की बिक्री के आधार पर ही दवाएं ला रहे हैं। दवाएं बिक जाती हैं, तो बाद में आने वाले मरीजों को दवाओं की किल्लत झेलनी पड़ रही है।
अफजल खान, फुटकर दवा विक्रेता
जीएसटी के तहत कितना कर लगेगा, इस पर असमंजस बना हुआ है। कहीं स्टाक करने पर घाटा न हो जाए, यही सोचकर स्टाक नहीं किया जा रहा। बिक्री भी कम हो गई है। दवाओं की किल्लत होने लगी है।
आशू शर्मा, अध्यक्ष आगरा जिला केमिस्ट एसोसिएशन