Agra: 21 साल का संघर्ष, फिर भी अकोला न बन सकी तहसील
अकोला को तहसील बनाने का एक मौका 2007 में मिला था। तब तत्कालीन ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने मथुरा में महावन को तहसील का दर्जा दिलाया था। उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय फतेहपुर सीकरी से सांसद थीं। तब भी शासन स्तर से अकोला को तहसील बनाने की कवायद चली थी।
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आगरा के अकोला को तहसील बनाने के लिए इलाकाई लोग 21 साल से संघर्ष कर रहे हैं। 2001 में शासन ने जिलाधिकारी से आख्या मांगी थी। इसके बावजूद मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। अब शुक्रवार को किरावली, सदर, खेरागढ़ और फतेहाबाद के उपजिलाधिकारियों की कलेक्ट्रेट में बैठक बुलाई गई है। माना जा रहा है कि मानचित्रों व दस्तावेज के आधार पर नए सिरे से प्रस्ताव बनाने पर मुहर लग सकती है।
1.50 लाख से अधिक आबादी को होगा फायदा
जिले में 6 तहसीलें हैं। अकोला के तहसील बनने पर सात हो जाएंगी। मंडल में आगरा सबसे ज्यादा तहसील वाला जिला बन जाएगा। एकमात्र सदर तहसील ही आईएसओ प्रमाणित है। अकोला ब्लॉक में वर्तमान में 38 ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन तहसील बनने से इसका दायरा 70 से अधिक गांवों में फैल जाएगा। करीब 1.50 लाख से अधिक आबादी को फायदा होगा। तहसील स्तर पर सुनवाई के लिए उपजिलाधिकारी (एसडीएम) से लेकर खसरा-खतौनी, भूमि व राजस्व विवादों के लिए अकोला क्षेत्र के लोगों को 20 किलोमीटर दूर शहर में नहीं आना पड़ेगा।
टिकैत ने भी रखा था प्रस्ताव
अकोला तहसील बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष केदार सिंह चाहर ने बताया कि अकोला को तहसील का दर्जा दिलाने के लिए किसानों को लंबा संघर्ष करना पड़ रहा है। यह उनके संघर्ष की जीत है कि शुक्रवार को होने वाली बैठक में संघर्ष समिति के सदस्य भी शामिल होंगे। 2008 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत जब अकोला के चाहरवाटी इंटर कॉलेज में सभा करने आए थे, तब भी उन्होंने अकोला को तहसील बनाने का प्रस्ताव रखा था।
2007 में चूक गए मौका
अकोला को तहसील बनाने का एक मौका 2007 में मिला था। तब तत्कालीन ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने मथुरा में महावन को तहसील का दर्जा दिलाया था। उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय फतेहपुर सीकरी से सांसद थीं। तब भी शासन स्तर से अकोला को तहसील बनाने की कवायद चली लेकिन कमजोर पैरवी के कारण तहसील नहीं बन पाई।