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च्यवन के आश्रम को ‘सरकारी औषधि’ की दरकार

Sun, 27 Jan 2019 11:51 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jan 2019 11:51 PM IST
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च्यवन के आश्रम को ‘सरकारी औषधि’ की  दरकार

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मैनपुरी। औंछा क्षेत्र में स्थित च्यवन ऋषि की तपोभूमि आज भी बदहाली का शिकार है। उनके आश्रम को अभी सरकारी औषधि की दरकार है।

औंछा क्षेत्र में आज भी कई पौराणिक महत्व वाले मंदिर और आश्रम हैं। औंछा क्षेत्र को पर्यटक स्थल बनाने के दावे हवाई साबित हुए हैं। च्यवन ऋषि आश्रम और अजोम कुंड को अच्छे दिन का इंतजार है।


औंछा के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर लाने के वादे हवाई ही साबित हुए हैं। पौराणिक इमारतों को पुरातत्व विभाग का संरक्षण तक नहीं मिल सका है। पौराणिक स्थलों को संरक्षित करके पर्यटन स्थल बनाने की मांग हर बार कागजों में कैद होकर रह गई है।
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पौराणिक महत्व की इमारतों और स्थलों का सही तरीके से रखरखाव नहीं हो पा रहा है। औंछा क्षेत्र के यह स्थल इतिहास की याद दिलाते हैं लेकिन उनको पर्यटन के नक्शे पर आज तक जगह नहीं मिल सकी है।
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राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में पर्यटन मंत्री रहे अशोक यादव की औंछा क्षेत्र को पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा भी हवाई ही साबित हुई है। पांच साल पहले आगरा पुरातत्व विभाग की टीम की सर्वे के बाद पौराणिक स्थलों को संरक्षित किए जाने संस्तुति शासन में आज तक विचाराधीन है।

औंछा क्षेत्र ऋषि मुनियों की तपोस्थली रहा है। आश्रम को च्यवन ऋषि की तपोस्थली कहा जाता है। मान्यता है इसी स्थान पर च्यवन ऋषि ने तपस्या की थी। आश्रम परिसर में एक नहीं कई स्थानों पर प्राचीनकाल के अवशेष मिलते हैं। पौराणिक महत्व होने के बाद ही आश्रम बदहाल है।

च्यवन ऋषि आश्रम के पीछे एक विशाल तालाब है। तालाब को अजोम कुंड कहा जाता है। मान्यता है अजोम कुंड में स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। कहते हैं च्यवन ऋषि के तपस्या करने से पूर्व अजोम कुंड में स्नान किया था। आज अजोम कुंड में चारों ओर गंदगी का आलम है।

ऋषि मुनियों की तपोभूमि रहे औंछा क्षेत्र में पुराने टीले, प्राचीन मंदिर, आश्रमों का पौराणिक महत्व इतिहास में मिलता है। औंछा क्षेत्र में खुदाई केे दौरान आए दिन खंडित प्रतिमाएं निकलती हैं। लोगों के मकानों के दरवाजों पर यह प्रतिमाएं नजर आती हैं।


मैनपुरी जिले का पौराणिक इतिहास है। कई पौराणिक स्थल इसकी गवाही देते हैं। औंछा क्षेत्र में तमाम पौराणिक स्थलों को संरक्षण की जरूरत है। संरक्षण से ही पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। -शिवजी श्रीवास्तव, साहित्यकार
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