फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mainpuri News ›   शिकार के भय से शरद ऋतु में भी विदेशी मेहमान नहीं कर रहे प्रवास

शिकार के भय से शरद ऋतु में भी विदेशी मेहमान नहीं कर रहे प्रवास

Sun, 20 Jan 2019 07:26 PM IST
SonamA SonamA SonamA SonamA
Updated Sun, 20 Jan 2019 07:26 PM IST
विज्ञापन
शिकार के भय से शरद ऋतु में भी विदेशी मेहमान नहीं कर रहे प्रवास
ओखला पक्षी विहार - फोटो : अमर उजाला डेमाे
मैनपुरी-कटरा समान। समान पक्षी विहार में आज तक पर्यटन को पंख नहीं लग सके हैं। यहां देसी और विदेशी पक्षियों का खुलेआम शिकार हो रहा है। वहीं, जलकुंभी के कारण झील की आब-ओ-हवा भी बदल गई है। इससे विदेशी मेहमान पक्षी यहां से नाता तोड़ रहे हैं। समान पक्षी विहार शरद ऋतु में देसी विदेशी पक्षियों का प्रवास स्थल है। यहां प्रतिवर्ष दुर्लभ प्रजाति के मेहमान पक्षी आते हैं। इसको देखते हुए सपा सरकार में इसे पर्यटन के रूप में विकसित करने की कवायद की गई।
विज्ञापन


समान पक्षी विहार को विकसित करने और सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि खर्च की गई। बावजूद इसके यह क्षेत्र पर्यटन के रूप में विकसित नहीं हो सका। बात झील की करें तो वर्तमान में पूरी झील जलकुंभी से पटी पड़ी है। इलाके में शिकारी सक्रिय हैं। आए दिन पक्षियों के शिकार के कारण विदेशी पक्षी यहां प्रवास के लिए नहीं आते हैं। यहां की बदहाली के चलते यहां सैलानियों का भी मोहभंग हो रहा है।
विज्ञापन


ये पक्षी नजर आते थे यहां
समान झील वर्षों से प्रवासी पक्षियों की पसंदीदा शरणस्थली रही है। सर्दी शुरू होने के साथ ही नवंबर से प्रवासी पक्षी आने शुरू हो जाते थे। इनमें साइबेरियन क्रेन, गीज, टील, पिनटेल, ब्रह्मनी डक, मलार्ड, पोचर्ड, पेलिकन, गैडवाल जैसे प्रवासी पक्षी हजारों की संख्या में शामिल होते थे। इस वर्ष यह पक्षी नजर नहीं आ रहे हैं। इसी तरह स्थानीय पक्षियों में ओपन बिल्ड स्टॉर्क, व्हाइट आइबिस, डार्टर, कारमोरेंट, सारस क्रेन, पेंटेड स्टार्क, पाइड किंग फिशर, परवल, वाटर हेन प्रवास करते थे। इस वर्ष देसी पक्षी भी जलकुंभी की वजह से नजर नहीं आ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन देशों से आते थे पक्षी
जानकारों का कहना है कि वर्षों पहले तिब्बत, साइबेरिया, मध्य एशिया, यूरोप, चीन हिमालय की ऊंची चोटी से दुर्लभ प्रजाति के पक्षी यहां आते थे। अब यहां पक्षी नजर नहीं आते हैं।

जलकुंभी की आड़ में मारी जा रहीं मछली
झील से जलकुंभी की सफाई के बहाने यहां मछली मारी जा रही हैं। जलकुंभी निकाल रहे मजदूर बताते हैं कि रात में मछली और पक्षियों को मारने के लिए जाल लगा दिया जाता है। सुबह चार बजे जाल को हटाया जाता है।


ईको पार्क भी बन गया है मयखाना
समाज पक्षी विहार में बनाया गया ईको पार्क भी बदहाल हो गया है। अराजकतत्वों की गतिविधियां बढ़ने से यहां झूले टूटकर गायब हो चुके हैं। जगह-जगह शराब की बोतलें और बीयर की खाली केन पड़ी नजर आती हैं। देसी बबूल उगने से पार्क की सुंदरता चली गई है।

जलकुंभी निकालने के लिए इस बार बजट नहीं मिला है। पक्षियों और मछलियों के शिकार की जानकारी नहीं । ईको पार्क में व्यवस्थाओं को ठीक कराया जाएगा।
-गिरिजेश कुमार, रेंजर समान पक्षी विहार
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed