{"_id":"5b4a08044f1c1b42748b4944","slug":"201531578372-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चेक के रूप में चलती थी महिला कारोबारी की करेंसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चेक के रूप में चलती थी महिला कारोबारी की करेंसी
Updated Sat, 14 Jul 2018 11:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिरोजाबाद। चूड़ी, कांच और केमिकल के कार्य में महिला कारोबारी की पर्ची और चेक के रूप में अपनी मुद्रा चलती थी। महिला कारोबारी के जरिए हवाला के रूप में भी करोड़ों का लेनदेन होता था। बीसी, सिक्सा, कार्ड, हवाला के रूप में करीब सौ करोड़ रुपये के लेनदेन का मामला है। इनमें से बडे़ कारोबारियों का हिसाब फ्लैट आदि देकर किया गया है। अब भी 50 करोड़ से अधिक की देनदारी उन पर है।
एक दशक पहले तक फिरोजाबाद में ड्राफ्ट का कारोबार बड़े पैमाने पर होता था। बाहर से व्यापारी कैश न लाकर ड्राफ्ट के रूप में रकम लाते और यह ड्राफ्ट बैंक में नहीं ड्राफ्ट का कारोबार करने वालों के यहां कैश होता था। एक हजार रुपये के ड्राफ्ट पर सौ या 150 रुपये कमीशन काट कर ड्राफ्ट का काम करने वाले पैसा देते थे। तब भी महिला कारोबारी का ड्राफ्ट का सबसे बड़ा काम था। बैंकों की साठगांठ से चल रहे इस अवैध कारोबार का आयकर विभाग ने संज्ञान लिया तब ड्राफ्ट के काले कारोबार पर अंकुश लगा।
इसके बाद शुरू हुआ हवाला के जरिए रकम के आदानप्रदान का काम। महिला कारोबारी का नेटवर्क यूपी के साथ-साथ महाराष्ट्र, गुजरात, जयपुर और दक्षिण प्रांत के शहरों तक फैला था। शहर के सैकड़ों कारोबारियों से एकत्रित किया पैसा महिला कारोबारी ने रीयल एस्टेट में लगा रखा था। रीयल एस्टेट में मंदी होने के बाद महिला कारोबारी का करोड़ों रुपया फंस गया था। जिन लोगों का पैसा फंसा वह लोग लगातार तकाजा कर रहे थे।
विज्ञापन
महिला कारोबारी पर जिन लोगों का लाखों करोड़ों रुपया फंसा था उनमें से कई लोगों ने मिलकर भाभी पीड़ित मोर्चा बना लिया था। गत वर्ष अक्तूबर में महिला कारोबारी मंजू गर्ग और उनके पति प्रदीप गर्ग दीपावली से पहले रातों-रात गायब हो गए थे। चूंकि दीपावली पर सभी को पेमेंट करने के लिए पैसा चाहिए था, इसलिए लोग गर्ग के घर के चक्कर लगाने लगे लेकिन वह नहीं मिले। मामला पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों तक पहुंचा।
पीड़ितों ने भाभी पीड़ित मोर्चा के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बना लिया था। इस पर गर्ग दंपती से जुड़ी बातों को शेयर किया जाता था। दबाव बना तो कुछ महीने पूर्व कुछ बडे़ कारोबारियों का फैसला पचास प्रतिशत धनराशि देकर कर दिया गया। कुछ लोगों को अधूरे बने फ्लैट दे दिए गए। इस तरह जिसकों जो मिला उसने ले लिया, लेकिन गर्ग दंपती के ठगी में जाल में फंसे लोग इस कोशिश में जुटे रहे कि किसी भी तरह दोनों पर शिकंजा कसा जाए।
महिला कारोबारी मंजू गर्ग उर्फ भाभी के शहर छोड़कर जाने की खबर सबसे पहले अमर उजाला ने ब्रेक की थी। 16 सितंबर 2017 को महिला कारोबारी के शहर छोड़कर जाने की खबर उड़ी थी। इसे अमर उजाला ने 17 सितंबर के अंक में प्रकाशित किया। 18 सितंबर के अंक में महिला कारोबारी के नंबर दो के पूरे कारोबार को उजागर किया था।
विज्ञापन
एक दशक पहले तक फिरोजाबाद में ड्राफ्ट का कारोबार बड़े पैमाने पर होता था। बाहर से व्यापारी कैश न लाकर ड्राफ्ट के रूप में रकम लाते और यह ड्राफ्ट बैंक में नहीं ड्राफ्ट का कारोबार करने वालों के यहां कैश होता था। एक हजार रुपये के ड्राफ्ट पर सौ या 150 रुपये कमीशन काट कर ड्राफ्ट का काम करने वाले पैसा देते थे। तब भी महिला कारोबारी का ड्राफ्ट का सबसे बड़ा काम था। बैंकों की साठगांठ से चल रहे इस अवैध कारोबार का आयकर विभाग ने संज्ञान लिया तब ड्राफ्ट के काले कारोबार पर अंकुश लगा।
विज्ञापन
इसके बाद शुरू हुआ हवाला के जरिए रकम के आदानप्रदान का काम। महिला कारोबारी का नेटवर्क यूपी के साथ-साथ महाराष्ट्र, गुजरात, जयपुर और दक्षिण प्रांत के शहरों तक फैला था। शहर के सैकड़ों कारोबारियों से एकत्रित किया पैसा महिला कारोबारी ने रीयल एस्टेट में लगा रखा था। रीयल एस्टेट में मंदी होने के बाद महिला कारोबारी का करोड़ों रुपया फंस गया था। जिन लोगों का पैसा फंसा वह लोग लगातार तकाजा कर रहे थे।
विज्ञापन
महिला कारोबारी पर जिन लोगों का लाखों करोड़ों रुपया फंसा था उनमें से कई लोगों ने मिलकर भाभी पीड़ित मोर्चा बना लिया था। गत वर्ष अक्तूबर में महिला कारोबारी मंजू गर्ग और उनके पति प्रदीप गर्ग दीपावली से पहले रातों-रात गायब हो गए थे। चूंकि दीपावली पर सभी को पेमेंट करने के लिए पैसा चाहिए था, इसलिए लोग गर्ग के घर के चक्कर लगाने लगे लेकिन वह नहीं मिले। मामला पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों तक पहुंचा।
पीड़ितों ने भाभी पीड़ित मोर्चा के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बना लिया था। इस पर गर्ग दंपती से जुड़ी बातों को शेयर किया जाता था। दबाव बना तो कुछ महीने पूर्व कुछ बडे़ कारोबारियों का फैसला पचास प्रतिशत धनराशि देकर कर दिया गया। कुछ लोगों को अधूरे बने फ्लैट दे दिए गए। इस तरह जिसकों जो मिला उसने ले लिया, लेकिन गर्ग दंपती के ठगी में जाल में फंसे लोग इस कोशिश में जुटे रहे कि किसी भी तरह दोनों पर शिकंजा कसा जाए।
महिला कारोबारी मंजू गर्ग उर्फ भाभी के शहर छोड़कर जाने की खबर सबसे पहले अमर उजाला ने ब्रेक की थी। 16 सितंबर 2017 को महिला कारोबारी के शहर छोड़कर जाने की खबर उड़ी थी। इसे अमर उजाला ने 17 सितंबर के अंक में प्रकाशित किया। 18 सितंबर के अंक में महिला कारोबारी के नंबर दो के पूरे कारोबार को उजागर किया था।