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जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
Updated Tue, 21 Nov 2017 10:47 PM IST
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अस्पताल में भीड़
- फोटो : amar ujala
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मैनपुरी। जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण उन्हें इलाज के लिए भटकना पड़ता है। जिला अस्पताल में सृजित पद 26 के सापेक्ष मात्र 11 डॉक्टरों की ही तैनाती है।
जनपदभर के गंभीर मरीजों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा जाता है, लेकिन यहां भी डॉक्टरों की कमी चल रही है। जिसके चलते मरीजों को परेशान होना पड़ता है। जिला अस्पताल में 26 डॉक्टरों के पद सृजित हैं।
इनमें रेडियोलॉजिस्ट, पेथोलॉजिस्ट व कार्डियोलॉजिस्ट आदि 15 पद खाली पड़े हैं। कुल 11 डॉक्टरों से ही अस्पताल का काम चलाया जा रहा है। जबकि इस समय रोजाना ओपीडी में औसतन 1100 से 1300 मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं अस्पताल में तैनात चिकित्सकों में तीन डॉक्टर इमर्जेंसी, दो डॉक्टर कोर्ट के कार्य तथा एक डॉक्टर पोस्टमार्टम की ड्यूटी करता है।
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मात्र पांच डॉक्टर ही ओपीडी में आने वाले मरीजों को उपचार दे रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों को भी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि विभागीय अधिकारियों ने कोई पहल नहीं की। पिछले पांच वर्ष में कई बार विभागीय उच्चाधिकारियों तथा शासन को पत्र भेजे गए, लेकिन डॉक्टरों की तैनाती नहीं की जा सकी।
जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के न होने के कारण सीटी स्कैन और अल्ट्रा साउंड मशीन बंद पड़ी हैं। मरीजों को मजबूरी में बाहर से अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन कराना पड़ रहा है। जिसके लिए उन्हें 700 से 1000 रुपये भी खर्च करने पड़ रहे हैं।
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जनपदभर के गंभीर मरीजों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा जाता है, लेकिन यहां भी डॉक्टरों की कमी चल रही है। जिसके चलते मरीजों को परेशान होना पड़ता है। जिला अस्पताल में 26 डॉक्टरों के पद सृजित हैं।
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इनमें रेडियोलॉजिस्ट, पेथोलॉजिस्ट व कार्डियोलॉजिस्ट आदि 15 पद खाली पड़े हैं। कुल 11 डॉक्टरों से ही अस्पताल का काम चलाया जा रहा है। जबकि इस समय रोजाना ओपीडी में औसतन 1100 से 1300 मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं अस्पताल में तैनात चिकित्सकों में तीन डॉक्टर इमर्जेंसी, दो डॉक्टर कोर्ट के कार्य तथा एक डॉक्टर पोस्टमार्टम की ड्यूटी करता है।
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मात्र पांच डॉक्टर ही ओपीडी में आने वाले मरीजों को उपचार दे रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों को भी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि विभागीय अधिकारियों ने कोई पहल नहीं की। पिछले पांच वर्ष में कई बार विभागीय उच्चाधिकारियों तथा शासन को पत्र भेजे गए, लेकिन डॉक्टरों की तैनाती नहीं की जा सकी।
जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के न होने के कारण सीटी स्कैन और अल्ट्रा साउंड मशीन बंद पड़ी हैं। मरीजों को मजबूरी में बाहर से अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन कराना पड़ रहा है। जिसके लिए उन्हें 700 से 1000 रुपये भी खर्च करने पड़ रहे हैं।