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अपात्रों के नाम पर कर दिए पट्टे, तहसील में हंगामा
Updated Thu, 02 Nov 2017 12:14 AM IST
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फिरोजाबाद। ग्राम पंचायत बसई मोहम्मदपुर के दर्जनों ग्रामीण बुधवार सुबह ट्रैक्टर में भरकर सदर तहसील पहुंचे। अपात्रों को जमीन के पट्टे देने से आक्रोशित ग्रामीणों ने लेखपाल और राजस्व निरीक्षक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई की मांग की।
सदर तहसील के अंतर्गत ग्राम बसई मोहम्मदपुर में कृषि पट्टों का आवंटन हुआ था। पट्टा आवंटन में लेखपाल और राजस्व निरीक्षक द्घारा मनमानी की गई। इससे ग्रामीणों में खासा आक्रोश था। बुधवार को लामबंद ग्रामीण सदर तहसील पहुंचे। वहां लेखपाल और राजस्व निरीक्षक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीण सुभाष बघेल का कहना था कि ग्राम पंचायत बसई मोहम्मदपुर में बिना बैठक व एजेंडा के ग्राम प्रधान मानदेवी ने सदस्यों को धोखा देकर कर कार्रवाई रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराए।
आरोप है कि लेखपाल सचिन सिंह चौहान और राजस्व निरीक्षक श्याम कुमार उपाध्याय ने लाखों रुपया रिश्वत लेकर अपात्रों के नाम जमीन के पट्टे आवंटित कर दिए हैं। जबकि गांव में करीब 50 अनुसूचित जाति के भूमिहीन गरीब पात्र हैं। विधवा ओर निर्धन ऐसे भूमिहीन हैं। जिनके पास एक इंच जमीन नहीं है। वे पिछड़ी जाति के हैं, लेकिन उनके पास आवंटन के बदले पैसा देने के लिए नहीं है।
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ग्रामीणों का कहना था कि उक्त मामले की जांच तत्कालीन एसडीएम चंद्रभानु सिंह द्वारा की गई। जबकि उन्होेंने ही पट्टों का आवंटन किया था। चहेते व्यक्तियों को खड़ा कर फर्जी सीडी तैयार कराई गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि एसडीएम ने धमकी दी थी कि शिकायत करने से बाज नहीं आए तो सभी को जेल भेज देंगे। ग्रामीणों ने प्रकरण की उच्च अधिकारियों से जांच करा कर पट्टे निरस्त करने की मांग की है।
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सदर तहसील के अंतर्गत ग्राम बसई मोहम्मदपुर में कृषि पट्टों का आवंटन हुआ था। पट्टा आवंटन में लेखपाल और राजस्व निरीक्षक द्घारा मनमानी की गई। इससे ग्रामीणों में खासा आक्रोश था। बुधवार को लामबंद ग्रामीण सदर तहसील पहुंचे। वहां लेखपाल और राजस्व निरीक्षक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीण सुभाष बघेल का कहना था कि ग्राम पंचायत बसई मोहम्मदपुर में बिना बैठक व एजेंडा के ग्राम प्रधान मानदेवी ने सदस्यों को धोखा देकर कर कार्रवाई रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराए।
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आरोप है कि लेखपाल सचिन सिंह चौहान और राजस्व निरीक्षक श्याम कुमार उपाध्याय ने लाखों रुपया रिश्वत लेकर अपात्रों के नाम जमीन के पट्टे आवंटित कर दिए हैं। जबकि गांव में करीब 50 अनुसूचित जाति के भूमिहीन गरीब पात्र हैं। विधवा ओर निर्धन ऐसे भूमिहीन हैं। जिनके पास एक इंच जमीन नहीं है। वे पिछड़ी जाति के हैं, लेकिन उनके पास आवंटन के बदले पैसा देने के लिए नहीं है।
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ग्रामीणों का कहना था कि उक्त मामले की जांच तत्कालीन एसडीएम चंद्रभानु सिंह द्वारा की गई। जबकि उन्होेंने ही पट्टों का आवंटन किया था। चहेते व्यक्तियों को खड़ा कर फर्जी सीडी तैयार कराई गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि एसडीएम ने धमकी दी थी कि शिकायत करने से बाज नहीं आए तो सभी को जेल भेज देंगे। ग्रामीणों ने प्रकरण की उच्च अधिकारियों से जांच करा कर पट्टे निरस्त करने की मांग की है।