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अब गजल नहीं सजल की करेंगे रचना

Wed, 06 Sep 2017 12:19 AM IST
Updated Wed, 06 Sep 2017 12:19 AM IST
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अब गजल नहीं सजल की करेंगे  रचना
demo - फोटो : demo
मथुरा। रसखान की नगरी से नए साहित्यिक आंदोलन की शुरुआत हुई है। हिंदी के कवियों ने उर्दू के व्याकरण के बहिष्कार की बात कही है। वहीं गजल के स्थान पर सजल रचनाओं को लिखने पर भी आमराय बनी। इस समारोह में हिंदी काव्य जगत के बडे़े कवि गोपाल दास नीरज का सम्मान भी किया गया।
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हिंदी सजल सर्जना समिति के बैनर तले एक होटल में आयोजित सजल महोत्सव दो सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र में हिंदी काव्य के बड़े कवि और मेरा नाम जोकर फिल्म के गीत ए भाई जरा देख के चलो.. सहित राजकपूर, देवानंद की कई फिल्मों में अपने गीतों से चार चांद लगाने वाले कवि पदमश्री गोपालदास ‘नीरज’ का सम्मान किया गया। इस दौरान उपस्थितों ने उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
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दूसरे सत्र में कवियों के अधिवेशन में एक अनूठे आंदोलन की घोषणा की गई। इसमें अब गजल के स्थान पर सजल की रचना करने की बात कही। तय हुआ कि अपनी कविताओं में उर्दू के व्याकरण से परहेज किया जाएगा। अध्यक्षता करते हुए हरिवंश चतुर्वेदी ने ब्रज हिंदी अकादमी के स्थापना की मांग की। इस अधिवेशन में छह हिंदी भाषी राज्यों के करीब 50 कवियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया।
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इस अवसर पर केएम हिंदी संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप श्रीधर, डॉ.चंद्रभाल सुकुमार, डॉ. अशोक बंसल, डॉ. अनिल गहलौत, संतोष सिंह आदि थे।
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