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2000 असली अभ्यर्थियों की मार्कशीट भी नकली

अमर उजाला आगरा Updated Mon, 27 Jun 2016 01:52 AM IST
काली सूची में शामिल 17 कालेज भी बने सेंटर
काली सूची में शामिल 17 कालेज भी बने सेंटर - फोटो : अमर उजाला
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एसआईटी ने बीएड 2004 सत्र में पकड़ा बड़ा गड़बड़झाला
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9000
मार्कशीट जारी की गई थी 2004 में
5000
अभ्यर्थियों को ही मिला था दाखिला
4000
मार्कशीट फर्जी पाई गईं जांच में
2000
अभ्यर्थियों की मार्कशीट में अंक बढ़ाए गए

फर्जी मार्कशीट प्रकरण में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। यह तो पहले ही साफ हो चुका है कि बीएड के 2004 के सत्र में चार हजार फर्जी मार्कशीट बेची गईं। अब खुलासा यह हुआ है कि असली अभ्यर्थियों में से भी 2000 को फर्जी मार्कशीट दी गई। दरअसल, कापियां जांचने के बाद इन्हें जो अंक दिए गए थे, बाद में उनमें 15 से 25 फीसदी तक बढ़ा दिए। ऐसी मार्कशीट को एसआईटी ने फर्जी माना है। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
एसआईटी बीएड सत्र 2004 से 2009 तक की जांच कर रही है। इस दौरान करीब 25 हजार फर्जी मार्कशीट बेची गई हैं। जांच की जद में विवि कर्मचारियों और अधिकारियों के अलावा 83 निजी कालेज हैं। फिलहाल जांच का फोकस 2004 के सत्र पर है। पिछले दिनों यूनिवर्सिटी में छह दिन सर्च आपरेशन चलाकर एसआईटी इसके तमाम रिकार्ड अपने साथ लखनऊ ले गई थी।
केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि 2004 सत्र में यूनिवर्सिटी को कुल सीटें 5000 आवंटित थीं, जबकि मार्कशीट 9000 जारी की गईं। निजी कालेजों के साथ मिलकर यह खेल हुआ। जिन अभ्यर्थियों ने दाखिला नहीं लिया, परीक्षा नहीं दी, उन्हें भी मार्कशीट जारी की गई।
दूसरा, जिन अभ्यर्थियों का दाखिला था और उन्होंने परीक्षा भी दी, उनमें से 2000 ऐसे निकले हैं, जिनके अंक बढ़ाए गए। कापियां जंचने के बाद तैयार की गई फाइल और मार्कशीट के अध्ययन से अंतर साफ नजर आता है। एसआईटी ने रिकार्ड फॉइल, टेबुलेशन चार्ट, गोपनीय चार्ट और मार्कशीट सभी का अध्ययन किया है। यह बात भी सामने आ चुकी है कि फर्जी मार्कशीट के जरिए सैकड़ों लोग सरकारी नौकरी कर रहे हैं।

निरस्त हो सकता है 2004 का सत्र
बीएड के 2004 सत्र की जांच रिपोर्ट नौ अगस्त को हाईकोर्ट के सामने रखी जाएगी। इस मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में ही चल रही है। एसआईटी अधिकारियों की मीटिंग में तय किया गया है कि हाईकोर्ट से इस पूरे सत्र को निरस्त कराने की दरखास्त की जाएगी। इसके लिए इसी तरह के बिहार और मध्य प्रदेश के मामले रखे जाएंगे।

लिपिक की तलाश में दबिश
एसआईटी के अधिकारी रविवार को भी शहर में रहे। फर्जी मार्कशीट प्रकरण में फरार चल रहे विवि लिपिक शैलेंद्र गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए कई जगह दबिश दी गई। उसने सरेंडर के लिए लखनऊ स्थित सीबीआई कोर्ट में अर्जी दी थी लेकिन अभी तक समर्पण नहीं किया है। बता दें इस मामले में दो लिपिक जेल जा चुके हैं।
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