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20 अभ्यर्थियों की हालत बिगड़ी

Fri, 08 Apr 2016 12:57 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Fri, 08 Apr 2016 12:57 AM IST
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20 candidates bad condition in police bharti
पुल‌िस भ्‍ारती दाौड़ - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो

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तेज दौड़ने के चक्कर में 20 अभ्यर्थियों की हालत बिगड़ गई। इन्हें ट्रैक के पास बने चिकित्सा कैंप में ले जाया गया। इनमें से तीन की हालत गंभीर रही। आठ अभ्यर्थी बेहोश हो गईं थी, इनमें से दो को स्ट्रेचर से बाहर ले जाया गया। इसके बाद एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया। इनके अलावा एक के पैर में मोच आ गई थी। उसे व्हील चेयर से भेजा गया। भर्ती से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह हाथरस की खुश्बू है। ट्रैक के पास ही डाक्टरों की टीम तैनात की गई थी। तीन एंबुलेंस लगाई गई थी। तीन के अलावा बाकी को चक्कर आए थे। वे थोड़ी देर आराम करने के बाद चली गई।
सिपाही की भर्ती में मेले सा नजारा
सुबह छह बजते ही अभ्यर्थी पुलिस लाइन के बाहर पहुंच गए। उनके साथ अभिभावक भी आए। नजारा मेले सा हो गया। कई लोग अपनी बेटियों को दौड़ते हुए देखने के लिए पेड़ पर चढ़ गए। बैरियर पर भारी भीड़ जमा हो गई। इसे हटाने में पुलिस के पसीने छूट गए। थोड़ी दूरी पर ठेल लग गईं। ऑटो का स्टैंड बन गया। मूंगफली और केले वाले आ गए। पानी के पाउच भी खूब बिके। दौड़ के लिए ज्यादातर अभ्यर्थी खाली पेट पहुंची। कुछ ने जूस पिया। पुलिस लाइन रोड पर दुकानें भी जल्दी खुल गई थी। हालांकि भर्ती स्थल के आसपास पुलिस ने किसी को नहीं आने दिया, लेकिन थोड़ी दूरी पर बाजार में भीड़ लगी थी। इसके चलते भर्ती के दौरान पुलिस लाइन रोड जाम रही। इसके बाद जब अभ्यर्थी निकले तो एमजी रोड जाम हो गई। अभ्यर्थी 690 पहुंची थीं लेकिन इनके साथ लगभग 1500 अभिभावक आए थे।
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मैं मम्मी-डैडी का सपना पूरा करना चाहती हूं
 एक तो मैं अपने मम्मी -डैडी का सपना पूरा करना चाहती हूं। दूसरा, मैं अपराधियों को सबक सिखाना चाहती हूं। तीसरा, बचपन से मेरा सपना ऐसी जॉब करने का है, जिससे देश सेवा हो सके। यह जज्बा है उन अभ्यर्थियों का जो सिपाही बनने के लिए दौड़ लगाने के  लिए आईं। मथुरा की प्राची ने कहा, हमारे घर में पुलिस में कोई नहीं है, मैं बचपन से खाकी वर्दी पहनने का सपना देख रही हूं। मथुरा के छाता के पसौली गांव की सावित्री का कहना था, दो महीनों से दौड़ का अभ्यास कर रही थी। आगरा के बिचपुरी की साक्षी और हाथरस की नीलम और सोनिया का कहना था, हम साबित करना चाहती हैं लड़कियां किसी भी मामले में लड़कों से कम नहीं है।
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बादाम खाती रहीं - चक्कर गिनती रहीं
 400 मीटर का ट्रैक था। दौड़ लगानी थी 2.4 किलोमीटर है। मतलब ट्रैक के छह चक्कर लगाने थे। अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ी टेंशन चक्कर की गिनती करना रहा। इसलिए अभ्यर्थियों ने तीन तरीके अपनाए। अकबरा (सिकंदरा) की गौरी ने बताया कि उसने हाथ में छह कंकड़ रखे थे। हरचक्कर पर एक कंकड़ फेंकती रही। शेव का नंगला (हाथरस) की भावना ने बताया कि उसने छह बादाम रखे थे। हर चक्कर पर एक बादाम मुंह में डालती रही। ट्रैक के बाहर खड़े अभ्यर्थियों के अभिभावक भी चक्कर गिनते रहे। कई ने बेटी का नाम लेकर इस तरह बोला, चार चक्कर, पांच चक्कर, अब लास्ट है।
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