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सुख-दुख तो दूर सुध लेने तक न आए सांसद:

Sat, 02 Jun 2018 11:01 PM IST
Updated Sat, 02 Jun 2018 11:01 PM IST
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सुख-दुख तो दूर सुध लेने तक न आए सांसद:
सुख-दुख तो दूर सुध लेने तक न आए सांसद: - फोटो : अमर उजाला
एटा/मिरहची। मैं गांव में विकास की गंगा बहा दूंगा, गांव के हर घर में शौचालय होगा, बिजली होगी, चूल्हे नहीं जलेंगे। गांव को सांसद आदर्श गांव में शामिल करने के बाद गांव सूरतपुरमाफी की सूरत बदल जाएगी। मैं समय-समय पर गांव का हाल जानने आऊंगा। ये वो बातें हैं जो 18 अगस्त 2017 को सांसद राजवीर सिंह ने ग्रामीणों को बताकर मन में उम्मीदें जगाई थीं, मगर कुछ भी नहीं हुआ। न तो फिर सांसद आए और योजनाएं, विकास की बातें बस बातें बनकर रह गईं। ग्रामीणों का सुख-दुख तो छोड़िए, सांसद ने तो गांव की ओर मुड़कर ही नहीं देखा। इसे लेकर ग्रामीणों में रोष है। पेश है रिपोर्ट...
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18 अगस्त को गोद लिया था गांव
मिरहची ब्लॉक के गांव सूरतपुरमाफी को सांसद राजवीर सिंह ने 18 अगस्त 2017 को गोद लिया था। इस दौरान विधायक और बड़ी संख्या में भाजपा नेताओं और पूरे जिला प्रशासन की मौजूदगी में विकास के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। मगर 11 महीने में सांसद एक बार भी गांव में नहीं पहुंचे।
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10 लाख रुपये से होने थे विकास कार्य
गांव को गोद लेने के दौरान सांसद राजवीर सिंह ने गांव में पंचायत भवन का निर्माण कराने, सांसद निधि से 10 लाइटें, 10 हैंडपंप, दस लाख रुपये से गांव में विकास कार्य कराने के लिए कहा था, मगर सारी बातें महज कोरी औपचारिकता साबित हुईं।
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सुख-दुख में भी नहीं दिखी सूरत
गांव में विकास और समस्याओं को दूर रखकर बात करें, तो ग्रामीणों के सुख-दु:ख में सांसद राजवीर सिंह ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। गांव के मुनेश कुमार कहते हैं कि गांव में 11 महीने में तमाम सुख-दु:ख के काम हुए, सांसद को किसी भी ग्रामीण की सुध लेने की फुरसत नहीं मिली।

अधिकारियों ने भी मोड़ लिया मुंह
सांसद के गांव गोद लेेने के दौरान हुए कार्यक्रम में डीएम अमित किशोर ने सभी अधिकारियों को 10 दिन में गांव के विकास से संबंधित कार्य योजना देने के निर्देश दिए थे, लेकिन 11 महीने में भी कार्य योजना नहीं बन सकी। अधिकारी ही नहीं खुद डीएम अमित किशोर ने भी गांव की ओर मुड़कर नहीं देखा और न ही कोई सुध ली।

विधायक ने निभाई जिम्मेदारी
गांव को गोद लेने के बाद सांसद बेशक गांव नहीं पहुंचे हों, लेकिन विधायक ने जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। मारहरा से विधायक वीरेंद्र लोधी ने तीन बार गांव का दौरा किया। हालांकि गांव की समस्याओं को दूर करने में वो भी नाकाम रहे, लेकिन गांव का समय-समय पर हाल जानने पहुंचे। इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख ने गांव से दूरी बनाए रखी। ग्रामीण जुगेंद्र कहते हैं कि 18 अगस्त 2017 के बाद विधायक को छोड़कर कोई भी अधिकारी और नेता गांव में नहीं आया। इस उपेक्षा का जबाव चुनाव में मिलेगा।


मारहरा विधायक वीरेन्द्र सिंह लोधी मेरे प्रतिनिधि के रुप में कार्य को देख रहे हैं। गांव का पूरी तरह से विकास कराया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साथ मैं खुद गांव पहुंचकर समस्याओं का निस्तारण कराने का काम करुंगा।
राजवीर सिंह, सांसद
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