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औद्योगिक विकास पर नहीं है प्रशासन का ध्यान
Updated Sat, 24 Feb 2018 11:16 PM IST
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कासगंज।
शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण औद्योगिक विकास में जिला काफी पीछे है। इसका परिणाम है कि जिले के तमाम हुनरबंद कामगार बाहरी प्रांतों में पलायन करने को मजबूर हैं। सुविधा और संसाधनों के अभाव में पिछले दो दशकों में तमाम लघु उद्योग बंद हो चुके हैं जिसके कारण औद्योगिक विकास रुक गया और लोग रोजी रोटी के लिए परेशान होने लगे।
यहां के औद्योगिक आस्थान की स्थापना तीन दशक पहले हुई। इसमें 48 भूखंड उद्यमियों को उद्योगों की स्थापना के लिए दिए गए। प्रारंभिक दौर में उद्यमियों ने यहां पॉवर लूम, पेंट, कालीन, टीन सहित अन्य उद्योगों को स्थापित किया। काफी संख्या में लोगों को रोजगार मिल रहा था, लेकिन डेढ़ दशक पहले से ज्यादातर स्थापित उद्योग दम तोड़ गए। इन उद्योगों को जीवित रखने के लिए शासन ने कोई कदम नहीं उठाए। बिजली, यातायात व अन्य समस्याओं से औद्योगिक विकास ठप होता चला गया। औद्योगिक आस्थान के बाहर भी औद्योगिक विकास नहीं हुआ। वर्ष 2004 में केवल एक बड़ी फैक्ट्री के रूप में 8 लाख लीटर दूध की खपत करने वाली नोवा डेयरी स्थापित हुई। इस तरह की कोई दूसरी यूनिट भी जिले में नहीं लग पाई। यहां के उद्यमी औद्योगिक सुविधाओं को देखते हुए उत्तराखंड में उद्योगों की स्थापना के लिए पलायन कर गए। यदि उद्योगों के विकास के लिए उद्यमियों को सुविधाएं मिलतीं तो शायद ये उद्योग जिले में ही स्थापित होते। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ते और जिले में विकास तेजी से होता।
यूपी समिट से इस जिले के उद्यमी भी उत्साहित हैं। कुछ उद्यमियों ने इस समिट में हिस्सा भी लिया, लेकिन उनके प्रोजेक्ट नए नहीं थे। नए प्रोजेक्ट के लिए अभी भी औद्योगिक कार्य योजना का अभाव नजर आ रहा है। जिले के गंजडुंडवारा कस्बे में भी पॉवर लूम के कई कारखाने हैं, लेकिन बिजली आदि की समस्याओं से इन कारखानों का कामकाज प्रभावित है। तमाम बुनकर गंजडुंडवारा से रोजीरोटी की तलाश में बाहर पलायन कर चुके हैं।
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- उद्योग स्थापित करने में सबसे बड़ी परेशानी सरकारी विभागों की एनओसी और अनुज्ञा प्राप्त करने में लगती थी। अब सरकार किसी भी उद्योग के मामले में स्वयं उद्योग विभाग के माध्यम से प्रक्रियाएं पूरी कराएंगी। इसके अतिरिक्त कर और बैंक ब्याज में भी रिआयत मिलेंगी। उन्होंने कहा कि उद्योग की स्थापना करने में उद्यमी के साथ तमाम रिस्क रहतीं हैं ऐसे में सरकार की मदद मिलेगी तो लोग उद्योग की स्थापना के लिए आगे बढ़ेंगे। गोपाल माह्रेवरी, उद्योगपति
- जिले में औद्योगिक विकास के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्राथमिकता से उद्यमियों की समस्याओं का निस्तारण होगा। जिले से यूपी सम्मिट के लिए जो प्रस्ताव गए हैं। उन प्रस्तावों को प्रशासन पूरा कराने की हर संभव कोशिश करेगा। किसी तरह की अड़चन होगी तो उसे दूर कराया जाएगा। आरपी सिंह, जिलाधिकारी
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शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण औद्योगिक विकास में जिला काफी पीछे है। इसका परिणाम है कि जिले के तमाम हुनरबंद कामगार बाहरी प्रांतों में पलायन करने को मजबूर हैं। सुविधा और संसाधनों के अभाव में पिछले दो दशकों में तमाम लघु उद्योग बंद हो चुके हैं जिसके कारण औद्योगिक विकास रुक गया और लोग रोजी रोटी के लिए परेशान होने लगे।
यहां के औद्योगिक आस्थान की स्थापना तीन दशक पहले हुई। इसमें 48 भूखंड उद्यमियों को उद्योगों की स्थापना के लिए दिए गए। प्रारंभिक दौर में उद्यमियों ने यहां पॉवर लूम, पेंट, कालीन, टीन सहित अन्य उद्योगों को स्थापित किया। काफी संख्या में लोगों को रोजगार मिल रहा था, लेकिन डेढ़ दशक पहले से ज्यादातर स्थापित उद्योग दम तोड़ गए। इन उद्योगों को जीवित रखने के लिए शासन ने कोई कदम नहीं उठाए। बिजली, यातायात व अन्य समस्याओं से औद्योगिक विकास ठप होता चला गया। औद्योगिक आस्थान के बाहर भी औद्योगिक विकास नहीं हुआ। वर्ष 2004 में केवल एक बड़ी फैक्ट्री के रूप में 8 लाख लीटर दूध की खपत करने वाली नोवा डेयरी स्थापित हुई। इस तरह की कोई दूसरी यूनिट भी जिले में नहीं लग पाई। यहां के उद्यमी औद्योगिक सुविधाओं को देखते हुए उत्तराखंड में उद्योगों की स्थापना के लिए पलायन कर गए। यदि उद्योगों के विकास के लिए उद्यमियों को सुविधाएं मिलतीं तो शायद ये उद्योग जिले में ही स्थापित होते। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ते और जिले में विकास तेजी से होता।
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यूपी समिट से इस जिले के उद्यमी भी उत्साहित हैं। कुछ उद्यमियों ने इस समिट में हिस्सा भी लिया, लेकिन उनके प्रोजेक्ट नए नहीं थे। नए प्रोजेक्ट के लिए अभी भी औद्योगिक कार्य योजना का अभाव नजर आ रहा है। जिले के गंजडुंडवारा कस्बे में भी पॉवर लूम के कई कारखाने हैं, लेकिन बिजली आदि की समस्याओं से इन कारखानों का कामकाज प्रभावित है। तमाम बुनकर गंजडुंडवारा से रोजीरोटी की तलाश में बाहर पलायन कर चुके हैं।
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- उद्योग स्थापित करने में सबसे बड़ी परेशानी सरकारी विभागों की एनओसी और अनुज्ञा प्राप्त करने में लगती थी। अब सरकार किसी भी उद्योग के मामले में स्वयं उद्योग विभाग के माध्यम से प्रक्रियाएं पूरी कराएंगी। इसके अतिरिक्त कर और बैंक ब्याज में भी रिआयत मिलेंगी। उन्होंने कहा कि उद्योग की स्थापना करने में उद्यमी के साथ तमाम रिस्क रहतीं हैं ऐसे में सरकार की मदद मिलेगी तो लोग उद्योग की स्थापना के लिए आगे बढ़ेंगे। गोपाल माह्रेवरी, उद्योगपति
- जिले में औद्योगिक विकास के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्राथमिकता से उद्यमियों की समस्याओं का निस्तारण होगा। जिले से यूपी सम्मिट के लिए जो प्रस्ताव गए हैं। उन प्रस्तावों को प्रशासन पूरा कराने की हर संभव कोशिश करेगा। किसी तरह की अड़चन होगी तो उसे दूर कराया जाएगा। आरपी सिंह, जिलाधिकारी