{"_id":"59f7680c4f1c1b9e678b8675","slug":"191509386252-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सपा-भाजपा में असमंजस, बसपा ने घोषित किया महापौर प्रत्याशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सपा-भाजपा में असमंजस, बसपा ने घोषित किया महापौर प्रत्याशी
Updated Mon, 30 Oct 2017 11:34 PM IST
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फिरोजाबाद। सपा और भाजपा को महापौर का प्रत्याशी चुनने का चयन करने में पसीना छूट रहा है। प्रत्याशी चयन के लिए कई दौर की बैठकों के बाद भी दोनों पार्टियां महापौर का उम्मीदवार तय नहीं कर पाई हैं। सपा ने दो नाम पैनल में तय कर लिए थे, लेकिन बसपा का उम्मीदवार घोषित होने के बाद सपा दमदार चेहरे पर फिर से मंथन कर रही है। भाजपा जातीय समीकरणों में उलझ गई है।
खास बात यह है कि दोनों ही दलों को महिला उम्मीदवार के रूप में दमदार चेहरा नहीं मिल रहा है। पार्टी की पुरुष दीर्घा में शामिल वरिष्ठ नेताओं के नाम पर ही उनकी परिवार की महिलाओं को उम्मीदवार बनाया जाएगा।
नगर निगम के लिए पहली बार चुनाव हो रहा है। महापौर की सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित होने के बाद महिलाओं में दमदार चेहरे की तलाश सपा और भाजपा कर रही है। जिले में यूं तो महिला राजनीति शुरू से हाशिए पर है, लेकिन पार्टी फ्रंट लाइन पर आगे बढ़ कर जो महिलाएं राजनीति कर रही हैं।
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उनको उम्मीदवार बनाने से सपा और भाजपा दोनों ही हिचक रहे हैं। सीधे तौर पर कहा जाए तो राजनीति में सक्रिय महिला कार्यकर्ताओं के नाम पर विचार तक नहीं किया जा रहा। पुरुष दीर्घा के वरिष्ठ नेताओं के नामों पर चर्चा और मंथन हो रहा है। सबसे पहले बात की जाए भाजपा की तो पार्टी में जितने भी नाम टिकट की दावेदारी में चल रहे हैं उन परिवारों की एक भी महिला सक्रिय राजनीति में नहीं है।
महिला आरक्षण की मजबूरी के चलते इनमें से कुछ सभासद नाम के लिए रहीं। कामकाज उनके परिवार के पुरूष संभाल कर राजनीति का चेहरा बने रहे। भाजपा में पिछड़ा वर्ग से जुड़ी कुछ एक महिला कार्यकर्ता सक्रिय राजनीति में है तो उनके नाम पर विचार तक नहीं। यही हाल समाजवादी पार्टी का है। सपा में पिछड़ा वर्ग की कई महिलाएं वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं।
पार्टी संगठन में कई पदों पर रही, लेकिन पुरूषों की जमात से कद्दावर नेताओं के नाम चल रहे हैं। ऐसे में महिला कार्यकर्ताओं के नाम दब गए हैं। सपा ने महिला उम्मीदवार के रूप में महापौर के लिए जिन तीन नामों को पैनल में शामिल किया है उनमें से एक भी नाम ऐसा नहीं जो कभी पार्टी की किसी बैैठक में गई हों। इनके पति पार्टी में बड़ा चेहरा जरूर हैं, इसलिए इनके नामों पर मंथन हो रहा है।
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खास बात यह है कि दोनों ही दलों को महिला उम्मीदवार के रूप में दमदार चेहरा नहीं मिल रहा है। पार्टी की पुरुष दीर्घा में शामिल वरिष्ठ नेताओं के नाम पर ही उनकी परिवार की महिलाओं को उम्मीदवार बनाया जाएगा।
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नगर निगम के लिए पहली बार चुनाव हो रहा है। महापौर की सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित होने के बाद महिलाओं में दमदार चेहरे की तलाश सपा और भाजपा कर रही है। जिले में यूं तो महिला राजनीति शुरू से हाशिए पर है, लेकिन पार्टी फ्रंट लाइन पर आगे बढ़ कर जो महिलाएं राजनीति कर रही हैं।
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उनको उम्मीदवार बनाने से सपा और भाजपा दोनों ही हिचक रहे हैं। सीधे तौर पर कहा जाए तो राजनीति में सक्रिय महिला कार्यकर्ताओं के नाम पर विचार तक नहीं किया जा रहा। पुरुष दीर्घा के वरिष्ठ नेताओं के नामों पर चर्चा और मंथन हो रहा है। सबसे पहले बात की जाए भाजपा की तो पार्टी में जितने भी नाम टिकट की दावेदारी में चल रहे हैं उन परिवारों की एक भी महिला सक्रिय राजनीति में नहीं है।
महिला आरक्षण की मजबूरी के चलते इनमें से कुछ सभासद नाम के लिए रहीं। कामकाज उनके परिवार के पुरूष संभाल कर राजनीति का चेहरा बने रहे। भाजपा में पिछड़ा वर्ग से जुड़ी कुछ एक महिला कार्यकर्ता सक्रिय राजनीति में है तो उनके नाम पर विचार तक नहीं। यही हाल समाजवादी पार्टी का है। सपा में पिछड़ा वर्ग की कई महिलाएं वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं।
पार्टी संगठन में कई पदों पर रही, लेकिन पुरूषों की जमात से कद्दावर नेताओं के नाम चल रहे हैं। ऐसे में महिला कार्यकर्ताओं के नाम दब गए हैं। सपा ने महिला उम्मीदवार के रूप में महापौर के लिए जिन तीन नामों को पैनल में शामिल किया है उनमें से एक भी नाम ऐसा नहीं जो कभी पार्टी की किसी बैैठक में गई हों। इनके पति पार्टी में बड़ा चेहरा जरूर हैं, इसलिए इनके नामों पर मंथन हो रहा है।