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द्वारिकाधीश मंदिर का विवाद पहुंचा अदालत
Updated Fri, 21 Jul 2017 11:53 PM IST
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द्वारिकाधीश मंदिर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मैनपुरी। नगर के 300 साल पुराने द्वारिकाधीश मंदिर को लेकर शुरू हुआ विवाद अदालत तक पहुंच गया है। मंदिर हथियाने के लिए नियम विरुद्ध ट्रस्ट बनाने का आरोप लगाकर हलवाई समाज आमने-सामने आया है। ट्रस्ट बनाने वालों का समाज में खुला विरोध शुरू हो गया है। ट्रस्ट का गठन भी नियम विरुद्ध किया गया बताया जा रहा है। दूसरे पक्ष द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाने पर अदालत में सुनवाई शुरू हो गई है।
करहल रोड स्थित 300 साल पुराने द्वारिकाधीश मंदिर की देखभाल हलवाई समाज करता है। यज्ञसैनी हलवाई समाज की तीन साल के लिए चुनी जाने वाली कार्यकारिणी ही मंदिर का प्रबंधन करती है। मंदिर कमेटी द्वारा पूजा करने के लिए मंदिर में सुनील शास्त्री को पुजारी की जिम्मेदारी दी है। मंदिर कमेटी द्वारा साल में बड़े स्तर पर साल के अधिमास, श्रावण माह में कथाएं, भंडारा, जन्माष्टमी, होली से पूर्व द्वारिकाधीश रथयात्रा का आयोजन किया जाता है। मंदिर संपत्ति की कीमत छह करोड़ से अधिक की आंकी गई है। अब इसे लेकर समाज में विवाद शुरू हो गया है।
समाज के लक्ष्मीनरायन गुप्ता, शिवनरायन गुप्ता, राजीव गुप्ता, कौशल किशोर गुप्ता, दीपक गुप्ता ने दीवानी अदालत की शरण ली है। आरोप लगाया है कि मंदिर कमेटी के अध्यक्ष हरिश्चंद्र सराफ ने नियम विरुद्ध तरीके से 15 लोगों का ट्रस्ट बनाकर मंदिर हथियाने की कोशिश की है। छह करोड़ से अधिक की संपत्ति हथियाने के लिए ट्रस्ट बनाने में केवल 900 रुपये का स्टांप लगाया है। उनका आरोप है कि समाज के बहुसंख्यक लोगों को विश्वास में लिए बिना मनमानी करके ट्रस्ट बनाया गया है। ट्रस्टी का उद्देश्य मंदिर को हथियाना ही है। उन्होंने मंदिर प्रबंधन के लिए रिसीवर नियुक्त करने का गुहार लगाई है। अदालत ने दूसरे पक्ष को नोटिस भेजा है। अदालत में मालिकाना हक तय करने के लिए 10 अगस्त को सुनवाई होगी। वहीं दूसरे पक्ष के हरिश्चंद्र का कहना है मंदिर की बेहतर देखभाल के लिए ट्रस्ट बनाया गया है।
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ट्रस्ट बनाने में कोर्ट की अनुमति जरूरी
सिविल के वकील एसएस यादव का कहना है ट्रस्ट का गठन निजी संपत्ति पर कराए गए धार्मिक अथवा सामाजिक संस्था के निर्माण की देखभाल के लिए किया जाता है। समाज की संपत्ति के लिए ट्रस्ट का गठन नहीं किया जा सकता है। ट्रस्ट के गठन के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी है लेकिन इस ट्रस्ट को बनाने से पहले कोर्ट से अनुमति नहीं ली गई है। वहीं विवाद की स्थिति होने पर कोर्ट रिसीवर नियुक्त कर सकता है।
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करहल रोड स्थित 300 साल पुराने द्वारिकाधीश मंदिर की देखभाल हलवाई समाज करता है। यज्ञसैनी हलवाई समाज की तीन साल के लिए चुनी जाने वाली कार्यकारिणी ही मंदिर का प्रबंधन करती है। मंदिर कमेटी द्वारा पूजा करने के लिए मंदिर में सुनील शास्त्री को पुजारी की जिम्मेदारी दी है। मंदिर कमेटी द्वारा साल में बड़े स्तर पर साल के अधिमास, श्रावण माह में कथाएं, भंडारा, जन्माष्टमी, होली से पूर्व द्वारिकाधीश रथयात्रा का आयोजन किया जाता है। मंदिर संपत्ति की कीमत छह करोड़ से अधिक की आंकी गई है। अब इसे लेकर समाज में विवाद शुरू हो गया है।
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समाज के लक्ष्मीनरायन गुप्ता, शिवनरायन गुप्ता, राजीव गुप्ता, कौशल किशोर गुप्ता, दीपक गुप्ता ने दीवानी अदालत की शरण ली है। आरोप लगाया है कि मंदिर कमेटी के अध्यक्ष हरिश्चंद्र सराफ ने नियम विरुद्ध तरीके से 15 लोगों का ट्रस्ट बनाकर मंदिर हथियाने की कोशिश की है। छह करोड़ से अधिक की संपत्ति हथियाने के लिए ट्रस्ट बनाने में केवल 900 रुपये का स्टांप लगाया है। उनका आरोप है कि समाज के बहुसंख्यक लोगों को विश्वास में लिए बिना मनमानी करके ट्रस्ट बनाया गया है। ट्रस्टी का उद्देश्य मंदिर को हथियाना ही है। उन्होंने मंदिर प्रबंधन के लिए रिसीवर नियुक्त करने का गुहार लगाई है। अदालत ने दूसरे पक्ष को नोटिस भेजा है। अदालत में मालिकाना हक तय करने के लिए 10 अगस्त को सुनवाई होगी। वहीं दूसरे पक्ष के हरिश्चंद्र का कहना है मंदिर की बेहतर देखभाल के लिए ट्रस्ट बनाया गया है।
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ट्रस्ट बनाने में कोर्ट की अनुमति जरूरी
सिविल के वकील एसएस यादव का कहना है ट्रस्ट का गठन निजी संपत्ति पर कराए गए धार्मिक अथवा सामाजिक संस्था के निर्माण की देखभाल के लिए किया जाता है। समाज की संपत्ति के लिए ट्रस्ट का गठन नहीं किया जा सकता है। ट्रस्ट के गठन के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी है लेकिन इस ट्रस्ट को बनाने से पहले कोर्ट से अनुमति नहीं ली गई है। वहीं विवाद की स्थिति होने पर कोर्ट रिसीवर नियुक्त कर सकता है।