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फर्जी नियुक्ति पत्र से बने प्रिंसिपल ने बेचा लाखों का स्क्रैप
Updated Fri, 21 Jul 2017 11:42 PM IST
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एटा।
अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक के नाम का फर्जी नियुक्ति पत्र दिखाकर प्रिंसिपल बने मुकेश गुप्ता ने 15 दिन के कार्यकाल में बिना टेंडर प्रक्रिया और प्रबंध समिति की अनुमति के जीआईसी का लाखों रुपये का स्क्रैप बेच दिया। गुरुवार को जब प्रिंसिपल का चार्ज छिना तो मुकेश गुप्ता ने आननफानन में स्क्रैप बेचने का चालान फार्म जीआईसी में जमा करा दिया। जीआईसी का स्क्रैप चुपचाप बेचने के मामले में डीआईओएस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जीआईसी के प्रिंसिपल राकेश यादव ने बताया कि 16 जुलाई को प्रिंसिपल मुकेश गुप्ता ने बिना समिति का गठन और निविदा जारी किए बिना लाखों रुपये का स्क्रैप बेच दिया। इसमें टिन चादर, लोहे के एंगल, रोशनदान, लोहे के कई गेट आदि थे। इनकी कीमत करीब तीन लाख रुपये है। जीआईसी के सूत्र इस मामले में डीआईओएस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। इधर, जिला विद्यालय निरीक्षक एसपी यादव ने प्रिंसिपल मुकेश कुमार गुप्ता को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर फर्जी नियुक्ति पत्र उन्हें कहां से मिला और किसने दिलाया।
एक लाख रुपये लेनदेन आया सामने
जीआईसी के प्रिंसिपल की कुर्सी दिलाने के लिए अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक के नाम से जारी फर्जी नियुक्ति पत्र दिलाने में एक लाख रुपये लेनदेन का मामला सामने आया है। कॉलेज सूत्रों का दावा है कि अब शिक्षा निदेशालय में दलाली करने वाले कॉलेज के शिक्षक और प्रिंसिपल मुकेश गुप्ता के बीच रुपये मांगने पर ठन गई है। यह भी बताया गया है कि कॉलेज का एक दलाल शिक्षक जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता के साथ मामले को निपटाने के लिए लखनऊ रवाना हो चुका है। मुकेश गुप्ता की ट्रांसफर फाइल में उसी भाजपा नेता की सिफारिश का पत्र लगा है।
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जीआईसी का स्क्रैप बेचने के लिए समिति का गठन होना जरूरी है। बिना समिति की इजाजत के स्क्रैप नहीं बेचा जा सकता। मामले की जांच कराई जाएगी। स्क्रैप बेचने में मेरी कोई भूमिका नहीं है, मुझे इसकी जानकारी तक नहीं है।
- एसपी यादव, डीआईओएस एटा
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अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक के नाम का फर्जी नियुक्ति पत्र दिखाकर प्रिंसिपल बने मुकेश गुप्ता ने 15 दिन के कार्यकाल में बिना टेंडर प्रक्रिया और प्रबंध समिति की अनुमति के जीआईसी का लाखों रुपये का स्क्रैप बेच दिया। गुरुवार को जब प्रिंसिपल का चार्ज छिना तो मुकेश गुप्ता ने आननफानन में स्क्रैप बेचने का चालान फार्म जीआईसी में जमा करा दिया। जीआईसी का स्क्रैप चुपचाप बेचने के मामले में डीआईओएस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जीआईसी के प्रिंसिपल राकेश यादव ने बताया कि 16 जुलाई को प्रिंसिपल मुकेश गुप्ता ने बिना समिति का गठन और निविदा जारी किए बिना लाखों रुपये का स्क्रैप बेच दिया। इसमें टिन चादर, लोहे के एंगल, रोशनदान, लोहे के कई गेट आदि थे। इनकी कीमत करीब तीन लाख रुपये है। जीआईसी के सूत्र इस मामले में डीआईओएस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। इधर, जिला विद्यालय निरीक्षक एसपी यादव ने प्रिंसिपल मुकेश कुमार गुप्ता को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर फर्जी नियुक्ति पत्र उन्हें कहां से मिला और किसने दिलाया।
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एक लाख रुपये लेनदेन आया सामने
जीआईसी के प्रिंसिपल की कुर्सी दिलाने के लिए अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक के नाम से जारी फर्जी नियुक्ति पत्र दिलाने में एक लाख रुपये लेनदेन का मामला सामने आया है। कॉलेज सूत्रों का दावा है कि अब शिक्षा निदेशालय में दलाली करने वाले कॉलेज के शिक्षक और प्रिंसिपल मुकेश गुप्ता के बीच रुपये मांगने पर ठन गई है। यह भी बताया गया है कि कॉलेज का एक दलाल शिक्षक जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता के साथ मामले को निपटाने के लिए लखनऊ रवाना हो चुका है। मुकेश गुप्ता की ट्रांसफर फाइल में उसी भाजपा नेता की सिफारिश का पत्र लगा है।
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जीआईसी का स्क्रैप बेचने के लिए समिति का गठन होना जरूरी है। बिना समिति की इजाजत के स्क्रैप नहीं बेचा जा सकता। मामले की जांच कराई जाएगी। स्क्रैप बेचने में मेरी कोई भूमिका नहीं है, मुझे इसकी जानकारी तक नहीं है।
- एसपी यादव, डीआईओएस एटा