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नगला सम्बल में ओडीएफ के नाम पर खेल
Updated Thu, 04 Oct 2018 10:53 PM IST
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ओडीएफ के नाम पर करोड़ों का घोटाला
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। तय समय सीमा पर जिले को ओडीएफ करने के प्रयास में गांवों में बने शौचालयों का बंटाधार हो गया। जिन गांवों को ओडीएफ किया गया, वहां बने शौचालयों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। कहीं बिना गड्ढे खोदे ही शौचालय बना दिए गए तो कहीं ऐसे बनाए गए कि वह तेज हवा भी नहीं झेल सके। इसका उदाहरण है जिले के शीतलपुर ब्लाक की ग्राम पंचायत न्यौराई का गांव नगला संबल। यहां के प्रधान, सचिव ने बिना गड्ढे खुदवाए ही शौचालय बना दिए हैं। यहां ठेके पर बनाए गए शौचालयों की स्थिति खासी दयनीय है।
ग्राम पंचायत न्यौराई के गांव नगला सम्बल को प्रशासन ने 29 सितंबर को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक गांव में 164 शौचालयों का निर्माण कराया गया है। जबकि हकीकत यह है कि गांव में कई लोगों के शौचालय अब तक अधूरे हैं। प्रधान और सचिव ने मनमानी कर ठेके पर शौचालय का निर्माण कराया, लेकिन गड्ढे नहीं खुदवाए। इसके साथ ही कई शौचालयों पर किया गया सीमेंटेड प्लास्टर गिरने लगा है। गुणवत्ता के अभाव में कई शौचालय अधूरे ही हैं और वह गिरने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान और सचिव ने शौचालय के लिए आई धनराशि में खेल किया है। शौचालय निर्माण में रुपये बचाए गए हैं। जितना रुपये सरकार ने दिया था, पूरा लगाया जाता तो शौचालय निर्माण की गुणवत्ता ठीक होती और लोग उसे इस्तेमाल कर पाते।
कहते हैं ग्रामीण
गांव में हर ओर बदहाली का आलम है। गलियां टूटी पड़ी हैं। शौचालयों के गड्ढे नहीं खुदवाए गए। गांव में बीमारियां फैल रही हैं।
धर्मवीर
लोग खुले में शौच जाते हैं। एक महीने पहले बने शौचालय गिर गए हैं। साथ ही कई शौचालय के प्लास्टर गिर गए हैं। प्रधान गांव में आते नहीं हैं।
मनवीर
इनका कहना है
हमने गांव में काम कराया है। शौचालयों के निर्माण में कोई धांधली नहीं की गई है। ग्रामीणों के आरोप गलत हैं।
हरिबाबू, प्रधान प्रतिनिधि
बरसात के चलते गड्ढे नहीं खुद सके। शौचालयों का निर्माण करा दिया है। अब तक विभाग से भुगतान नहीं किया गया है। जल्द ही गड्ढे खुदवा दिए जाएंगे। गांव को ओडीएफ कर दिया है। समय-समय पर गांव जाते हैं।
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मुनेश गुप्ता, पंचायत सचिव
गांव नगला सम्बल की शिकायत मिली है। मामले की जांच के लिए डीपीआरओ को निर्देशित किया गया है। शौचालय निर्माण में नियमों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।
उग्रसेन पांडेय, सीडीओ
विकास को तरस रहा गांव
इसके साथ ही गांव की गलियों में खड़ंजा नहीं हुआ है। जबकि कीचड़ से गांव में गंदगी का अंबार लगा है। इससे गांव में बीमारियां फैल रही हैं। मगर गांव के विकास की ओर ग्राम प्रधान और सचिव का कोई ध्यान नहीं है।
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ग्राम पंचायत न्यौराई के गांव नगला सम्बल को प्रशासन ने 29 सितंबर को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक गांव में 164 शौचालयों का निर्माण कराया गया है। जबकि हकीकत यह है कि गांव में कई लोगों के शौचालय अब तक अधूरे हैं। प्रधान और सचिव ने मनमानी कर ठेके पर शौचालय का निर्माण कराया, लेकिन गड्ढे नहीं खुदवाए। इसके साथ ही कई शौचालयों पर किया गया सीमेंटेड प्लास्टर गिरने लगा है। गुणवत्ता के अभाव में कई शौचालय अधूरे ही हैं और वह गिरने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान और सचिव ने शौचालय के लिए आई धनराशि में खेल किया है। शौचालय निर्माण में रुपये बचाए गए हैं। जितना रुपये सरकार ने दिया था, पूरा लगाया जाता तो शौचालय निर्माण की गुणवत्ता ठीक होती और लोग उसे इस्तेमाल कर पाते।
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कहते हैं ग्रामीण
गांव में हर ओर बदहाली का आलम है। गलियां टूटी पड़ी हैं। शौचालयों के गड्ढे नहीं खुदवाए गए। गांव में बीमारियां फैल रही हैं।
धर्मवीर
लोग खुले में शौच जाते हैं। एक महीने पहले बने शौचालय गिर गए हैं। साथ ही कई शौचालय के प्लास्टर गिर गए हैं। प्रधान गांव में आते नहीं हैं।
मनवीर
इनका कहना है
हमने गांव में काम कराया है। शौचालयों के निर्माण में कोई धांधली नहीं की गई है। ग्रामीणों के आरोप गलत हैं।
हरिबाबू, प्रधान प्रतिनिधि
बरसात के चलते गड्ढे नहीं खुद सके। शौचालयों का निर्माण करा दिया है। अब तक विभाग से भुगतान नहीं किया गया है। जल्द ही गड्ढे खुदवा दिए जाएंगे। गांव को ओडीएफ कर दिया है। समय-समय पर गांव जाते हैं।
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मुनेश गुप्ता, पंचायत सचिव
गांव नगला सम्बल की शिकायत मिली है। मामले की जांच के लिए डीपीआरओ को निर्देशित किया गया है। शौचालय निर्माण में नियमों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।
उग्रसेन पांडेय, सीडीओ
विकास को तरस रहा गांव
इसके साथ ही गांव की गलियों में खड़ंजा नहीं हुआ है। जबकि कीचड़ से गांव में गंदगी का अंबार लगा है। इससे गांव में बीमारियां फैल रही हैं। मगर गांव के विकास की ओर ग्राम प्रधान और सचिव का कोई ध्यान नहीं है।