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उतर प्रदेश सरकार को मंदिर के अधिग्रहण का अधिकार नहीं: विश्वेंद्र सिंह
Updated Sun, 14 Jan 2018 11:25 PM IST
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- फोटो : डेमो
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गोवर्धन (मथुरा)। श्राइन बोर्ड बना कर मंदिरों के अधिग्रहण के मामले में नया मोड़ आ गया है। रविवार को गिरिराज तलहटी के प्रमुख दसविसा मुकुट मुखारबिंद मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे भरतपुर रियासत के पूर्व सांसद एवं वर्तमान विधायक विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि मंदिर उनके पूर्वजों का है।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणा सुप्रीम कोर्ट से बड़ी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर को भरतपुर रॉयल फैमिली रिलीजियस एवं सेरिमोनियल ट्रस्ट का माना है। उन्होंने बताया कि मंदिर में सेवा पूजा स्थानीय ब्राह्मणों द्वारा की जाती है। श्रद्धालुआें की व्यवस्थाओं में अभी कमी है लेकिन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतर व्यवस्थाएं भरतपुर रॉयल फेमिली रिलीजियस एवं सेरिमोनियल ट्रस्ट की ओर से कराई जाएंगी।
इस दौरान राजा विश्वेंद्र सिंह ने पत्नी पूर्व सांसद दिव्या सिंह, पुत्र कुंवर अनिरुद्ध सिंह के साथ गिरिराज जी की सामूहिक पूजा-अर्चना की। उन्होंने गिरिराज जी के मंदिर पर प्रमुख शिला पर माल्यार्पण किया और आरती उतारी। इसके बाद मंदिर प्रांगण में ही गिरिराज जी की शिला पर दूध चढ़ाया। इसके बाद राजा के मंदिर पर पूजा अर्चना की।
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राजा के स्वागत की लगी होड़
गोवर्धन। गोवर्धन पहुंचने पर राजा विश्वेंद्र सिंह व उनके परिवार का स्वागत डीग अड्डा पर अवागढ़ के राजा रालोद के जिलाध्यक्ष कुंवर नरेंद्र सिंह ने किया। इसके बाद भरतपुर रियासत के कुल पुरोहित विनोद लवानियां, सतीश बोहरे, सिद्ध सिद्धांत योग एकेडमी के प्रबंधक पुरोहित दाऊ दयाल लवानियां ने किया। इस मौके जितेन्द्र शर्मा, सौरभ, गौरव शर्मा, इंद्रजीत भारद्वाज, संजय शुक्ल, महेन्द्र तिवारी, नेंम सिंह फौजदार, हेमराज, विजय सिंह, दीवान सिंह आदि थे।
सैकड़ों समर्थकों के साथ पहुंचे राजा विश्वेंद्र सिंह
गोवर्धन। गिरिराज जी की पूजा अर्चना करने पहुंचे राजा विश्वेंद्र सिंह सैकड़ों समर्थकों के साथ पहुंचे। वहां उनके समर्थकों ने जयकारे लगाना शुरू कर दिया। वे प्रमुख मंदिर के अंदर के शिला को पोशाक पहनाए जाने के कारण सिर्फ मुख्य शिला पर माल्यार्पण व आरती कर पाए।
सरकार की ओर से श्राइन बोर्ड के गठन की हुई है घोषणा
गोवर्धन। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तीर्थ विकास परिषद का गठन कर गिरिराज पर्वत के संरक्षण के लिए श्राइन बोर्ड के गठन की घोषणा की है। गिरिराज जी के मंदिर के अधिग्रहण की बात बोर्ड के अधिकार में रखी गई है। जैसे ही सूचना यहां के सेवायतों को लगी तो विरोध शुरू हो गया है। जतीपुरा-आन्यौर लेकर दसविसा व दानघाटी मंदिर के हजारों सेवायत विरोध करने में लगे हैं। भरतपुर के राजा विश्वेंद्र सिंह ने मंदिर के मामले को लेकर सरकार को सीधे चुनौती दी है। अवागढ़ नरेश रालोद के जिलाध्यक्ष कुंवर नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार मंदिरों में अपना व्यवसाय ढूंढ रही है।
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इस मौके पर उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणा सुप्रीम कोर्ट से बड़ी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर को भरतपुर रॉयल फैमिली रिलीजियस एवं सेरिमोनियल ट्रस्ट का माना है। उन्होंने बताया कि मंदिर में सेवा पूजा स्थानीय ब्राह्मणों द्वारा की जाती है। श्रद्धालुआें की व्यवस्थाओं में अभी कमी है लेकिन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतर व्यवस्थाएं भरतपुर रॉयल फेमिली रिलीजियस एवं सेरिमोनियल ट्रस्ट की ओर से कराई जाएंगी।
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इस दौरान राजा विश्वेंद्र सिंह ने पत्नी पूर्व सांसद दिव्या सिंह, पुत्र कुंवर अनिरुद्ध सिंह के साथ गिरिराज जी की सामूहिक पूजा-अर्चना की। उन्होंने गिरिराज जी के मंदिर पर प्रमुख शिला पर माल्यार्पण किया और आरती उतारी। इसके बाद मंदिर प्रांगण में ही गिरिराज जी की शिला पर दूध चढ़ाया। इसके बाद राजा के मंदिर पर पूजा अर्चना की।
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राजा के स्वागत की लगी होड़
गोवर्धन। गोवर्धन पहुंचने पर राजा विश्वेंद्र सिंह व उनके परिवार का स्वागत डीग अड्डा पर अवागढ़ के राजा रालोद के जिलाध्यक्ष कुंवर नरेंद्र सिंह ने किया। इसके बाद भरतपुर रियासत के कुल पुरोहित विनोद लवानियां, सतीश बोहरे, सिद्ध सिद्धांत योग एकेडमी के प्रबंधक पुरोहित दाऊ दयाल लवानियां ने किया। इस मौके जितेन्द्र शर्मा, सौरभ, गौरव शर्मा, इंद्रजीत भारद्वाज, संजय शुक्ल, महेन्द्र तिवारी, नेंम सिंह फौजदार, हेमराज, विजय सिंह, दीवान सिंह आदि थे।
सैकड़ों समर्थकों के साथ पहुंचे राजा विश्वेंद्र सिंह
गोवर्धन। गिरिराज जी की पूजा अर्चना करने पहुंचे राजा विश्वेंद्र सिंह सैकड़ों समर्थकों के साथ पहुंचे। वहां उनके समर्थकों ने जयकारे लगाना शुरू कर दिया। वे प्रमुख मंदिर के अंदर के शिला को पोशाक पहनाए जाने के कारण सिर्फ मुख्य शिला पर माल्यार्पण व आरती कर पाए।
सरकार की ओर से श्राइन बोर्ड के गठन की हुई है घोषणा
गोवर्धन। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तीर्थ विकास परिषद का गठन कर गिरिराज पर्वत के संरक्षण के लिए श्राइन बोर्ड के गठन की घोषणा की है। गिरिराज जी के मंदिर के अधिग्रहण की बात बोर्ड के अधिकार में रखी गई है। जैसे ही सूचना यहां के सेवायतों को लगी तो विरोध शुरू हो गया है। जतीपुरा-आन्यौर लेकर दसविसा व दानघाटी मंदिर के हजारों सेवायत विरोध करने में लगे हैं। भरतपुर के राजा विश्वेंद्र सिंह ने मंदिर के मामले को लेकर सरकार को सीधे चुनौती दी है। अवागढ़ नरेश रालोद के जिलाध्यक्ष कुंवर नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार मंदिरों में अपना व्यवसाय ढूंढ रही है।