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डीएपी और जिंक के नमूने फेल होने पर चार लाइसेंस निरस्त
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खाद के सैंपल फेल, पांच दुकानों के लाइसेंस निरस्त
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
एटा। प्रमुख सचिव कृषि और जिलाधिकारी के निर्देश पर कृषि अधिकारियों ने नवंबर में उर्वरक के नमूने भरे गए। नमूने प्रयोगशाला से पिछले दिनों आई रिपोर्ट में जिनमें नमूने फेल बताए। इनमें से एक उर्वरक विक्रेता के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है, अब विभागीय अधिकारियों ने लाइसेंस निरस्त की कार्रवाई भी की है।
कृषि विभाग द्वारा शासन और प्रशासन के निर्देश पर कृषि विभाग ने 22 नवंबर 2018 को ताबड़ तोड़ छापामार कार्रवाई उर्वरक विक्रेताओं के यहां की थी। इस दौरान उर्वरक विक्रेताओं के यहां से खाद के नमूने लिए गए, जिन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया। जिस उर्वरक को 33 फीसदी से अधिक होना चाहिए वह मात्र दो फीसदी पाई गई। इससे साफ है कि उर्वरक विक्रेताओं ने नकली खाद की बिक्री किसानों को की है।
इनके फेल हुए नमूने
मां दुर्गे खाद बीज भंडार रिजोर, सुशील ट्रेडर्स एटा और सोनी खाद भंडार रिजोर शामिल हैं। इनमें से सोनी खाद भंडार रिजोर के खिलाफ पिछले दिनों कृषि अधिकारियों ने एफआईआर भी दर्ज करा थी। अब लाइसेंस निरस्त कर खाद व्यापार पर हमेशा के लिए पाबंदी लगा दी है। वहीं जैन खाद भंडार जलेसर को पिछले दिनों यूरिया खाद को निर्धारित दर से अधिक पर बिक्री करते हुए पाया गया था। चारों उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की गई है। जिला कृषि अधिकारी एमपी सिंह का कहना है कि तीन उर्वरक विक्रेताओं के यहां से डीएपी के नमूने लिए गए थे वह फेल हुए हैं जबकि एक को अधिक दर पर बिक्री करते पाया गया था। चारों के लाइसेंस निरस्त कर कार्रवाई की गई है।
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अब तक 17 नमूने हुए फेल
कृषि अधिकारियों द्वारा जिले भर ले लिए गए नमूनों में से अब तक 17 विक्रेताओं के नमूने प्रयोगशाला लखनऊ में फेल हुए हैं, जिनके खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण अथवा एफआईआर कराई जा चुकी हैं। इनमें से कुछ विक्रेताओं ने कार्रवाई से बचने के लिए निदेशक कृषि के यहां अपील भी की है। मगर अभी तक किसी को भी राहत नहीं मिल सकी है।
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कृषि विभाग द्वारा शासन और प्रशासन के निर्देश पर कृषि विभाग ने 22 नवंबर 2018 को ताबड़ तोड़ छापामार कार्रवाई उर्वरक विक्रेताओं के यहां की थी। इस दौरान उर्वरक विक्रेताओं के यहां से खाद के नमूने लिए गए, जिन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया। जिस उर्वरक को 33 फीसदी से अधिक होना चाहिए वह मात्र दो फीसदी पाई गई। इससे साफ है कि उर्वरक विक्रेताओं ने नकली खाद की बिक्री किसानों को की है।
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इनके फेल हुए नमूने
मां दुर्गे खाद बीज भंडार रिजोर, सुशील ट्रेडर्स एटा और सोनी खाद भंडार रिजोर शामिल हैं। इनमें से सोनी खाद भंडार रिजोर के खिलाफ पिछले दिनों कृषि अधिकारियों ने एफआईआर भी दर्ज करा थी। अब लाइसेंस निरस्त कर खाद व्यापार पर हमेशा के लिए पाबंदी लगा दी है। वहीं जैन खाद भंडार जलेसर को पिछले दिनों यूरिया खाद को निर्धारित दर से अधिक पर बिक्री करते हुए पाया गया था। चारों उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की गई है। जिला कृषि अधिकारी एमपी सिंह का कहना है कि तीन उर्वरक विक्रेताओं के यहां से डीएपी के नमूने लिए गए थे वह फेल हुए हैं जबकि एक को अधिक दर पर बिक्री करते पाया गया था। चारों के लाइसेंस निरस्त कर कार्रवाई की गई है।
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अब तक 17 नमूने हुए फेल
कृषि अधिकारियों द्वारा जिले भर ले लिए गए नमूनों में से अब तक 17 विक्रेताओं के नमूने प्रयोगशाला लखनऊ में फेल हुए हैं, जिनके खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण अथवा एफआईआर कराई जा चुकी हैं। इनमें से कुछ विक्रेताओं ने कार्रवाई से बचने के लिए निदेशक कृषि के यहां अपील भी की है। मगर अभी तक किसी को भी राहत नहीं मिल सकी है।