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ईस्ट इंडियाकाल में बने थे होली फेमिली, क्राइस्ट सीएनआई चर्च
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टूंडला। टूंडला शहर में सभी धर्मों को महत्व दिया गया है। टूंडला में बने चर्च आज भी अंग्रेजी हुकूमत की याद दिलाते हैं। अंग्रेजी शासनकाल में ईस्ट इंडिया कंपनी ने करीब 162 वर्ष पूर्व टूंडला में पहला चर्च बनाया था। दूसरा चर्च अंग्रेजी शासन काल में ही 157 साल पूर्व बनाया गया था। तीसरा चर्च भारत की आजादी के 41 वर्ष बाद करीब 29 साल पूर्व बनाया गया है।
भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी को दिल्ली से कोलकाता के लिए यातायात के साधनों में रेल लाइन बिछाने की जरूरत पड़ी। तब कंपनी ने रेलवे का इलाहाबाद व टूंडला को मुख्यालय बनाते हुए 17 अगस्त 1847 में रेल लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया था। इसके साथ टूंडला रेलवे स्टेशन बनना शुरू हो गया था।
जब यहां ईस्ट इंडिया कंपनी के अंग्रेज अधिकारी लॉड डोलहासिया पहुंचे तो उन्होंने 1856 में होली फैमिली चर्च की स्थापना कराई। जो रेलवे लाइन के निकट पूर्वी ओर में बना सबसे पुराना व भव्य चर्च है।
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इस चर्च में तब से आज तक रोमन कैथोलिक समुदाय द्वारा विशेष आयोजन प्रार्थना सभाएं आयोजित की जा रहीं हैं। इसके उपरांत ईस्ट इंडिया काल में ही 1860 में रेलवे स्टेशन के ठीक सामने ईसाइयों के दूसरे गुट के एक अंग्रेजी अधिकारी ने दूसरा चर्च बनाया था। इस चर्च को क्राइस्ट सीएनआई चर्च नार्थ इंडिया नाम से जाना जाता है।
फादर एंड्रयूज कोरिया बताते हैं कि रोमन कैथोलिक मदर मरियम को मानते हैं। वहीं नार्थ इंडिया वाले मदर मरियम को नहीं मानते। बाकी सभी पर्वों को एक जैसा मनाते हैं। तीसरा चर्च आजादी के करीब 41 वर्ष बाद नगर के बीचोंबीच थाने के पीछे 1989 में बनाया गया है। यह मैथोडिस्ट चर्च नाम से जाना जाता है। इस तरह टूंडला में ईसाई समुदाय के तीन चर्च हैं। जहां ईसाई समाज के तीन अलग-अलग समुदाय प्रार्थना सभाएं, अन्य पर्व व शादियां यहीं करते हैं।
भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी को दिल्ली से कोलकाता के लिए यातायात के साधनों में रेल लाइन बिछाने की जरूरत पड़ी। तब कंपनी ने रेलवे का इलाहाबाद व टूंडला को मुख्यालय बनाते हुए 17 अगस्त 1847 में रेल लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया था। इसके साथ टूंडला रेलवे स्टेशन बनना शुरू हो गया था।
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जब यहां ईस्ट इंडिया कंपनी के अंग्रेज अधिकारी लॉड डोलहासिया पहुंचे तो उन्होंने 1856 में होली फैमिली चर्च की स्थापना कराई। जो रेलवे लाइन के निकट पूर्वी ओर में बना सबसे पुराना व भव्य चर्च है।
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इस चर्च में तब से आज तक रोमन कैथोलिक समुदाय द्वारा विशेष आयोजन प्रार्थना सभाएं आयोजित की जा रहीं हैं। इसके उपरांत ईस्ट इंडिया काल में ही 1860 में रेलवे स्टेशन के ठीक सामने ईसाइयों के दूसरे गुट के एक अंग्रेजी अधिकारी ने दूसरा चर्च बनाया था। इस चर्च को क्राइस्ट सीएनआई चर्च नार्थ इंडिया नाम से जाना जाता है।
फादर एंड्रयूज कोरिया बताते हैं कि रोमन कैथोलिक मदर मरियम को मानते हैं। वहीं नार्थ इंडिया वाले मदर मरियम को नहीं मानते। बाकी सभी पर्वों को एक जैसा मनाते हैं। तीसरा चर्च आजादी के करीब 41 वर्ष बाद नगर के बीचोंबीच थाने के पीछे 1989 में बनाया गया है। यह मैथोडिस्ट चर्च नाम से जाना जाता है। इस तरह टूंडला में ईसाई समुदाय के तीन चर्च हैं। जहां ईसाई समाज के तीन अलग-अलग समुदाय प्रार्थना सभाएं, अन्य पर्व व शादियां यहीं करते हैं।