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जांच में एसिडिक निकला मूंगफली का तेल
Updated Fri, 07 Dec 2018 11:12 PM IST
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मैनपुरी। खाद्य पदार्थों की जांच में हर बार नया तथ्य सामने आता है। पहले दाल में मिनिरल ऑयल के प्रयोग का मामला सामने आया था, तो वहीं इस बार मूंगफली का तेल जांच में हानिकारक पाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद विभाग ने तेल विक्रेता पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। अधोमानक पाए गए अन्य पदार्थों के नमूनों के मामले में भी जुर्माना किया जाएगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सितंबर में बेवर के मल्लामई स्थित कृष्णा ऑयल मिल पर छापेमारी की थी। यहां मूंगफली की पिराई कर उससे तेल निकाला जा रहा था। टीम ने जब संचालक नारायण गुप्ता से अभिलेख मांगे तो उनके पास कोई अभिलेख नहीं मिले। ऐसे में बिना लाइसेंस संचालन पर उन पर मुकदमे की कार्रवाई लंबित है। इसके अलावा टीम ने संदेह होने पर मूंगफली के तेल का नमूना लेकर भी जांच के लिए राज्य प्रयोगशाला लखनऊ भेजा था।
पिछले सप्ताह आई रिपोर्ट में ये नमूना अनसेफ पाया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस तेल में एसिडिक तत्वों की अधिकता है। ऐसे में विभाग ने संचालक पर सीजेएम न्यायालय में मुकदमा करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। संचालक पर नमूना फेल होने व बिना लाइसेंस बिक्री करने के दो मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे। इसमें छह माह की सजा के साथ ही जुर्माना भी हो सकता है।
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इसके अलावा दूध, पनीर, कचरी, खोआ व सरसों के तेल के अन्य नौ नमूने भी फेल आए हैं। इसमें सरसों के तेल के दो, फैनी का एक, पनीर के तीन, दूध के दो और खोआ का एक नमूना अधोमानक पाया गया है। जिन दुकानों से ये नमूने लिए गए थे, उन पर अपर जिलाधिकारी द्वारा सुनवाई के बाद जुर्माना किया जाएगा। सभी दुकानदारों को रिपोर्ट आने के बाद नोटिस भेज दिया है।
तीन तरीके से फेल होते हैं नमूने
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जो नमूने जांच के लिए भेजे जाते हैं, वे तीन तरीके से फेल होता है। इसमें पहला है कि नमूने में कोई हानिकारक तत्व पाया जाए, तो ये नमूना अनसेफ (असुरक्षित) आता है। इसमें सीजेएम न्यायालय में वाद दायर किया जाता है। इसमें सजा व जुर्माना दोनों का प्रावधान है। दूसरा नमूना सबस्टेंडर्ड (अधोमानक) पाया जाता है, इसमें मिलावट तो की गई होती है पर हानिकारक नहीं होती। वहीं तीसरा नमूना मिस ब्रांड होता है, इसमें ब्रांडिंग में सूचना छिपाने या गलत सूचना देने के कारण इसे फेल कर दिया जाता है। इन दोनों मामलों में अपर जिलाधिकारी द्वारा जुर्माना किया जाता है।
जांच रिपोर्ट में मूंगफली का तेल अनसेफ मिला है। ऐसे में विक्रेता के खिलाफ मुकदमा चलेगा, कोर्ट जो भी निर्णय करेगा उसी के अनुसार संचालक को दंड मिलेगा।
डॉ. जतिन कुमार, अभिहित अधिकारी।
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खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सितंबर में बेवर के मल्लामई स्थित कृष्णा ऑयल मिल पर छापेमारी की थी। यहां मूंगफली की पिराई कर उससे तेल निकाला जा रहा था। टीम ने जब संचालक नारायण गुप्ता से अभिलेख मांगे तो उनके पास कोई अभिलेख नहीं मिले। ऐसे में बिना लाइसेंस संचालन पर उन पर मुकदमे की कार्रवाई लंबित है। इसके अलावा टीम ने संदेह होने पर मूंगफली के तेल का नमूना लेकर भी जांच के लिए राज्य प्रयोगशाला लखनऊ भेजा था।
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पिछले सप्ताह आई रिपोर्ट में ये नमूना अनसेफ पाया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस तेल में एसिडिक तत्वों की अधिकता है। ऐसे में विभाग ने संचालक पर सीजेएम न्यायालय में मुकदमा करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। संचालक पर नमूना फेल होने व बिना लाइसेंस बिक्री करने के दो मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे। इसमें छह माह की सजा के साथ ही जुर्माना भी हो सकता है।
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इसके अलावा दूध, पनीर, कचरी, खोआ व सरसों के तेल के अन्य नौ नमूने भी फेल आए हैं। इसमें सरसों के तेल के दो, फैनी का एक, पनीर के तीन, दूध के दो और खोआ का एक नमूना अधोमानक पाया गया है। जिन दुकानों से ये नमूने लिए गए थे, उन पर अपर जिलाधिकारी द्वारा सुनवाई के बाद जुर्माना किया जाएगा। सभी दुकानदारों को रिपोर्ट आने के बाद नोटिस भेज दिया है।
तीन तरीके से फेल होते हैं नमूने
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जो नमूने जांच के लिए भेजे जाते हैं, वे तीन तरीके से फेल होता है। इसमें पहला है कि नमूने में कोई हानिकारक तत्व पाया जाए, तो ये नमूना अनसेफ (असुरक्षित) आता है। इसमें सीजेएम न्यायालय में वाद दायर किया जाता है। इसमें सजा व जुर्माना दोनों का प्रावधान है। दूसरा नमूना सबस्टेंडर्ड (अधोमानक) पाया जाता है, इसमें मिलावट तो की गई होती है पर हानिकारक नहीं होती। वहीं तीसरा नमूना मिस ब्रांड होता है, इसमें ब्रांडिंग में सूचना छिपाने या गलत सूचना देने के कारण इसे फेल कर दिया जाता है। इन दोनों मामलों में अपर जिलाधिकारी द्वारा जुर्माना किया जाता है।
जांच रिपोर्ट में मूंगफली का तेल अनसेफ मिला है। ऐसे में विक्रेता के खिलाफ मुकदमा चलेगा, कोर्ट जो भी निर्णय करेगा उसी के अनुसार संचालक को दंड मिलेगा।
डॉ. जतिन कुमार, अभिहित अधिकारी।