{"_id":"5bd08d53bdec22697f67fdbc","slug":"171540394323-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो बार जलाए फसल अवशेष तो छिनेगा अनुदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो बार जलाए फसल अवशेष तो छिनेगा अनुदान
Updated Wed, 24 Oct 2018 08:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। फसल अवशेष जलाना किसानों के लिए अब महंगा पड़ सकता है। इसके लिए शासन ने आदेश जारी कर दिया है। कृषि विभाग भी किसानों पर अपनी नजर लगाए हुए हैं। अगर किसानों ने फसल अवशेष जलाने की गलती की तो आजीवन उन्हें कृषि विभाग द्वारा मिलने वाले लाभ से वंचित कर दिया जाएगा।
फसल अवशेष जलाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रतिबंध लगा रखा है। क्योंकि इससे पर्यावरण में प्रदूषण और ग्लोबल वॉर्मिंग जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके लिए बाकायदा जुर्माने का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसका किसानों पर कोई खास असर नहीं हो रहा था। वे धड़ल्ले से फसल अवशेषों को जला रहे थे। इसी के चलते अब किसानों से अनुदान छीनने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए शासन से सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी किया है।
जिसमें साफ कहा गया है कि अगर कोई किसान दो बार फसल अवशेष जलाता है तो उससे जीवन भर के लिए कृषि विभाग से मिलने वाला अनुदान बंद हो जाएगा। ऐसे में किसानों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। क्योंकि विभाग की ओर से उन्हें सभी बीजों के साथ-साथ कृषि यंत्र व अन्य चीजों पर भी अनुदान दिया जाता है। इस आदेश के बाद किसान भी थोड़े सचेत हो गए हैं। वे फसल अवशेष जलाने से बच रहे हैं।
विज्ञापन
50 फीसदी तक मिलता है अनुदान
किसानों को कृषि विभाग व उद्यान विभाग की ओर से कृषि संबंधी कई चीजों पर अनुदान दिया जाता है। जिसमें रबी के बीज पर 60 फीसदी, खरीफ के बीज पर 50 फीसदी, सब्जियों के बीज पर 60 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है। वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई पर 90 फीसदी और कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है।
बड़े पैमाने पर होती है धान की खेती
जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। पूरे मंडल में धान की खेती के हिसाब से मैनपुरी नंबर एक पर है। यहां 60 से 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की पैदावार की जाती है। अधिक उत्पादन के चलते ही मैनपुरी मंडी तो पूरे प्रदेश में धान की सबसे बड़ी मंडी भी माना जाता है।
विज्ञापन
फसल अवशेष जलाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रतिबंध लगा रखा है। क्योंकि इससे पर्यावरण में प्रदूषण और ग्लोबल वॉर्मिंग जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके लिए बाकायदा जुर्माने का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसका किसानों पर कोई खास असर नहीं हो रहा था। वे धड़ल्ले से फसल अवशेषों को जला रहे थे। इसी के चलते अब किसानों से अनुदान छीनने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए शासन से सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी किया है।
विज्ञापन
जिसमें साफ कहा गया है कि अगर कोई किसान दो बार फसल अवशेष जलाता है तो उससे जीवन भर के लिए कृषि विभाग से मिलने वाला अनुदान बंद हो जाएगा। ऐसे में किसानों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। क्योंकि विभाग की ओर से उन्हें सभी बीजों के साथ-साथ कृषि यंत्र व अन्य चीजों पर भी अनुदान दिया जाता है। इस आदेश के बाद किसान भी थोड़े सचेत हो गए हैं। वे फसल अवशेष जलाने से बच रहे हैं।
विज्ञापन
50 फीसदी तक मिलता है अनुदान
किसानों को कृषि विभाग व उद्यान विभाग की ओर से कृषि संबंधी कई चीजों पर अनुदान दिया जाता है। जिसमें रबी के बीज पर 60 फीसदी, खरीफ के बीज पर 50 फीसदी, सब्जियों के बीज पर 60 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है। वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई पर 90 फीसदी और कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है।
बड़े पैमाने पर होती है धान की खेती
जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। पूरे मंडल में धान की खेती के हिसाब से मैनपुरी नंबर एक पर है। यहां 60 से 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की पैदावार की जाती है। अधिक उत्पादन के चलते ही मैनपुरी मंडी तो पूरे प्रदेश में धान की सबसे बड़ी मंडी भी माना जाता है।