{"_id":"5bb4f91e867a55113f34028b","slug":"171538586910-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज, बख्श दिए जिम्मेदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज, बख्श दिए जिम्मेदार
Updated Wed, 03 Oct 2018 10:49 PM IST
विज्ञापन
छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज, बख्श दिए जिम्मेदार
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। जिले को खुले में शौच से मुक्त करने के दावे जब पूरे नहीं हुए तो उसकी गाज छोटे कर्मचारियों पर गिरा दी, जबकि जिम्मेदारों को बख्श दिया गया। दो अक्तूबर को जिला ओडीएफ नहीं हो पाया , बल्कि एक कंप्यूटर आपरेटर को हटाकर कार्रवाई का कोरम पूरा कर दिया गया। ओडीएफ का जिम्मा संभाल रहे बड़े अधिकारियों पर डीएम ने रहम कर दिया। इसे लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
दरअसल, जिले को ओडीएफ करने के लिए शासन ने दो अक्तूबर का लक्ष्य दिया था, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी और मनमानी के चलते लक्ष्य तय समय पर पूरा नहीं हो सका। मामले में डीएम आईपी पांडेय ने मिशन के विकास भवन स्थित कार्यालय में बीते दिनों छापा मारा, तो डाटा शिफ्टिंग का खेल पकड़ा। इस मामले में एक कंप्यूटर आपरेटर को हटा दिया लेकिन जिम्मेदारों से पूछताछ तक नहीं की। उधर कार्रवाई को लेकर सवालों का दौर शुरू हो गया है।
सवाल जिनके जवाब अधिकारियों तक के पास नहीं
क्या अकेला कंप्यूटर आपरेटर बिना अधिकारियों की अनुमति के डाटा शिफ्टिंग कर सकता है?
क्या केवल कंप्यूटर पर फर्जी एमआईएस करके जिले को ओडीएफ किया जा सकता था?
जमीन पर शौचालय अभियान में काम कर रहे अधिकारियों और मिशन के जिम्मेदारों को क्यों बख्श दिया गया?
सवालों को लेकर प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है। हालांकि मामले की जांच ज्वाइंट मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर को सौंपी गई हैै। जिससे उम्मीद है कि कई बड़े जिम्मेदार मामले में दोषी होंगे।
विज्ञापन
ठेके पर बने शौचालय, हुई वसूली
जिले में ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण के नाम पर बड़ा गोलमाल हुआ। लाभार्थियों से वसूली करके पहले सूची में नाम डाले गए। अधिकारियों की मिलीभगत से ठेके पर शौचालय बनवाए गए और प्रधान, सचिव ने लाभार्थियों से 12-12 हजार रुपये वसूले। सूत्र बताते हैं कि वसूली की पूरी रकम हर स्तर पर बांटी गई। मगर किसी को कुछ नजर नहीं आया और घोटाला चलता रहा।
मामले की जांच आई है। फिलहाल जांच प्रक्रिया में है। जल्द ही मामले में कार्रवाई की जाएगी।
महेंद्र सिंह तंवर, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
कहते हैं आंकड़े
783 गांव हो चुके हैं ओडीएफ
855 गांव किए जाने हैं ओडीएफ
118 गांवों का हुआ सत्यापन
665 गांवों का नहीं हुआ अब तक सत्यापन
विज्ञापन
दरअसल, जिले को ओडीएफ करने के लिए शासन ने दो अक्तूबर का लक्ष्य दिया था, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी और मनमानी के चलते लक्ष्य तय समय पर पूरा नहीं हो सका। मामले में डीएम आईपी पांडेय ने मिशन के विकास भवन स्थित कार्यालय में बीते दिनों छापा मारा, तो डाटा शिफ्टिंग का खेल पकड़ा। इस मामले में एक कंप्यूटर आपरेटर को हटा दिया लेकिन जिम्मेदारों से पूछताछ तक नहीं की। उधर कार्रवाई को लेकर सवालों का दौर शुरू हो गया है।
विज्ञापन
सवाल जिनके जवाब अधिकारियों तक के पास नहीं
क्या अकेला कंप्यूटर आपरेटर बिना अधिकारियों की अनुमति के डाटा शिफ्टिंग कर सकता है?
क्या केवल कंप्यूटर पर फर्जी एमआईएस करके जिले को ओडीएफ किया जा सकता था?
जमीन पर शौचालय अभियान में काम कर रहे अधिकारियों और मिशन के जिम्मेदारों को क्यों बख्श दिया गया?
सवालों को लेकर प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है। हालांकि मामले की जांच ज्वाइंट मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर को सौंपी गई हैै। जिससे उम्मीद है कि कई बड़े जिम्मेदार मामले में दोषी होंगे।
विज्ञापन
ठेके पर बने शौचालय, हुई वसूली
जिले में ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण के नाम पर बड़ा गोलमाल हुआ। लाभार्थियों से वसूली करके पहले सूची में नाम डाले गए। अधिकारियों की मिलीभगत से ठेके पर शौचालय बनवाए गए और प्रधान, सचिव ने लाभार्थियों से 12-12 हजार रुपये वसूले। सूत्र बताते हैं कि वसूली की पूरी रकम हर स्तर पर बांटी गई। मगर किसी को कुछ नजर नहीं आया और घोटाला चलता रहा।
मामले की जांच आई है। फिलहाल जांच प्रक्रिया में है। जल्द ही मामले में कार्रवाई की जाएगी।
महेंद्र सिंह तंवर, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
कहते हैं आंकड़े
783 गांव हो चुके हैं ओडीएफ
855 गांव किए जाने हैं ओडीएफ
118 गांवों का हुआ सत्यापन
665 गांवों का नहीं हुआ अब तक सत्यापन