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शवों की जगह डीप फ्रीजर में ठंडा हो रहा पानी
Updated Fri, 24 Aug 2018 10:16 AM IST
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मैनपुरी। जिस डीप फ्रीजर में शवों का रखा जाना चाहिए। उसमें कर्मचारी पानी की बोतलें ठंडा करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। पोस्टमार्टम हाउस में लगी मशीन महज शोपीस बनी हुई है। वहीं, वहां आने वाले शव अभी भी एक कमरे में जमीन पर पड़े रहते हैं। कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते अज्ञात शवों को भी तीन दिनों तक खुले में छोड़ दिया जाता है।
जिला अस्पताल परिसर में बने पोस्टमार्टम हाउस पर शव की बेकदरी होती है। यहां बने पुराने भवन के बाहर ही शवों को जमीन पर रख दिया जाता है। वहीं, कुछ समय पहले ही पोस्टमार्टम हाउस में शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखे जाने को लेकर चार डीप फ्रीजर बाक्स लगवाए जा चुके हैं। इसमें शव तो आज तक नहीं रखे गए, मगर कर्मचारी इसमें पीने का पानी ठंडा जरूर करते हैं। शवों को रखे जाने वाले बाक्स में बोतलें हर समय मौजूद रहतीं हैं। जब शव रखने की बात कही जाती है तो कर्मचारी बिजली का कनेक्शन न होने की बात कहते हैं।
उनके मुताबिक अभी तक मशीन को चलाने की भार क्षमता वाला कनेक्शन नहीं किया गया। इससे शव बाक्सों में नहीं रखे जा सकते। अगर कर्मचारियों की लोड क्षमता की बात सही है तो फिर वहां लगे दो दो एसी भला कैसे हर समय चलते हैं। वहीं दूसरी ओर जिन शवों का कुछ घंटो में ही निस्तारण हो जाता है। अज्ञात शव तीन दिन तक रखे जाते हैं। वह वातानुकूलित वातावरण न होने के चलते दुर्गंध देने के साथ ही सड़ते हैं। साथ ही अज्ञात शवों के पोस्टमार्टम की महज औपचारिकता भी बाहर शव रखे कमरे के बरामदे में निपटा दी जाती है।
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जिला अस्पताल परिसर में बने पोस्टमार्टम हाउस पर शव की बेकदरी होती है। यहां बने पुराने भवन के बाहर ही शवों को जमीन पर रख दिया जाता है। वहीं, कुछ समय पहले ही पोस्टमार्टम हाउस में शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखे जाने को लेकर चार डीप फ्रीजर बाक्स लगवाए जा चुके हैं। इसमें शव तो आज तक नहीं रखे गए, मगर कर्मचारी इसमें पीने का पानी ठंडा जरूर करते हैं। शवों को रखे जाने वाले बाक्स में बोतलें हर समय मौजूद रहतीं हैं। जब शव रखने की बात कही जाती है तो कर्मचारी बिजली का कनेक्शन न होने की बात कहते हैं।
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उनके मुताबिक अभी तक मशीन को चलाने की भार क्षमता वाला कनेक्शन नहीं किया गया। इससे शव बाक्सों में नहीं रखे जा सकते। अगर कर्मचारियों की लोड क्षमता की बात सही है तो फिर वहां लगे दो दो एसी भला कैसे हर समय चलते हैं। वहीं दूसरी ओर जिन शवों का कुछ घंटो में ही निस्तारण हो जाता है। अज्ञात शव तीन दिन तक रखे जाते हैं। वह वातानुकूलित वातावरण न होने के चलते दुर्गंध देने के साथ ही सड़ते हैं। साथ ही अज्ञात शवों के पोस्टमार्टम की महज औपचारिकता भी बाहर शव रखे कमरे के बरामदे में निपटा दी जाती है।
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