{"_id":"598f1b424f1c1b061c8b48fb","slug":"171502550850-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंदी को जानने-समझने की ललक बढ़ रही है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंदी को जानने-समझने की ललक बढ़ रही है
Updated Sat, 12 Aug 2017 08:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा। मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डा. महेंद्रनाथ पांडेय शनिवार को केंद्रीय हिंदी संस्थान पहुंचे। उन्होंने हिंदी-ओड़िया अध्येता कोश का लोकार्पण और संस्थान के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग में स्थित अद्यतन प्रयोगशाला का उद्घाटन किया।
डा. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि हिंदी के प्रति आज वातावरण बदला है। कहीं हिंदी का विरोध नहीं है। हिंदी को जानने-समझने की ललक पहले की अपेक्षा बढ़ी है। जनजातीय भाषाओं पर केंद्रीय हिंदी संस्थान की ओर से किया गया कार्य प्रशंसनीय है। हिंदी भाषा शिक्षण को वैज्ञानिक शुद्धता और तकनीकी दक्षता के साथ जोड़ते हुए नई दिशाओं में काम करने की जरूरत है।
उन्होंने श्रीलंका से आए हिंदी अध्यापकों के विशेष प्रशिक्षणार्थी दल एवं सिक्किम राज्य से कोश निर्माण के लिए आए भाषा विशेषज्ञ सदस्यों से भी भेंट की। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डा. अरविंद कुमार दीक्षित विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। संस्थान के निदेशक प्रो. नंद किशोर पांडेय ने कहा कि संस्थान पांच हजार से अधिक विदेशी छात्रों को हिंदी में प्रशिक्षित कर चुका है।
विज्ञापन
पिछले वर्ष 42 देशों के हिंदी सीखने के लिए संस्थान में आए। संस्थान की ओर से 40 भाषाओं पर अध्येताकोश का निर्माण किया जा चुका है, जिनके बोलने वालों की संख्या आज 10 से 20 हजार मात्र बची है। इससे पहले मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री ने अतिथि गृह के सामने पौधरोपण और संस्थान के संस्थापक पद्मश्री डा. मोटूरि सत्यनारायण और डा. रामविलास शर्मा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
कार्यक्रम में प्रो. बीना शर्मा, प्रो. परमलाल अहिरवाल, अनुपम श्रीवास्तव, प्रो. उमापति दीक्षित, डा. देवेंद्र शुक्ल, डा. मीनाक्षी दुबे, डा. तस्मीना हुसैन, डा. गंगाधर वानोडे, डा. जोगेंद्र सिंह मीणा, केशरी नंदन, डा. आकाश भदौरिया आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
डा. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि हिंदी के प्रति आज वातावरण बदला है। कहीं हिंदी का विरोध नहीं है। हिंदी को जानने-समझने की ललक पहले की अपेक्षा बढ़ी है। जनजातीय भाषाओं पर केंद्रीय हिंदी संस्थान की ओर से किया गया कार्य प्रशंसनीय है। हिंदी भाषा शिक्षण को वैज्ञानिक शुद्धता और तकनीकी दक्षता के साथ जोड़ते हुए नई दिशाओं में काम करने की जरूरत है।
विज्ञापन
उन्होंने श्रीलंका से आए हिंदी अध्यापकों के विशेष प्रशिक्षणार्थी दल एवं सिक्किम राज्य से कोश निर्माण के लिए आए भाषा विशेषज्ञ सदस्यों से भी भेंट की। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डा. अरविंद कुमार दीक्षित विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। संस्थान के निदेशक प्रो. नंद किशोर पांडेय ने कहा कि संस्थान पांच हजार से अधिक विदेशी छात्रों को हिंदी में प्रशिक्षित कर चुका है।
विज्ञापन
पिछले वर्ष 42 देशों के हिंदी सीखने के लिए संस्थान में आए। संस्थान की ओर से 40 भाषाओं पर अध्येताकोश का निर्माण किया जा चुका है, जिनके बोलने वालों की संख्या आज 10 से 20 हजार मात्र बची है। इससे पहले मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री ने अतिथि गृह के सामने पौधरोपण और संस्थान के संस्थापक पद्मश्री डा. मोटूरि सत्यनारायण और डा. रामविलास शर्मा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
कार्यक्रम में प्रो. बीना शर्मा, प्रो. परमलाल अहिरवाल, अनुपम श्रीवास्तव, प्रो. उमापति दीक्षित, डा. देवेंद्र शुक्ल, डा. मीनाक्षी दुबे, डा. तस्मीना हुसैन, डा. गंगाधर वानोडे, डा. जोगेंद्र सिंह मीणा, केशरी नंदन, डा. आकाश भदौरिया आदि मौजूद रहे।